- तेज प्रताप यादव ने अपने दही चूड़ा भोज में लालू यादव और तेजस्वी यादव सहित कई नेताओं को आमंत्रित किया था.
- कांग्रेस के पार्टी कार्यालय में आयोजित दही चूड़ा भोज में कांग्रेस के सभी छह विधायक अनुपस्थित रहे.
- बिहार विधानसभा में विधायकों के पाला बदलने से जदयू या बीजेपी की संख्या बढ़ सकती है.
बिहार में मकर संक्रांति का हफ़्ता चल रहा है और जगह-जगह पर राजनैतिक दही चूड़ा के भोज का आयोजन हो रहा है. पटना से लेकर दिल्ली तक यही ट्रेंड है. राजनीतिक दल अपने दफ्तर में दही चूड़ा का आयोजन कर रहे हैं तो बड़े नेता अपने घरों पर. दिल्ली में 14 तारीख़ को राधामोहन सिंह के यहां दही चूड़ा का भोज हुआ तो 15 तारीख़ को चिराग पासवान पटना में भोज दे रहे हैं और 16 जनवरी को दिल्ली में. मगर अभी तक सबसे चर्चित दही चूड़ा का भोज रहा तेज प्रताप यादव का.
उन्हें लालू यादव ने अपने घर और पार्टी से बेदखल कर दिया है मगर दही चूड़ा के भोज का न्यौता वो लालू यादव के साथ साथ तेजस्वी को भी दे आए साथ में एनडीए के तमाम नेताओं को भी. तेज प्रताप का दही चूड़ा खाने लालू यादव भी आए और यह अटकलें लगने लगी कि क्या लालू परिवार फिर एक होगा, मगर तेजस्वी ने तेज प्रताप के दही चूड़ा के भोज में ना जाने से इन अटकलों पर फिलहाल विराम लग गया है.
दूसरी खबर है कि कांग्रेस के पार्टी दफ्तर में भी दही चूड़ा के भोज का आयोजन किया गया और उसमें कांग्रेस के कोई भी विधायक शामिल नहीं हुआ,सभी 6 विधायक इस भोज से गायब रहे.आधिकारिक तौर पर यह कहा गया कि ये सभी विधायक अपने अपने क्षेत्र में व्यस्त थे.मगर बिहार में यह चर्चा शुरू हो गई है कि क्या कांग्रेस के सभी छह विधायक कहीं जदयू में तो नहीं जा रहे हैं.
बिहार में एक और खबर चर्चा में है. वो खबर है उपेन्द्र कुशवाहा की पार्टी से जुड़ी हुई. पिछले दिनों उपेन्द्र कुशवाहा ने लिट्टी चोखा का भोज रखा था जिसमें से उनके तीन विधायक गायब रहे. उपेन्द्र कुशवाहा की पार्टी से चौथा विधायक उनकी पत्नी ही है. उपेन्द्र कुशवाहा की पार्टी के तीन विधायक इस बात से नाराज हैं कि कुशवाहा ने अपने बेटे को मंत्री बनवा दिया जो विधायक ही नहीं है. अब उपेन्द्र कुशवाहा की प्राथमिकता अपने बेटे को विधायक बनवाने की है और जिस तरह से उनकी पार्टी में बगावत हुआ है उनका खुद का राज्यसभा में दुबारा चुन कर आना मुश्किल होता जा रहा है.
उपेन्द्र कुशवाहा का राज्यसभा का कार्यकाल इसी जुलाई में खत्म हो रहा है.पटना में इस बात की खूब चर्चा है कि उपेन्द्र कुशवाहा के तीन विधायक बीजेपी के संपर्क में हैं.यदि ऐसा हुआ तो बीजेपी के पास 92 विधायकों का समर्थन हो जाएगा और वो एक बार फिर बिहार विधानसभा में सबसे बड़ी पार्टी बन जाएगी.यानी बिहार से सियासत में आने वाले दिनों में आपको शह और मात का खेल देखने को मिलेगा. बिहार की राजनीति में काफी कुछ बदलने वाला है.
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