लड़कियां आज भी झेल रही हैं खतना दर्द... CJI गवई ने जानें चिंता जताते हुए क्या-क्या कहा

मुख्य न्यायाधीश बी.आर. गवई ने कहा कि देश में कई लड़कियां अब भी अपने मूल अधिकारों से वंचित हैं और खतना (FGM) जैसी खतरनाक प्रथाओं का सामना कर रही हैं.

विज्ञापन
Read Time: 2 mins
फटाफट पढ़ें
Summary is AI-generated, newsroom-reviewed
  • मुख्य न्यायाधीश बी.आर. गवई ने कहा कि देश में कई लड़कियों को उनके मौलिक अधिकारोंसे वंचित रखा जा रहा है
  • दाउदी बोहरा मुस्लिम समुदाय में प्रचलित खतना प्रथा की वैधता को चुनौती देने वाली जनहित याचिका SC में लंबित है
  • तकनीकी प्रगति ने लड़कियों को नई ताकत दी है, पर ऑनलाइन उत्पीड़न की घटनाएं बढ़ी है: CJI
क्या हमारी AI समरी आपके लिए उपयोगी रही?
हमें बताएं।
नई दिल्ली:

मुख्य न्यायाधीश बी.आर. गवई ने शनिवार को कहा कि संवैधानिक गारंटी के बावजूद देश में अब भी कई लड़कियों को उनके मौलिक अधिकारों और जीवित रहने की बुनियादी जरूरतों से वंचित रखा जा रहा है. उन्होंने कहा कि देश की बेटियां आज भी खतना (FGM) जैसी हानिकारक और अमानवीय प्रथाओं का सामना कर रही हैं. खास बात यह है कि दाउदी बोहरा मुस्लिम समुदाय में प्रचलित FGM (Female Genital Mutilation) की वैधता को चुनौती देने वाली एक जनहित याचिका सुप्रीम कोर्ट में लंबित है. सुप्रीम कोर्ट की 9 जजों की संविधान पीठ को इस पर फैसला लेना है. यह वही बेंच है जिसे सबरीमाला मंदिर, पारसी समुदाय की अग्यारी, और मस्जिदों में महिलाओं के प्रवेश से जुड़ी भेदभावपूर्ण प्रथाओं की वैधता पर भी विचार करना है.

CJI गवई ‘बालिकाओं की सुरक्षा: भारत में उनके लिए एक सुरक्षित और सक्षम वातावरण की ओर' विषय पर आयोजित एक कार्यक्रम में बोल रहे थे.

CJI ने क्या-क्या कहा? 

CJI ने कहा कि तकनीकी प्रगति ने जहां लड़कियों को नई ताकत दी है, वहीं उसने नई चुनौतियां और कमजोरियां भी पैदा की हैं. अब खतरे सिर्फ गलियों या घरों तक सीमित नहीं हैं, बल्कि डिजिटल दुनिया तक फैल चुके हैं. ऑनलाइन उत्पीड़न, साइबरबुलिंग, डिजिटल स्टॉकिंग, डेटा का गलत इस्तेमाल और डीपफेक इमेजरी तक.

उन्होंने संस्थानों, नीति निर्माताओं और प्रवर्तन एजेंसियों से अपील की कि वे इन नई चुनौतियों को समझें और तकनीक को शोषण नहीं, मुक्ति का जरिया बनाएं. CJI गवई ने कहा, “आज बालिकाओं की सुरक्षा का मतलब है उनके कक्षा, कार्यस्थल और हर स्क्रीन पर उनके भविष्य को सुरक्षित करना.”

Advertisement

जब तक आजादी नहीं तब तक समानता नहीं: जस्टिस बी.वी. नागरत्ना

इस मौके पर सुप्रीम कोर्ट की जज जस्टिस बी.वी. नागरत्ना ने कहा कि भारत में एक युवा लड़की तभी समान नागरिक कहलाएगी जब वह अपने पुरुष साथियों की तरह आज़ाद होकर अपने सपने पूरे करने की हिम्मत रखे और समाज से उसे समान समर्थन और संसाधन मिलें, बिना किसी भेदभाव के. 

Featured Video Of The Day
Iran Israel War: जंग के बीच इजरायल और लेबनान में कैसे हैं हालात? Ground Report से समझिए
Topics mentioned in this article