मल्टीनेशनल ई कॉमर्स कंपनियों को खरीद के लिए अनुमति देना छोटे कारोबारियों के लिए घातक - CAIT

कैट के राष्ट्रीय अध्यक्ष बी. सी. भारतीया ने कहा कि इस कदम को भारतीय निर्यात को बढ़ावा देने के रूप में प्रस्तुत किया जा रहा है, लेकिन कैट का दृढ़ मत है कि यह प्रस्ताव अनावश्यक और खतरनाक है.

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कैट ने दिया छोटे कारोबारियों को लेकर बड़ा बयान
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  • CAIT ने विदेशी ई-कॉमर्स कंपनियों को सीधे भारतीय विक्रेताओं से खरीद की अनुमति देने का प्रस्ताव खारिज किया है
  • कैट का कहना है कि यह कदम छोटे व्यापारियों के लिए खतरनाक होगा.
  • भारतीय कारोबारी पहले से ही वैश्विक बाजार में सक्षम हैं.
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नई दिल्ली:

भारतीय विक्रेताओं से सीधे निर्यात के लिए मल्टीनेशनल ई कॉमर्स कंपनियों को खरीद की अनुमति देना देश के छोटे कारोबारियों के लिए घातक हो सकता है. ऐसा हम नहीं कह रहे हैं कि बल्कि ऐसा कहना है कंफेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स यानी कैट का. कैट ने भारत सरकार द्वारा विचाराधीन उस ड्राफ्ट प्रस्ताव का कड़ा विरोध किया है, जिसमें विदेशी निवेश नियमों में ढील देकर अमेज़ॅन जैसी ई-कॉमर्स बहुराष्ट्रीय कंपनियों को भारतीय विक्रेताओं से सीधे निर्यात हेतु खरीद की अनुमति देने की बात कही गई है.

कैट के राष्ट्रीय अध्यक्ष बी. सी. भारतीया ने कहा कि इस कदम को भारतीय निर्यात को बढ़ावा देने के रूप में प्रस्तुत किया जा रहा है, लेकिन कैट का दृढ़ मत है कि यह प्रस्ताव अनावश्यक और खतरनाक है. इससे दुरुपयोग का गंभीर खतरा है, भारत के घरेलू खुदरा क्षेत्र में बैकडोर एंट्री का रास्ता खुलेगा और देश के 9 करोड़ छोटे व्यापारियों एवं करोड़ों लघु उद्योगों को और अधिक हाशिए पर धकेल देगा.

उन्होंने कहा कि भारत के उद्यमी पूरी तरह सक्षम हैं कि वे अपने दम पर भारतीय उत्पादों को वैश्विक बाजार तक पहुंचा सकें. उन्हें केवल एक निष्पक्ष,पारदर्शी और सहयोगी नीतिगत वातावरण की आवश्यकता है.प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में हमें पूरा विश्वास है कि भारत बिना विदेशी एकाधिकारों के दबाव में आए, एक वैश्विक निर्यात महाशक्ति बन सकता है.

भारतीय विक्रेताओं से निर्यात के नाम पर विदेशी ई-कॉमर्स कंपनियों को सीधे खरीद की अनुमति देना, दरअसल उन अवैध गतिविधियों को वैधता प्रदान करना होगा जो वे अब तक गुप्त रूप से करती रही हैं. इससे यह सुनिश्चित करना लगभग असंभव हो जाएगा कि माल वास्तव में निर्यात के लिए है या घरेलू बाजार में डाइवर्ट किया जा रहा है. यह एफडीआई नियमों को दरकिनार करेगा और छोटे खुदरा विक्रेताओं को भारी नुकसान पहुंचाएगा.

सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि भारतीय निर्यात को बढ़ावा देने के लिए भारत को विदेशी ई-कॉमर्स बहुराष्ट्रीय कंपनियों की आवश्यकता नहीं है. भारतीय उद्यमी, एमएसएमई, स्टार्टअप और व्यापारी पहले ही अपनी दृढ़ता और क्षमता का परिचय देकर वैश्विक बाजार तक पहुंच बना चुके हैं. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दूरदर्शी नेतृत्व में मेक इन इंडिया, वोकल फॉर लोकल, वन डिस्ट्रिक्ट वन प्रोडक्ट जैसी पहलें और सरकार समर्थित निर्यात संवर्धन परिषदें, जीईएम पोर्टल और व्यापार सुविधा योजनाएं भारत को एक मजबूत और स्वदेशी निर्यात तंत्र उपलब्ध करा चुकी हैं.

ड्रॉफ्ट में प्रस्तावित तथाकथित “एक्सपोर्ट फैसिलिटेशन एंटिटीज़” वास्तव में विदेशी ई-कॉमर्स कंपनियों के लिए भारत की सप्लाई चेन, मूल्य निर्धारण और बाजार तक और अधिक नियंत्रण पाने का चतुर तरीका भर हैं. अतीत में कड़े दंड के आश्वासन भी विफल साबित हुए हैं, क्योंकि इन कंपनियों के खिलाफ नियमों के पालन का रिकॉर्ड बेहद खराब रहा है.

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कैट ने सरकार से आग्रह किया है कि इस प्रस्ताव को तुरंत खारिज किया जाए और इसके बजाय घरेलू व्यापारिक संगठनों, एमएसएमई, स्टार्टअप और निर्यातकों के साथ मिलकर एक पूरी तरह स्वदेशी डिजिटल निर्यात इकोसिस्टम तैयार किया जाए. यह न केवल भारत के निर्यात को बढ़ावा देगा बल्कि लाखों छोटे व्यापारियों की आजीविका की रक्षा भी करेगा और यह सुनिश्चित करेगा कि भारत की आर्थिक वृद्धि डिजिटल आत्मनिर्भरता के सिद्धांतों पर आधारित हो.

वर्षों से कैट लगातार यह उजागर करता आया है कि वैश्विक ई-कॉमर्स कंपनियों ने किस तरह से नियामक खामियों का दुरुपयोग किया, शिकारी मूल्य निर्धारण और भारी छूट का सहारा लिया व चुनिंदा विक्रेताओं को अनुचित प्राथमिकता दी, जिससे निष्पक्ष प्रतिस्पर्धा और छोटे व्यवसायों को अपूरणीय क्षति पहुंची. मौजूदा प्रतिबंधों के बावजूद ये उल्लंघन लगातार जारी रहे हैं और सरकारी एजेंसियों के साथ-साथ भारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग ने भी इनकी प्रतिस्पर्धा-विरोधी गतिविधियों पर सवाल उठाए हैं.
 

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