- भगवंत मान ने NDTV के नवा पंजाब समिट में अपनी सरकार की उपलब्धियों और आगामी चुनाव रणनीति का विस्तृत विवरण दिया.
- भगवंत मान ने राघव चड्ढा के इस्तीफे पर कहा कि जनता ऐसे फैसलों को माफ नहीं करती और पुनः मौका कम ही देती है.
- मुख्यमंत्री ने कहा कि राजनीति में व्यक्ति से ज्यादा संगठन की मजबूती महत्वपूर्ण होती है.
पंजाब में आगामी विधानसभा चुनावों की आहट के साथ ही सियासी पारा चढ़ने लगा है. इसी चुनावी माहौल के बीच NDTV के 'नवा पंजाब समिट' में राज्य के मुख्यमंत्री भगवंत मान ने अपनी सरकार का लेखा-जोखा पेश किया. सीएम मान ने मंच से आम आदमी पार्टी (AAP) के उन तमाम वादों की फेहरिस्त सामने रखी, जिन्हें उनकी सरकार ने अब तक पूरा किया है. साथ ही, मुख्यमंत्री ने आने वाले दिनों के लिए पार्टी की चुनावी रणनीति पर खुलकर बात की. चर्चा के दौरान उन्होंने राघव चड्ढा की भूमिका और हाल ही में पाला बदलकर बीजेपी में शामिल हुए राज्यसभा सांसदों पर भी अपनी बेबाक राय रखी और BJP सरकार को आड़े हाथों लिया.
पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान ने राघव चड्ढा को लेकर कहा कि राजिंदर नगर के मतदाताओं ने उन्हें अपना प्रतिनिधि चुना था और उन्हें दिल्ली जल बोर्ड का अध्यक्ष भी बनाया गया था, लेकिन जब कोई निर्वाचित प्रतिनिधि कार्यकाल के बीच में इस्तीफा दे देता है तो जनता ऐसे फैसले को आसानी से माफ नहीं करती और दोबारा मौका भी कम ही देती है. उन्होंने कहा कि राघव उनकी पार्टी के सदस्य थे और इस घटनाक्रम से उन्हें व्यक्तिगत रूप से गहरा दुख पहुंचा, क्योंकि वे उनके साथ बहुत करीब से काम कर चुके थे और उनके रिश्ते लगभग पारिवारिक स्तर के थे.
भगवंत मान ने आगे कहा कि उन्हें यह समझ नहीं आया कि राघव चड्ढा के मन में क्या चल रहा था, लेकिन पंजाबी कहावत का हवाला देते हुए उन्होंने कहा, “अच्छा हुआ कि यह जल्दी खत्म हो गया, कम से कम जीवन उन लोगों की संगति में बर्बाद नहीं हुआ जो आपकी कद्र नहीं करते.” साथ ही उन्होंने संगठन की अहमियत पर जोर देते हुए कहा कि संगठन हमेशा व्यक्ति से बड़ा होता है.
उन्होंने कल्याण सिंह और उमा भारती का जिक्र करते हुए कहा कि दोनों ही अपने समय के बड़े और लोकप्रिय नेता रहे, लेकिन अलग-अलग परिस्थितियों में पार्टी से दूर हो गए. उनका कहना था कि राजनीति में व्यक्ति से ज्यादा संगठन की मजबूती मायने रखती है और यही किसी भी दल को आगे बढ़ाती है.
भगवंत मान ने कहा कि कल्याण सिंह एक बहुत चर्चित और लोकप्रिय नेता थे, जिन्हें लोग इतना सम्मान देते थे कि उनके पैरों की मिट्टी तक सिर से लगाते थे. लेकिन वाजपेयी जी से विवाद होने के बाद उन्होंने पार्टी छोड़ दी और फिर उनका राजनीतिक सफर अलग दिशा में चला गया, जिसका ज्यादा पता नहीं चला. भगवंत मान ने उमा भारती का भी जिक्र करते हुए कहा कि राजनीति में अंतत संगठन ही सबसे बड़ा होता है.
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