मुख्यमंत्री नीतीश कुमार आज विधान परिषद की सदस्यता से इस्तीफा देंगे. वे 2006 से लगातार विधान परिषद के सदस्य हैं. भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन भी आज बिहार विधानसभा की सदस्यता से इस्तीफा देंगे. वे भी 2006 से ही विधानसभा के सदस्य हैं. दोनों राज्यसभा के लिए निर्वाचित हुए हैं, इसलिए बिहार विधानमंडल की सदस्यता छोड़ रहे हैं.
सदन आकर देना होगा इस्तीफा
मुख्यमंत्री नीतीश कुमार विधान परिषद के सभापति अवधेश नारायण सिंह तो नितिन नवीन स्पीकर प्रेम कुमार को अपना इस्तीफा सौंपेंगे. सोमवार को नितिन नवीन असम में दो चुनावी सभाओं को संबोधित करेंगे. उसके बाद वे पटना आ सकते हैं. स्पीकर प्रेम कुमार ने रविवार को पत्रकारों से बात करते हुए कहा कि कोई सदस्य वर्चुअल तरीके से इस्तीफा नहीं दे सकता. सदन आकर ही इस्तीफा देना होगा.
कैसे दिया जाता है इस्तीफा? क्या है नियम
बिहार विधानसभा और विधान परिषद की प्रक्रिया और कार्य संचालन नियमावली अलग-अलग जरूर है, लेकिन सदस्यों के इस्तीफे की प्रक्रिया एक जैसी है. नियम के तहत अगर किसी सदस्य को इस्तीफा देना है तो उसे अध्यक्ष या सभापति के नाम एक तय फॉर्मेट में अपने हाथ से लिखकर अपना इस्तीफा देंगे, लेकिन अपने त्यागपत्र में वे कोई कारण नहीं लिखेंगे.
स्पीकर-चेयरमैन को देंगे इस्तीफा
वे बस यह लिखेंगे, "मैं इसके द्वारा तिथि से सदन के अपने स्थान का त्याग करता हूं." उसके बाद अपना सिग्नेचर कर के स्पीकर/ चेयरमैन को देंगे. किसी भी सदस्य का इस्तीफा मिलते ही स्पीकर/ चेयरमैन सदन को सूचित करेंगे कि किसी सदस्य ने इस्तीफा दे दिया है. अगर इस्तीफा देने वाले सदस्य ने अपने त्याग पत्र में कोई कारण लिख दिया है तो उसे सदन में नहीं पढ़ा जाएगा. इस्तीफा मिलने की सूचना बिहार गजट में प्रकाशित की जाएगी और चुनाव आयोग को चुनाव कराने के लिए इसकी जानकारी दी जाएगी.
3 महीने के अंदर भरी जाएगी नीतीश कुमार की जगह
बिहार विधानपरिषद की 9 सीटें जुलाई में खाली होंगी, उससे पहले चुनाव होंगे. नीतीश कुमार 2030 तक विधान परिषद के सदस्य रहते, उनके इस्तीफे के बाद दसवीं सीट पर भी चुनाव होगा. क्योंकि बांकीपुर सीट पर भी 6 महीने के अंदर चुनाव कराना होगा, इसलिए यहां भी जुलाई से पहले चुनाव कराए जा सकते हैं.
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