BMC चुनाव: ठाकरे ब्रदर्स का साझा घोषणापत्र, संयुक्त रैलियों से सियासी तूफान की तैयारी

कभी अलग-अलग राह पर चलने वाले ठाकरे ब्रदर्स अब BMC चुनाव में एक साझा लक्ष्य के साथ आगे बढ़ते नजर आ रहे हैं. यह गठबंधन सिर्फ सीटों का गणित नहीं, बल्कि एक सशक्त राजनीतिक संदेश है— “मुंबई की सत्ता मुंबईकरों के हाथ में रहे.”

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  • MNS और शिवसेना (UBT) ठाकरे ब्रदर्स के नेतृत्व में BMC चुनाव में संयुक्त रणनीति बना रहे हैं.
  • राज ठाकरे ने उम्मीदवारों से शिवतीर्थ में चुनावी मुद्दों और प्रचार की रणनीति पर विस्तार से चर्चा की है.
  • ठाकरे ब्रदर्स के घोषणापत्र में बेहतर सुविधाएं, भ्रष्टाचार मुक्त प्रशासन और युवाओं को प्राथमिकता शामिल होगी.
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मुंबई:

मुंबई महानगरपालिका (BMC) चुनाव को लेकर महाराष्ट्र की राजनीति में बड़ा हलचल भरा दिन सामने आया है. महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (MNS) और शिवसेना (UBT) के बीच बढ़ती राजनीतिक नजदीकियों ने चुनावी रणभूमि को पूरी तरह गरमा दिया है. ठाकरे ब्रदर्स—राज ठाकरे और उद्धव ठाकरे—अब सिर्फ भावनात्मक नहीं, बल्कि पूरी तरह संगठित और रणनीतिक तरीके से BMC चुनाव में उतरने की तैयारी कर चुके हैं.

सुबह 11 बजे, MNS के सभी उम्मीदवारों को शिवतीर्थ—राज ठाकरे के निवास—पर तलब किया गया. यह बैठक केवल औपचारिक नहीं, बल्कि चुनावी रणनीति की दिशा तय करने वाली मानी जा रही है. सूत्रों के मुताबिक, राज ठाकरे उम्मीदवारों से सीधे संवाद करेंगे और जमीनी मुद्दों, वार्ड-स्तरीय रणनीति, संगठनात्मक तालमेल और आक्रामक प्रचार के तौर-तरीकों पर चर्चा करेंगे.

राज ठाकरे का फोकस स्पष्ट है—“मुंबई पहले” के नैरेटिव को धार देना और चुनाव को स्थानीय मुद्दों, मराठी अस्मिता और नगर प्रशासन की विफलताओं के इर्द-गिर्द केंद्रित करना. इसी दिन बाद में शिवसेना (UBT) प्रमुख उद्धव ठाकरे राज ठाकरे से उनके निवास पर मुलाकात करेंगे. यह बैठक BMC चुनाव के लिहाज से बेहद अहम मानी जा रही है, क्योंकि इसमें ठाकरे ब्रदर्स की संयुक्त रणनीति को अंतिम रूप दिया जाएगा.

बैठक में तीन बड़े मुद्दों पर गहन चर्चा प्रस्तावित है:

1. संयुक्त घोषणापत्र (Joint Manifesto)

  • ठाकरे ब्रदर्स का साझा घोषणापत्र BMC चुनाव का सबसे बड़ा राजनीतिक हथियार बन सकता है.
  • सूत्रों के अनुसार, घोषणापत्र में इन मुद्दों को प्रमुखता दी जा सकती है:
  • मुंबईकरों के लिए बेहतर नागरिक सुविधाएं
  • पारदर्शी और भ्रष्टाचार-मुक्त BMC प्रशासन
  • स्थानीय रोजगार और मराठी युवाओं को प्राथमिकता
  • झुग्गी पुनर्विकास, जलभराव, सड़कें और स्वास्थ्य सेवाएं
  • निजीकरण और ठेकेदारी मॉडल पर सवाल
  • संयुक्त घोषणापत्र की औपचारिक घोषणा 4 जनवरी को किए जाने की पूरी संभावना है.

2. संयुक्त चुनावी अभियान
ठाकरे ब्रदर्स अब अलग-अलग नहीं, बल्कि साझा मंच से मतदाताओं तक पहुंचने की तैयारी में हैं. मुंबई में 3 संयुक्त रैलियों की योजना बनाई गई है, जहां राज और उद्धव ठाकरे एक साथ मंच साझा करेंगे. यह दृश्य अपने आप में महाराष्ट्र की राजनीति में ऐतिहासिक माना जा रहा है और इसका सीधा संदेश जाएगा कि दोनों दल BMC की सत्ता के लिए एकजुट हैं.

3. संयुक्त रोड शो
बैठक में संयुक्त रोड शो के रूट को भी अंतिम रूप दिया जाएगा. यह रोड शो मुंबई के राजनीतिक रूप से संवेदनशील और निर्णायक इलाकों से गुजरेगा, ताकि सीधे मतदाताओं से संवाद स्थापित किया जा सके. रोड शो के जरिए ठाकरे ब्रदर्स “मुंबई को बचाने” का भावनात्मक और राजनीतिक संदेश ज़मीन तक पहुंचाने की रणनीति पर काम कर रहे हैं.

कभी अलग-अलग राह पर चलने वाले ठाकरे ब्रदर्स अब BMC चुनाव में एक साझा लक्ष्य के साथ आगे बढ़ते नजर आ रहे हैं. यह गठबंधन सिर्फ सीटों का गणित नहीं, बल्कि एक सशक्त राजनीतिक संदेश है— “मुंबई की सत्ता मुंबईकरों के हाथ में रहे.”

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राजनीतिक जानकारों के मुताबिक, ठाकरे ब्रदर्स की यह एकजुटता

महायुति (BJP–शिवसेना) के लिए सीधी चुनौती बन सकती है. बिखरे विपक्षी वोटों को एक ध्रुव पर ला सकती है. चुनाव को पूरी तरह स्थानीय बनाम सत्ताधारी नैरेटिव में बदल सकती है. BMC चुनाव अब केवल नगर निकाय का चुनाव नहीं रह गया है, बल्कि यह मुंबई की राजनीतिक दिशा तय करने वाली लड़ाई बन चुका है. ठाकरे ब्रदर्स ने साफ कर दिया है कि वे इस चुनाव को हल्के में लेने के मूड में नहीं हैं. संयुक्त घोषणापत्र, साझा रैलियां और रोड शो—ये सभी संकेत दे रहे हैं कि मुंबई की राजनीति एक बड़े मुकाबले की ओर बढ़ रही है, जहां ठाकरे ब्रदर्स पूरी ताकत के साथ मैदान में उतर चुके हैं.

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