- असम सरकार ने अवैध कब्जे के खिलाफ सबसे बड़े अभियान के तहत 6 हजार बीघा वन भूमि वापस लेने का लक्ष्य रखा है
- होजाई जिले के डोबोका में आरक्षित वन क्षेत्र से करीब 1250 परिवारों का अतिक्रमण हटाने का अभियान शुरू किया गया है
- कब्जे वाले अधिकतर परिवार बांग्लादेश से आए अवैध अप्रवासी बंगाली मुस्लिम समुदाय के हैं
असम में अवैध कब्जे के खिलाफ सबसे बड़ा अभियान चलाया जा रहा है. इसके तहत अतिक्रण की गई जगह पर बुलडोजर चलाया जा रहा है. सरकार का लक्ष्य करीब 6000 बीघा जमीन वापस लेने का है. इसके तहत एक हजार से अधिक संदिग्ध अवैध अप्रवासियों के घरों को ध्वस्त किया जाएगा. असम सरकार ये बेदखली अभियान भारी सुरक्षा के बीच चला रही है.
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असम सरकार ने अवैध कब्जे के खिलाफ शनिवार को होजाई जिले के डोबोका में जमुना मौडांगा आरक्षित वन क्षेत्र से अतिक्रमण हटाने के लिए बेदखली अभियान शुरू किया गया. असम सरकार का यह अब तक का सबसे बड़ा बेदखली अभियान है, जिसका मकसद कई सालों से अवैध कब्जे में पड़ी लगभग 6,000 बीघा वन भूमि को वापस लेना है.
जानकारी के मुताबिक, करीब 1,250 परिवारों ने आरक्षित वन भूमि पर अतिक्रमण किया था. सरकार का अब तक का बेदखली अभियान शांतिपूर्ण रहा. इनमें से 152 परिवारों के मामले गुवाहाटी हाई कोर्ट में लंबित हैं. उन्हें अस्थायी रूप से बेदखली प्रक्रिया से बाहर रखा गया है. बाकी 1,098 परिवारों को सभी कानूनी औपचारिकताओं को पूरा करने के बाद बेदखल किया जा रहा है.
जमीन पर अतिक्रमण करने वाले ये परिवार बांग्लादेश से आए अवैध घुसपैठिए हैं, जो बंगाली मुस्लिम समुदाय के हैं, जिन्हें असम में मियां कहा जाता है. असम सरकार के अतिक्रमण हटवाने के लिए 50 से ज्यादा जेसीबी मशीनें भी तैयार रखी हैं, ताकि जरूरत पड़ने पर उनका इस्तेमाल किया जा सके.














