- कांग्रेस सांसद कार्ति चिदंबरम ने बताया कि बीजेपी तमिलनाडु में बार-बार कोशिशों के बावजूद क्यों नहीं जीत पा रही
- कार्ति चिदंबरम ने ये भी बताया कि तमिलनाडु में डीएमके संग गठबंधन में कांग्रेस की क्या अहमियत है
- कार्ति ने कहा कि तमिलनाडु में मुख्यमंत्री किसे बनाना है यह जनता तय करेगी, और उसी हिसाब से वोट देगी
कांग्रेस के दिग्गज नेता पी चिदंबरम के बेटे और तमिलनाडु के शिवगंगा से कांग्रेस सांसद कार्ति चिदंबरम ने एनडीटीवी के तमिलनाडु कॉन्क्लेव में बताया कि बीजेपी बार-बार कोशिशों के बाद भी यहां पर जीत क्यों नहीं पा रही. आखिर क्यों यहां के लोग उसे नकार रहे हैं. इसके साथ ही उन्होंने डीएमके के साथ गठबंधन में कांग्रेस की अहमियत के बारे में भी बताया.
कार्ति चिदंबरम ने कहा कि कांग्रेस डीएमके के नेतृत्व वाले गठबंधन को धर्मनिरपेक्षता का रूप देती है, हालांकि उन्होंने इस बात को भी स्वीकार किया कि कांग्रेस तमिलनाडु में अकेले चुनाव लड़ने की स्थिति में नहीं है.
DMK गठबंधन में कांग्रेस की अहमियत क्या है?
बता दें कि डीएमके के नेतृत्व वाले गठबंधन में कांग्रेस एक जूनियर सहयोगी है. दोनों दल साल 2020 से यहां सत्ता में हैं. एनडीटीवी के मंच पर कांग्रेस सांसद कार्ति चिदंबरम ने कहा कि कांग्रेस इस गठबंधन में राष्ट्रीय भावना का संचार करती है. कांग्रेस के इस गठबंधन में होने की वजह से अल्पसंख्यक खुद को ज्यादा सुरक्षित महसूस करते हैं. कांग्रेस इस गठबंधन को धर्मनिरपेक्षता का रूप देती है. कांग्रेस की भमिका इस गठबंधन में बहुत ही अहम है.
'किसे सीएम बनाना है, लोग तय करेंगे'
डीएमके-कांग्रेस गठबंधन की प्रासंगिकता के सावल पर कार्ति चिदंबरम ने कहा कि गठंधन हर चुनाव में माये रखता है. कार्ति ने कहा, "मुझे नहीं लगता कि तमिलनाडु में गठबंधन अप्रासंगिक रहे हैं. राजनीति व्यक्तित्व पर आधारित है. लोग खुद तय करेंगे कि वे किसको मुख्यमंत्री बनाना चाहते हैं और कौन से गठबंधन को वोट देना चाहते हैं."
‘बीजेपी का हिंदुत्व संस्कृतिकृत है'
कार्ति चिदंबरम ने इस बात पर भी जोर दिया कि तमिलनाडु के लोग बीजेपी का नेतृत्व कांग्रेस जितना स्वीकार नहीं करते हैं. इसी वजह से उसे यहां बार-बार नकारा गया है. इसलिए, AIADMK के जरिए बीजेपी राज्य में अपनी एंट्री करना चाहती है. कार्ति ने तो बीजेपी के हिंदुत्व को "संस्कृतिकृत और शाकाहारी" करार दिया. उन्होंने कहा यही वजह है कि तमिलनाडु में अब तक उसकी पकड़ मजबूत नहीं हो सकी है. न्होंने कहा कि बीजेपी कोशिश तो बहुत करती है. वह चुनावी मशीन हैं और काफी काफी रूढ़िवादी हैं. जबकि उन्होंने खुद को उदारवादी बताया.
तमिलनाडु बीजेपी को क्यों नकार रही?
कांग्रेस सांसद ने कहा कि बीजेपी के हिंदुत्व बहुत ही उच्च जातिवादी, संस्कृतिकृत और शाकाहारी है. जबकि तमिलनाडु के धर्म में ऐसा नहीं होता, क्यों कि यहां लोग मंदिर में पशु बलि देते हैं. कार्ति चिदंबरम ने कहा कि तमिलनाडु बहुत ही धार्मिक और रूढ़िवादी राज्य होने के बावजूद भी बीजेपी ने खुद को राज्य के सामाजिक परिवेश में ढाल लिया है. उन्होंने कहा कि तमिलनाडु में ऐसा कोई भी नहीं है जो बिना मंदिर जाए और थोड़ी सी विभूति या कुमकुम लगाए बिना घर से बाहर निकले. फिर भी वह बीजेपी को यहां नकार दिया गया.














