मुंबई ने उद्धव और राज ठाकरे को क्यों त्याग दिया? जीत के अलावा BJP के लिए क्या गुड न्यूज

अब सवाल उठता है कि आखिर 2024 के लोकसभा चुनावों के दौरान बहुत अच्छा प्रदर्शन करने वाले उद्धव ठाकरे को पहले विधानसभा चुनाव और फिर महाराष्ट्र निकाय चुनाव सहित बीएमसी में झटका क्यों लगा?

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  • बीएमसी चुनाव में उद्धव ठाकरे और राज ठाकरे ने आपसी मतभेद खत्म कर गठबंधन किया, लेकिन जीत बीजेपी की हुई
  • 1865 में स्थापित बीएमसी भारत का सबसे धनी निगम है, जिसका वार्षिक बजट कई राज्यों से अधिक है
  • शिवसेना ने लंबे समय तक बीएमसी पर शासन किया, लेकिन इस बार बीजेपी का पहली बार मेयर बनेगा
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बाला साहेब ठाकरे के एक इशारे पर जो मुंबई ठहर जाती थी, उसी मुंबई ने उद्धव ठाकरे और राज ठाकरे को त्याग दिया. बीएमसी चुनाव के लिए दोनों ने आपसी दुश्मनी को खत्म कर दिया. हर जतन किए. साथ फोटो खिंचाने से लेकर घर आने-जाने तक. ऐसा माहौल बनाया गया कि इन दोनों के एक होते ही पूरी मुंबई इनके पीछे चल पड़ेगी. उद्धव ठाकरे इतने कान्फिडेंस में थे कि उन्होंने हाल में सहयोगी बने कांग्रेस और शरद पवार को भी दरकिनार कर दिया. नतीजा 25 सालों से अधिक समय से बीएमसी पर काबिज ठाकरे राज समाप्त हो गया.

1865 में स्थापित बीएमसी केवल एक स्थानीय निकाय नहीं है. यह भारत का सबसे धनी निगम है. 74,000 करोड़ रुपये से अधिक के वार्षिक बजट के साथ, इसकी वित्तीय क्षमता गोवा, सिक्किम और अरुणाचल प्रदेश जैसे कई राज्यों से भी अधिक है.शिवसेना 1985 से बीएमसी पर शासन कर रही थी. मगर अब बीजेपी का राज है.

बयानों का अंतर

  1. इतनी बड़ी शिकस्त के बाद भी उद्धव ठाकरे की पार्टी शिवसेना (यूबीटी) का रिएक्शन बड़ा अजीब है. शिवसेना (यूबीटी) सांसद संजय राउत ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर जयचंद की फोटो शेयर कर लिखा है कि अगर एकनाथ शिंदे शिवसेना के जयचंद नहीं बनते तो मुंबई में बीजेपी का मेयर कभी नहीं बनता! मराठी जनता शिंदे को जयचंद के तौर पर याद रखेगी.
     
  2. वहीं बीजेपी बनने के बाद पहली बार बीएमसी का अपना मेयर चुनने जा रही बीजेपी गदगद है. महाराष्ट्र के सीएम देवेंद्र फडणवीस ने कार्यकर्ताओं को जीत का क्रेडिट दिया. प्रधानमंत्री मोदी ने ‘एक्स' पर एक पोस्ट में कहा, “राजग को आशीर्वाद देने के लिए मैं मुंबई के अपने भाई-बहनों का अत्यंत आभारी हूं.मुंबई हमारे देश का गौरव है. यह सपनों का शहर है और ऐसा शहर है जो हमारे विकास को गति देता है.” प्रधानमंत्री ने कहा कि मुंबई महाराष्ट्र की जीवंत संस्कृति की सर्वोत्तम झलक प्रस्तुत करता है. उन्होंने कहा, “इसी महान भावना से प्रेरित होकर हम शहर के लोगों को सुशासन और जीवन सुगमता प्रदान करेंगे.”

हार की वजह

  1. अब सवाल उठता है कि आखिर 2024 के लोकसभा चुनावों के दौरान बहुत अच्छा प्रदर्शन करने वाले उद्धव ठाकरे को पहले विधानसभा चुनाव और फिर महाराष्ट्र निकाय चुनाव सहित बीएमसी में झटका क्यों लगा? जवाब लोकसभा चुनाव से ही मिलता है. 2024 लोकसभा चुनाव के दौरान बीजेपी 400 पार के रथ पर सवार थी. विपक्ष को उम्मीद ही नहीं थी कि वो टक्कर भी दे सकती है. यही कारण था कि पूरा विपक्ष एकजुट होकर लड़ा. महाराष्ट्र में भी कांग्रेस, उद्धव ठाकरे और शरद पवार की पार्टियों में सीटों का बंटवारा बहुत आराम से हो गया. लेकिन, लोकसभा चुनावों में अच्छे प्रदर्शन से उद्धव ठाकरे को ये यकीन हो गया कि वो जीत उनकी बदौलत मिली है.
  2. विधानसभा चुनाव आते-आते ये यकीन इतना पुख्ता हो गया कि वो कांग्रेस और शरद पवार को अकेले चुनाव लड़ने तक की धमकी देने लगे. इससे गठबंधन में दरार पड़ी और नतीजा इतिहास बन गया. विधानसभा चुनाव में मिली हार के बाद उद्धव ठाकरे को अपनी गलती का एहसास तो हुआ लेकिन पूरी तरह नहीं. मुंबई में अपनी ताकत दिखाने के लिए उन्हें राज ठाकरे की याद आई और दोनों ने गठबंधन कर लिया. उन्होंने कांग्रेस और शरद पवार से बात तक नहीं की. उन्हें पक्का यकीन था कि अगर राज ठाकरे उनके साथ आ गए तो मराठा वोटर पूरी तरह से उनके साथ आ जाएगा. मगर ऐसा नहीं हुआ.वोटों का बंटवारा हुआ और बीजेपी गठबंधन पूरे महाराष्ट्र में छा गई. 
  3. मुंबई समेत पूरे महाराष्ट्र के वोटर ठाकरे भाइयों की विचारधारा को लेकर असमंजस में दिखे. उद्धव ठाकरे ने बीजेपी से नाता ये कहकर तोड़ा कि बीजेपी उनकी पार्टी समाप्त करना चाहती थी. हिंदुत्व की विचारधारा से सेक्युलर बनकर कांग्रेस और शरद पवार से गठबंधन किया, मगर फिर इस गठबंधन से भी अलग हो गए. इसी तरह राज ठाकरे भी हर चुनाव में अलग एजेंडे के साथ दिखते रहे हैं. कभी बीजेपी का सहयोग, कभी पीएम मोदी का सिर्फ सहयोग तो कभी शिंदे का सहयोग और अंत में उद्धव ठाकरे का सहयोग. इतनी जल्दी-जल्दी विचारधारा बदलने से कट्टर हिंदू वोटरों से हाथ धो चुके ठाकरे भाइयों के हाथ से मराठा वोटर भी निकल गए.

बीजेपी के लिए गुड न्यूज

वहीं बीजेपी के लिए इस जीत के अंदर भी गुड न्यूज है. महाराष्ट्र में अब चाचा-भतीजे का प्रयोग खत्म हो गया है. शरद पवार और अजीत पवार ने इस चुनाव में फिर से हाथ मिलाया, लेकिन वो भी फेल हो गए. ठाकरे बंधुओं का प्रयोग तो खत्म हो ही गया. शिंदे अभी भी नंबर टू ही हैं. बीजेपी ने 29 नगर निकायों में अपना कद बढ़ाया है. कांग्रेस और कमजोर हुई है. जाहिर है इस चुनाव के जरिए बीजेपी ने महाराष्ट्र में भविष्य में बनने वाले सभी तरह के समीकरणों को ध्वस्त कर दिया है. 
 

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