- हैदराबाद और चेन्नई के बीच चलने वाली हाईस्पीड बुलेट ट्रेन पर नया अपडेट आया है.
- हैदराबाद-चेन्नई बुलेट ट्रेन कॉरिडोर का अलाइनमेंट हाल ही में तय कर दिया गया है.
- यह प्रोजेक्ट तीन राज्य तेलंगाना, आंध्र प्रदेश और तमिलनाडू की कनेक्टिविटी को बढ़ाएगा.
हैदराबाद-चेन्नई हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर अब जमीन पर उतरने के लिए तैयार है. ताजा अपडेट के मुताबिक दक्षिण भारत की पहली हाईस्पीड बुलेट ट्रेन प्रोजेक्ट के लिए रेल मंत्रालय और नेशनल हाई-स्पीड रेल कॉर्पोरेशन लिमिटेड (NHSRCL) तैयारियां अंतिम दौर में है. इस हाईस्पीड रेल से हैदराबाद से चेन्नई के बीच 12 घंटे की दूरी महज 3 घंटे में पूरी होगी. इस ट्रेन की रफ्तार 350 किलोमीटर प्रति घंटे के बीच होगी. यह रेल परियोजना तेलंगाना, आंध्र प्रदेश और तमिलनाडु राज्यों को आपस में कनेक्टिविटी को और बेहतर करेगी. ट्रेन 18 स्टेशनों पर रुकेगी, जिसमें तिरुपति, शमशाबाद, अमरावती, गुंटूर, तिरुवल्लूर और चेन्नई सेंट्रल जैसे बड़े स्टेशन शामिल रहेंगे.
हैदराबाद-चेन्नई हाई-स्पीड रेल प्रोजेक्ट
हैदराबाद-चेन्नई हाई-स्पीड रेल प्रोजेक्ट भारत सरकार की तरफ से पिछले बजट में घोषित 7 हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर का हिस्सा है. जिसे मुंबई-अहमदाबाद हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर की तर्ज पर विकसित किया जा रहा है. हैदराबाद-चेन्नई कॉरिडोर में भी दो तरह की सर्विस होंगी, एक तेज सर्विस जिसमें कम स्टॉप होंगे और दूसरी सर्विस जो रास्ते में पड़ने वाले सभी 18 स्टेशनों पर रुकेगी.
तीन राज्यों के इन 18 स्टेशनों पर रुकेगी
- तेलंगाना: हैदराबाद, शमशाबाद, फ्यूचर सिटी, ड्राई पोर्ट, हलिया और वडापल्ली.
- आंध्र प्रदेश: दाचेपल्ली, अमरावती, गुंटूर, चिराला, ओंगोल, कावली, नेल्लोर, गुडूर और तिरुपति
- तमिलनाडू: तिरुवल्लूर, चेन्नई आउटर रिंग रोड और चेन्नई सेंट्रल
हैदराबाद-चेन्नई सिर्फ 3 घंटे में पहुंचेंगे
फिलहाल ट्रेन या सड़क मार्ग से हैदराबाद से चेन्नई की दूरी तय करने में 12 से 13 घंटे का समय लग जाता है. लेकिन हाई-स्पीड कॉरिडोर के बनने के यह दूरी सिमटकर 3 घंटे रह जाएगी. यह 773 किलोमीटर लंबा बुलेट ट्रेन कॉरिडोर है, इस ट्रैक पर बुलेट ट्रेन की अधिकतम गति 350 किलोमीटर प्रति घंटा होगी, जबकि इसे 320 किलोमीटर प्रतिघंटे की रफ्तार से चलाया जाएगा.
अलाइनमेंट तय 2027 तक आएगा DPR
हैदराबाद-चेन्नई बुलेट ट्रेन कॉरिडोर का अलाइनमेंट हाल ही में तय किया गया है. रेल मंत्रालय ने इस कॉरिडोर का DPR मार्च 2027 तक पूरा करने का समय तय किया है. दक्षिण मध्य रेलवे ने फाइनल अलाइनमेंट रिपोर्ट राज्य सरकारों को सौंप दी है. जमीन अधिग्रहण और वित्तीय स्वीकृतियां मिलने के बाद 2027 से 2028 के बीच इस प्रोजेक्ट पर काम शुरू हो जाएगा. एक अनुमानित लागत के मुताबिक यह प्रोजेक्ट 1.5 लाख करोड़ का माना जा रहा है. जिसे लगभग 10 से 12 सालों के बीच पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है. यानि यह ट्रेन 2038 से 2040 के बीच चल सकती है.
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