- अमित शाह असम के दो दिवसीय दौरे पर डिब्रूगढ़ पहुंचे और चुनावी रणनीति पर पार्टी नेताओं से चर्चा करेंगे
- बीजेपी असम में सहयोगी दलों के साथ मिलकर चुनाव लड़ती रही है
- एनडीए का लक्ष्य असम की 126 विधानसभा सीटों में से सौ से अधिक सीटें जीतना है
गृह मंत्री अमित शाह चुनावी राज्य असम के दो दिनों के दौरे पर शुक्रवार की शाम डिब्रूगढ़ पहुंच रहे हैं. वे कुछ सरकारी कार्यक्रमों में हिस्सा लेने के साथ ही गुवाहाटी में पार्टी नेताओं के साथ चुनाव की रणनीति पर भी चर्चा करेंगे. विधानसभा चुनाव से पहले शाह की यह यात्रा काफी महत्वपूर्ण मानी जा रही है. संभावना है कि शाह पार्टी नेताओं के साथ बैठक में सहयोगी दलों के साथ सीटों के बंटवारे पर भी चर्चा करेंगे.
बीजेपी ने असम का विधानसभा चुनाव सहयोगी दलों के साथ लड़ने का फैसला किया है. मुख्यमंत्री का चेहरा हिमंता बिस्वा सरमा ही होंगे. पार्टी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और हिमंता बिस्वा सरमा के नाम और काम पर वोट मांगेगी. बीजेपी की कोशिश असम में हेट्रिक लगाने की है. पार्टी नेताओं के अनुसार राज्य में हुए परिसीमन और मतदाता सूची के विशेष पुनरीक्षण के बाद हालात बदले हैं और एनडीए माहौल को अपने पक्ष में कर सकता है.
सीटों के बंटवारे पर होगी चर्चा
राज्य की 126 सीटों में एनडीए का फोकस सौ से भी अधिक सीटें जीतने पर है. बीजेपी का तालमेल असम गण परिषद, यूनाइटेड पीपल्स पार्टी लिबरल (यूपीपीएल) और बोडो पीपल्स फ्रंट (बीपीएफ) से होगा. हालांकि यूपीपीएल और बीपीएफ के आपसी मतभेदों को सुलझाने का प्रयास किया जा रहा है.
पिछले विधानसभा चुनाव में बीजेपी ने 93 सीटों पर उम्मीदवार उतारे थे और 60 सीटें जीती थीं. जबकि एजीपी ने 22 सीटों पर चुनाव लड़ा था और नौ सीटें जीती थीं. यूपीपीएल ने 11 सीटों पर चुनाव लड़ कर छह सीटों पर जीत हासिल की थी. एनडीए को 75 सीटों पर विजय प्राप्त हुई थी. कुछ सीटों पर गठबंधन के दलों के बीच दोस्ताना मुकाबला भी हुआ था.
इस बार बीजेपी की कोशिश है कि बीपीएफ को भी साथ लिया जाए. हालांकि यूपीपीएल इसके पक्ष में नहीं है लेकिन बीजेपी मनाने का प्रयास कर रही है. संभावना है कि बीजेपी 95-100 सीटों पर चुनाव लड़े और बाकी सीटें सहयोगी दलों को दे दी जाएं. कुछ सीटों पर बीजेपी उम्मीदवार सहयोगी दलों के चुनाव चिन्ह पर और कुछ अन्य पर सहयोगी दलों के उम्मीदवार बीजेपी के चुनाव चिन्ह पर भी चुनाव लड़ सकते हैं.
संगठन पर फोकस
बीजेपी ने बूथ पर संगठन को मजबूत करने पर भी ध्यान दिया है. राज्य के कुल 31486 बूथों पर बीजेपी ने संगठन पर ध्यान केंद्रित किया है. राज्य में पहले 29,656 बूथ थे, जिसमें हाल ही में 1,830 नए बूथ जोड़े गए हैं. यह वृद्धि चुनाव आयोग के दिशानिर्देशों के तहत हुई, जिसमें प्रति बूथ अधिकतम 1,200 मतदाताओं की सीमा तय है.
इनमें करीब सात हजार मुस्लिम बहुल बूथों पर भी बीजेपी ने उपस्थित दर्ज कराने का प्रयास किया है. पार्टी लोगों से संपर्क बढ़ाने के लिए डिजिटल अभियान तेज कर रही है. बीजेपी विकास, सुरक्षा, अस्मिता और घुसपैठ जैसे मुद्दों पर चुनाव लड़ेगी.














