बिहार विधानसभा अध्यक्ष को ग़ुस्सा क्यों आता हैं ?

एक बार फिर जब सिन्हा अपने विधान सभा क्षेत्र लखीसराय में विकास कार्यों की समीक्षा करने पहुँचे तो कई कार्यों पर असंतोष जताया.

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विजय सिन्हा बढ़ते अपराध को लेकर पुलिस से नाराज हैं.
पटना:

बिहार विधान सभा (Bihar Legislative Assembly) अध्यक्ष विजय कुमार सिन्हा (Vijay Kumar Sinha) और मुख्य मंत्री नीतीश कुमार (Nitish Kumar) के बीच सदन के अंदर तकरार के दृश्यों को तो सबने देखा और शायद लोग उसे भूले नहीं होंगे. एक बार फिर जब सिन्हा अपने विधान सभा क्षेत्र लखीसराय में विकास कार्यों की समीक्षा करने पहुँचे तो कई कार्यों पर असंतोष जताया. इलाके की विधि व्यवस्था से भी खुश नहीं दिखे और दागी पुलिस अधिकारियों की पोस्टिंग पर तो काफ़ी नाराज़गी जताई.

विधानसभा अध्यक्ष विजय सिन्हा ने एक बार फिर पुलिस प्रशासन पर सवाल उठाया है. ये विभाग सीएम नीतीश कुमार के अधिकार क्षेत्र में आता है. उन्होंने अच्छे अधिकारियों को हटाकर भ्रष्ट अधिकारियों को संरक्षण देने का आरोप लगाया है. लखीसराय के दौरे पर पहुंचे विजय कुमार सिन्हा ने बढ़ते अपराध को लेकर चिंता जताई और पुलिस पर कई सवाल खड़े किए.

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दरअसल, इससे पहले भी उन्होंने लखीसराय दौरे के दौरान स्थानीय पुलिस प्रशासन पर कई गंभीर सवाल खड़े किए थे जिसको लेकर बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और विधानसभा अध्यक्ष विजय कुमार सिन्हा के बीच सदन में ही नोंक-झोंक हो गई थी. 

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लखीसराय के पिपरिया थाना क्षेत्र में बीते 22 मई को मुरारिया गांव में एक बच्ची की गला रेतकर हत्या कर दी गई थी, जिसमें अब तक कोई कार्रवाई नहीं हुई और ना ही गिरफ्तारी हई. इसी को लेकर विधानसभा अध्यक्ष विजय सिन्हा पुलिस से नाराज हैं. विधानसभा अध्यक्ष विजय सिन्हा ने पुलिस प्रशासन पर फिर सवाल उठाए हैं. उन्होंने अच्छे अधिकारियों को हटाकर भ्रष्ट अधिकारियों को संरक्षण देने का आरोप लगाया है.

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विजय सिन्हा बढ़ते अपराध को लेकर पुलिस से नाराज हैं. उन्होंने उच्च अधिकारियों पर गंभीर आरोप लगाए हैं और भ्रष्ट पुलिस वालों को संरक्षण देने का आरोप लगाया है. साथ ही विजय सिन्हा ने डीजीपी, मुख्य सचिव और सीएम नीतीश से इस मामले की शिकायत करने की भी बात कही है.

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इसके अलावा सिन्हा ने अन्य विकास कार्यों पर भी अपना असंतोष प्रकट करते हुए खुले आम भ्रष्टाचार की शिकायत की. इस सम्बंध में उन्होंने हर घर नल का जल योजना का उदाहरण दिया और कहा कि 80 प्रतिशत घरों में इसका क्रियान्वयन असंतोषजनक है.

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