कैंसर पीड़ितों के लिए मुंबई में बिहार भवन, इतना कठोर क्यों हो गया मनसे का मन

'बिहार भवन' मुंबई के पॉश इलाके एलफिंस्टन एस्टेट में लगभग 0.68 एकड़ जमीन पर बनेगा. बिहार सरकार का दावा है कि यह भवन केवल सरकारी कामकाज के लिए नहीं, बल्कि मुंबई में इलाज कराने आने वाले गरीब मरीजों के लिए एक बड़ा सहारा बनेगा.

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  • बिहार सरकार ने मुंबई में तीन सौ चौदह करोड़ रुपये की लागत से भव्य बिहार भवन निर्माण का निर्णय लिया है
  • महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना ने मुंबई में बिहार भवन निर्माण पर सख्त विरोध जताते हुए कार्य रोकने की धमकी दी है
  • मनसे का तर्क है कि महाराष्ट्र की समस्याओं के बीच यह परियोजना मुंबई के लिए अतिरिक्त आर्थिक बोझ होगी
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मुंबई:

मुंबई में प्रस्तावित 'बिहार भवन' के निर्माण को लेकर महाराष्ट्र और बिहार की राजनीति में भारी उबाल है. मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के नेतृत्व वाली बिहार सरकार ने मुंबई के एलफिंस्टन एस्टेट (मुंबई पोर्ट ट्रस्ट की जमीन) में 314.20 करोड़ रुपये की लागत से एक भव्य भवन बनाने का निर्णय लिया है, जिस पर राज ठाकरे की पार्टी महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (MNS) ने सख्त विरोध जताते हुए निर्माण कार्य रोकने की धमकी दी है.

क्यों मचा है घमासान? 

विवाद की शुरुआत तब हुई जब मनसे नेता यशवंत किलेदार ने स्पष्ट चेतावनी दी कि वे मुंबई में बिहार भवन नहीं बनने देंगे. मनसे का तर्क है कि जब महाराष्ट्र खुद किसानों की बदहाली, महंगी शिक्षा और बेरोजगारी जैसी समस्याओं से जूझ रहा है, तो ऐसे में करोड़ों की लागत वाला यह प्रोजेक्ट मुंबई पर अतिरिक्त बोझ है. किलेदार ने नीतीश सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि यदि बिहार सरकार को कैंसर मरीजों की इतनी ही चिंता है, तो वे बिहार में ही विश्वस्तरीय अस्पताल क्यों नहीं बनाते, ताकि मरीजों को मुंबई न आना पड़े.

नीतीश सरकार का 314 करोड़ का मेगा प्रोजेक्ट

बिहार सरकार ने दिल्ली के 'बिहार निवास' और 'बिहार सदन' की तर्ज पर मुंबई में भी अपनी उपस्थिति दर्ज कराने के लिए 314.20 करोड़ रुपये की प्रशासनिक स्वीकृति दी है. यह भवन मुंबई के पॉश इलाके एलफिंस्टन एस्टेट में लगभग 0.68 एकड़ जमीन पर बनेगा. इसकी ऊंचाई 69 मीटर होगी और यह 30 मंजिला इमारत होगी. बिहार सरकार का दावा है कि यह भवन केवल सरकारी कामकाज के लिए नहीं, बल्कि मुंबई में इलाज कराने आने वाले गरीब मरीजों के लिए एक बड़ा सहारा बनेगा.

भवन की खासियतें और सुविधाएं

प्रस्तावित बिहार भवन आधुनिक सुविधाओं से लैस होगा. बिहार सरकार के अनुसार, टाटा मेमोरियल जैसे अस्पतालों में इलाज के लिए आने वाले बिहार के मरीजों को ठहरने में बड़ी दिक्कत होती है, जिसका समाधान यह भवन करेगा.

  • मरीजों के लिए डोरमेट्री - मरीजों और उनके परिजनों के लिए 240 बिस्तरों वाली एक बड़ी डोरमेट्री बनाई जाएगी.
  • कुल कमरे - भवन में कुल 178 कमरे होंगे, जो अधिकारियों और जरूरतमंदों के लिए उपलब्ध रहेंगे.
  • स्मार्ट पार्किंग - यहां 233 वाहनों के लिए सेंसर आधारित मल्टी-लेवल पार्किंग की सुविधा होगी.
  • अन्य सुविधाएं - इसमें एक 72 सीटों वाला कॉन्फ्रेंस हॉल, मेडिकल रूम और कैफेटेरिया भी शामिल है.

आर-पार की जंग! "यह लोकतंत्र है, राजतंत्र नहीं"

मनसे की धमकी पर बिहार सरकार के मंत्री अशोक चौधरी ने तीखी प्रतिक्रिया दी है. उन्होंने मनसे को चुनौती देते हुए कहा, "किसी में दम है तो भवन निर्माण रोक कर दिखाए. मुंबई किसी की जागीर नहीं है, यह पूरे देश का हिस्सा है." उन्होंने स्पष्ट किया कि भारत एक लोकतांत्रिक देश है और कोई भी क्षेत्रीय पार्टी सरकारी परियोजना को असंवैधानिक रूप से नहीं रोक सकती.

बिहार की विपक्षी पार्टी आरजेडी (RJD) ने भी नीतीश सरकार के इस फैसले को 'प्राथमिकताओं की भूल' बताया है, उनका कहना है कि यह पैसा बिहार में ही स्वास्थ्य सुविधाओं पर खर्च होना चाहिए था.

अब देखना यह होगा कि आने वाले दिनों में यह विवाद शांत होता है या महाराष्ट्र और बिहार की राजनीति के बीच एक नया 'बैटलफील्ड' बन जाता है.

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