- असम के CM हिमंता सरमा ने अवैध प्रवासियों को लेकर आगामी विधानसभा चुनाव में मतदाताओं से फैसला करने को कहा है
- CM ने कहा कि असम का विकास केवल बुनियादी ढांचे तक सीमित नहीं बल्कि राज्य की पहचान और संस्कृति की रक्षा से जुड़ा
- सीएम ने बताया कि 2011 की जनगणना के अनुसार पूर्वी बंगाल मूल के लोग असम की जनसंख्या का बढ़ता हिस्सा बन रहे
असम में विधानसभा चुनाव से पहले आरोप-प्रत्यारोप का दौर शुरू हो गए है. बीजेपी अवैध प्रवासियों के मुद्दे को पूरे जोरशोर से उठा रही है. माना जा रहा है कि आने वाले दिनों में ये मुद्दा और गरमाएगा. असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा का कहना है कि आगामी विधानसभा चुनावों में मतदाताओं को यह तय करना होगा कि वे कैसी सरकार चाहते हैं? क्या वे ऐसी सरकार चाहते हैं, जो अवैध प्रवासियों के सामने 'झुक जाए' या ऐसी सरकार जो राज्य की पहचान और संस्कृति की रक्षा करे?
विकास बुनियादी ढांचे के निर्माण तक ही सीमित नहीं
डिब्रूगढ़ में 77वें गणतंत्र दिवस समारोह को संबोधित करते हुए सरमा ने कहा कि लोगों को बम विस्फोटों, विरोध प्रदर्शनों और भय से भरे अतीत और शांति और विकास पर केंद्रित वर्तमान के बीच चुनाव करना होगा. सरमा ने कहा कि असम का विकास केवल बुनियादी ढांचे के निर्माण तक ही सीमित नहीं है. यह असम की पहचान से भी गहराई से जुड़ा हुआ है. उन्होंने कहा कि पूर्वी बंगाल से लोगों के आने से राज्य की जनसांख्यिकीय संरचना पर गहरा प्रभाव पड़ा है.
असम में गणतंत्र दिवस और स्वतंत्रता दिवस पर अब डर नहीं
2011 की जनगणना और 2027 में होने वाली जनगणना की तुलना करते हुए उन्होंने कहा कि पूर्वी बंगाल मूल के लोगों का हिस्सा 40 प्रतिशत तक बढ़ सकता है. उन्होंने बताया कि आज राज्य के 12 जिलों में हिंदू अल्पसंख्यक हो गए हैं. उन्होंने कहा कि असम में 63.88 लाख बीघा जमीन पर अज्ञात लोगों का अवैध कब्जा है और पिछली सरकारें इन अतिक्रमणों को हटाने के लिए ठोस कदम उठाने में विफल रहीं. उन्होंने कहा कि पहले असम में गणतंत्र दिवस और स्वतंत्रता दिवस समारोह बहिष्कार के आह्वान, हिंसा की धमकियों और गोलीबारी के बीच आयोजित किए जाते थे, लेकिन अब ऐसा कोई डर नहीं है. मुख्यमंत्री ने कहा, 'अब ये समारोह समानता, एकता और विकास की विजय यात्रा के आकाश में मनाए जाते हैं.'
ये भी पढ़ें :- असम कैबिनेट ने 27 प्रमुख विधेयकों को दी मंजूरी, सदन में पेश की जाएगी तिवारी आयोग की रिपोर्ट
अवैध विदेशियों को वापस भेजने का अधिकार
मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने कहा कि 2021 से चलाए गए अतिक्रमण हटाने के अभियानों के माध्यम से 1.5 लाख बीघा (लगभग 49,500 एकड़) से अधिक अतिक्रमित भूमि को मुक्त कराया गया है. उन्होंने सर्वोच्च न्यायालय द्वारा आप्रवासी (असम से निष्कासन) अधिनियम, 1950 के प्रावधानों को बरकरार रखने का हवाला देते हुए कहा कि राज्य अब जिला अधिकारियों को विदेशी न्यायाधिकरणों से संपर्क किए बिना 24 घंटे के भीतर अवैध विदेशियों को वापस भेजने का अधिकार देता है.
हिमंता बिस्वा सरमा ने कहा, 'असम का विकास केवल बेहतर सड़कों तक ही सीमित नहीं है. यह हमारी पहचान की रक्षा से भी जुड़ा है.' उन्होंने आगे कहा कि पूर्वी पाकिस्तान (अब बांग्लादेश) से आए मुसलमानों की उपस्थिति ने राज्य के सामाजिक जीवन पर "गंभीर प्रश्न" खड़े कर दिए हैं. 2011 की जनगणना का हवाला देते हुए सरमा ने दावा किया कि 2027 की जनगणना तक पूर्वी पाकिस्तान से आए लोग असम की कुल जनसंख्या का 40 प्रतिशत हो सकते हैं. उन्होंने कहा, 'राज्य के 35 जिलों में से 12 जिलों में हिंदू अल्पसंख्यक बन गए हैं.' उन्होंने यह भी बताया कि 63 लाख बीघा (29 लाख एकड़ से अधिक) भूमि पर अवैध कब्जा है.
ये भी पढ़ें :- असम CM हिमंता बिस्वा सरमा ने राहुल गांधी को क्यों दिखाया ठेंगा, जानें जेल वाला पूरा मामला














