दिल्ली में केंद्रीय बजट से पहले हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू और केंद्रीय वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण के बीच हुई मुलाक़ात को केवल एक औपचारिक बैठक मानकर नहीं देखा जा रहा. NDTV से EXCLUSIVE बातचीत में मुख्यमंत्री सुक्खू ने इसे हिल स्टेट्स की आर्थिक चुनौतियों को केंद्र सरकार के सामने सीधे तौर पर रखने की कोशिश बताया.मुख्यमंत्री ने साफ़ कहा कि “हिमाचल जैसे पहाड़ी राज्य कभी रेवन्यू सरप्लस नहीं हो सकते” और ऐसे राज्यों को मैदानी राज्यों के आर्थिक पैमानों पर आंकना न तो व्यावहारिक है और न ही न्यायसंगत.
हिल स्टेट्स के लिए अलग आर्थिक पैमाने की मांग
CM सुक्खू का कहना है कि देश में जिस तरह से आर्थिक पारामीटर तय किए जाते हैं, वे ज़्यादातर मैदानी और अधिक आबादी वाले राज्यों को ध्यान में रखकर बनाए गए हैं. पहाड़ी राज्यों की भौगोलिक परिस्थितियां, सीमित संसाधन और पर्यावरणीय जिम्मेदारियां बिल्कुल अलग हैं.उन्होंने ज़ोर देकर कहा कि बजट में हिल स्टेट्स के लिए अलग और विशेष प्रावधान होना चाहिए, ताकि उनकी वास्तविक जरूरतों को पूरा किया जा सके.
‘North India की Water Bowl है हिमाचल'
मुख्यमंत्री ने हिमाचल प्रदेश की रणनीतिक और पर्यावरणीय अहमियत को रेखांकित करते हुए कहा कि राज्य सिर्फ़ अपने लिए नहीं, बल्कि पूरे उत्तरी भारत के लिए संसाधन उपलब्ध कराता है.उनका कहना है कि पंजाब किसी भी नदी का उदगम स्थल नहीं है. देश की पांचों प्रमुख नदियां हिमाचल से निकलती हैं.हिमाचल को ही उत्तर भारत की पानी का कटोरा कहा जाता है. ग्लेशियर और इकोलॉजी को बचाने की सबसे बड़ी जिम्मेदारी हिमाचल पर है. CM सुक्खू ने कहा कि हम नार्थ इंडिया के लंग्स हैं, हमारी ऑक्सीजन दिल्ली तक पहुंचती है और इसी वजह से इकोलॉजी संरक्षण के लिए अलग बजटीय सहायता जरूरी है.
GST से पहाड़ी राज्यों को नुकसान का सवाल
GST को लेकर मुख्यमंत्री ने केंद्र के सामने गंभीर सवाल उठाए. उनका कहना है कि GST एक कंज्युमर बेस्ड सिस्टम है, जिससे ज़्यादा आबादी वाले राज्यों को फायदा होता है, जबकि हिमाचल जैसे छोटे राज्यों को नुकसान उठाना पड़ता है.उन्होंने बताया कि GST लागू होने से पहले हिमाचल को VAT और Excise से करीब 4,000 करोड़रुपए की आमदनी होती थी.CM का सवाल है कि GST compensation तो पांच साल दिया गया, लेकिन उसके बाद हिमाचलजैसे राज्य कैसे survive करेंगे?
इंडस्ट्री नहीं, Tourism और Hydropower ही विकल्प
मुख्यमंत्री ने माना कि पहाड़ी इलाकों में बड़े पैमाने पर इंडस्ट्री लगाना व्यावहारिक नहीं है। हिमाचल की असली आर्थिक ताकत
टूरिज्म और हाइड्रो पावर है. उन्होंने केंद्र सरकार से मांग की कि अगर हाइड्रो पावर प्रोजेक्ट को फ्री किया जाता है, तो राज्य की रॉयल्टी 12 प्रतिशत से बढ़ाकर 50 प्रतिशत की जाए, ताकि हिमाचल को अपने प्राकृतिक संसाधनों का उचित लाभ मिल सके.
सेब और फ्री ट्रेड एग्रीमेंट पर चिंता
CM सुक्खू ने New Zealand के साथ हुए फ्री ट्रेड एग्रीमंट पर भी चिंता जताई। उन्होंने कहा कि सेब पर इंपोर्ट ड्यूटी 50 प्रतिशत से घटाकर 25 प्रतिशत किए जाने से हिमाचल के सेब किसानों को सीधा नुकसान होगा, और इस फैसले पर दोबारा विचार ज़रूरी है.
वित्तमंत्री का आश्वासन
मुख्यमंत्री सुक्खू के मुताबिक वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण ने उनकी बातों को गंभीरता से सुना और कहा कि हम आपकी चिंता से अवगत हैं. सीएम सुक्खू ने यह भी बताया कि राज्य की प्राथमिकताएं साफ़ हैं-Rural economy को मज़बूत करना, Health sector में निवेश और Education sector को सशक्त बनाना. इसके साथ ही उन्होंने मांग की कि कुछ योजनाओं में जनसंख्या कैटेगरी को रिलैक्स किया जाए, ताकि हिमाचल जैसे कम आबादी वाले राज्यों को भी बराबर का लाभ मिल सके.
बजट से पहले बड़ा संकेत
कुल मिलाकर, बजट से पहले हुई यह मुलाक़ात इस बात का संकेत है कि आने वाले बजट में हिल स्टेट्स के लिए अलग सोच और अलग आर्थिक ढांचे की मांग तेज़ हो रही है.अब सबकी नज़र इस पर है कि क्या Budget 2026 में हिमाचल और दूसरे पहाड़ी राज्यों को वह स्पेशल स्पेस मिल पाएगा, जिसकी मांग मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू कर रहे हैं.














