असम के मंत्री रुपेश गोआला ने शनिवार को असम विधानसभा में एक बड़ा खुलासा करते हुए बताया कि 2021 से लेकर अब तक राज्य में पुलिस मुठभेड़ों या हिरासत में 80 लोगों की मौत हुई है. इनमें से 78 मामलों में मजिस्ट्रियल जाँच कराई गई है. असम विधानसभा के शीतकालीन सत्र के आखिरी दिन मंत्री गोआला ने ये आंकड़े पेश किए.
मौत के बड़े आंकड़े
| प्रकार | कुल संख्या (2021 से) |
| पुलिस मुठभेड़/हिरासत में मारे गए | 80 |
| पुलिस फायरिंग में घायल संदिग्ध अपराधी | 223 |
| पुलिस हिरासत में मौत (अदालत में पेश होने से पहले) | 41 |
| पुलिस हिरासत में मौत (हिरासत के दौरान) | 39 |
वार्षिक मृत्यु दर
| साल | मौतें |
| 2021 | 31 |
| 2022 | 18 |
| 2023 | 13 |
| 2024 | 10 |
| 2025 (19 नवंबर तक) | 08 |
पुलिस फायरिंग में घायल होने के मामले
| साल | घायल |
| 2021 | 67 |
| 2022 | 79 |
| 2023 | 35 |
| 2024 | 35 |
| 2025 (अब तक) | 07 |
जांच और प्रोसेस
मंत्री ने बताया कि, "कुल 180 मजिस्ट्रियल जांच दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 174 के तहत और 194 जांच भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 194(1) के तहत की गईं. ये सभी जांच राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) के दिशानिर्देशों के अनुसार की गईं, जिसके तहत पुलिस कार्रवाई के दौरान किसी भी मौत की रिपोर्ट 48 घंटे के भीतर जमा करना अनिवार्य है. कछार जिले में तीन हमर युवकों की कथित मुठभेड़ में हुई हत्या की उच्च स्तरीय जांच भी की गई थी."
जेल की स्थिति
विपक्ष के नेता देबब्रत सैकिया ने असम की जेलों की स्थिति के बारे में भी सवाल किया. जवाब में मंत्री ने बताया, "असम की जेलों की कुल क्षमता 11,372 कैदियों की है. अभी अलग-अलग जेलों में 11,241 कैदी बंद हैं."














