- चुनाव आयोग के सूत्रों के मुताबिक बिहार में वोटर लिस्ट रिवीजन के दौरान तीन लाख विदेशी नागरिकों की पहचान हुई
- ये विदेशी नागरिक बांग्लादेश, नेपाल, म्यांमार और अफगानिस्तान से होने की बात कही जा रही है
- बिहार के किशनगंज, पूर्णिया, कटिहार, अररिया, सुपौल, ईस्ट चंपारण और वेस्ट चंपारण जिलों में विदेशी पाए गए हैं
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी लगातार विदेशी घुसपैठियों को भारत क लिए खतरा बता रहे हैं, इसी बीच चुनाव आयोग ने बड़ी जानकारी दी है. चुनाव आयोग ने बताया है कि बिहार में SIR यानी वोटर लिस्ट रिवीजन की प्रक्रिया के दौरान तीन लाख विदेशी नागरिकों की पहचान हुई है. दस्तावेजों की जांच के दौरान यह बात सामने आई, जिसके बाद इन लोगों को चुनाव आयोग ने नोटिस जारी किया है. बताया जा रहा है कि ये विदेशी नागरिक बांग्लादेश, नेपाल, म्यांमार और अफगानिस्तान से हैं.
बिहार के कई जिलों में मिले विदेशी नागरिक
आयोग की तरफ से बताया गया है कि एक अगस्त से एक सितंबर तक चले डॉक्यूमेंट वेरिफिकेशन प्रोसेस के दौरान इन विदेशी लोगों की पहचान हुई है. आयोग से जुड़े सूत्रों ने बताया कि, बिहार के कुछ जिलों में यह लोग पाए गए हैं. इनमें किशनगंज, पूर्णिया, कटिहार, अररिया, सुपौल, ईस्ट चंपारण और वेस्ट चंपारण जैसे जिले शामिल हैं.
वोटर लिस्ट से होंगे बाहर
काफी समय से राजनीतिक पार्टियों बाहरी लोगों के वोटर बन जाने की बात कह रही थी. जिसके बाद आयोग ने कहा था कि SIR की प्रक्रिया में विदेशी नागरिकों की पहचान की जाएगी और ऐसे लोगों को वोटर नहीं बनाया जाएगा. इसे लेकर आयोग की तरफ से विस्तृत जानकारी दी जा सकती है. चुनाव आयोग ने कहा है कि देश के बाकी राज्यों में भी SIR होगा, यानी देशभर में चुनाव आयोग के इस अभियान से लाखों अवैध प्रवासियों की पहचान हो सकती है.
पीएम मोदी ने कही डेमोग्राफी बचाने की बात
पीएम नरेंद्र मोदी ने 15 अगस्त को लाल किले की प्राचीर से देश में घुसपैठियों की बढ़ती संख्या को लेकर चिंता जताई थी. इसके बाद उन्होंने बिहार में एक जनसभा के दौरान भी यही मुद्दा उठाया और कहा कि बिहार के सीमावर्ती जिलों में तेजी से डेमोग्राफी बदल रही है. इसके लिए पीएम ने डेमोग्राफी मिशन शुरू करने की बात कही थी. पीएम ने कहा था कि जल्द ही ये मिशन अपना काम पूरा करेगा.
बता दें कि बिहार विधानसभा चुनाव की तारीखों का ऐलान कभी भी हो सकता है, जिसके बाद चुनावी प्रचार शुरू हो जाएगा. इस साल अक्टूबर के आखिरी हफ्ते में चुनाव कराया जा सकता है. चुनाव आयोग की तरफ से अगर आंकड़े सामने रखे जाते हैं तो इस बार विदेशी घुसपैठियों का भी चुनाव में एक बड़ा मुद्दा होगा.