- असम में कांग्रेस के कई वरिष्ठ नेता पार्टी छोड़कर बीजेपी में शामिल हो गए, जिससे पार्टी की चुनौतियां बढ़ गई हैं
- प्रद्युत बोरदोलोई ने लोकसभा से इस्तीफा देकर बीजेपी के टिकट पर विधानसभा चुनाव लड़ने का फैसला किया है
- कांग्रेस का कहना है कि प्रियंका गांधी की जिम्मेदारी उम्मीदवार चयन तक सीमित है और उन्होंने अपना काम ठीक किया है
असम में पहले भूपेन वोरा और अब प्रद्युत बोरदोलोई के कांग्रेस छोड़ने के बाद यह बहस चल पड़ी है कि प्रियंका गांधी के स्क्रीनिंग कमिटी के अध्यक्ष रहते यह कैसे हुआ. कांग्रेस पार्टी के सूत्र बताते हैं कि प्रियंका गांधी का काम उम्मीदवारों के चयन तक सीमित है और उन्होंने अपना काम बखूबी किया है. अधिकतर उम्मीदवारों के नामों की घोषणा की जा चुकी है, जिसमें प्रद्युत बोरदोलोई के बेटे को भी टिकट देने की घोषणा की गई है. अब उनके बेटे चुनाव लड़ते हैं या नहीं ये देखना होगा.
सबकुछ मिला तो फिर क्यों छोड़ी कांग्रेस?
प्रद्युत बोरदोलोई ने लोकसभा सीट से भी इस्तीफा दे दिया है और वे बीजेपी के टिकट पर विधानसभा का चुनाव लड़ेंगे. मगर इस बात से इंकार नहीं किया जा सकता कि इस सब का ठीकरा प्रियंका गांधी पर ही फोड़ा जाएगा. हालांकि इसकी ज़िम्मेदारी प्रदेश अध्यक्ष और प्रभारी महासचिव की ज्यादा बनती है. असम कांग्रेस अध्यक्ष गौरव गोगोई का कहना है कि कांग्रेस ने प्रद्युत बोरदोलोई को सब कुछ दिया. वह 15 साल तक असम में मंत्री रहे. दो बार सांसद और इस बार बेटा को भी टिकट दिया. अगर इसके बाद भी कोई पार्टी छोड़ता है तो जरूर कोई और बात होगी.
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असम में बड़े कांग्रेस नेताओं ने क्यों छोड़ी पार्टी?
संसद में कांग्रेस के नेता निजी बातचीत में ईडी और अन्य सरकारी एजेंसियों की ओर भी इशारा कर रहे हैं. बहरहाल इतना जरूर है कि कांग्रेस को जवाब तो देना ही पड़ेगा कि 22 फरवरी को भूपेन बोरा ने कांग्रेस छोड़ी, 5 मार्च को 3 विधायक कांग्रेस छोड़ कर बीजेपी में चले गए, इसके पहले असम कांग्रेस के पूर्व कार्यकारी अध्यक्ष राणा गोस्वामी बीजेपी में गए, असम यूथ कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष अंकिता दास और संयुक्त महासचिव परबा दास कलिता ने भी पार्टी छोड़ी.
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कांग्रेस की जीत का रास्ता कैसे होगा साफ?
मगर इस सब के बावजूद कांग्रेस के नेताओं का कहना है कि हम मजबूती से चुनाव लड़ेंगे. कांग्रेस का कहना है कि अभी उसके पास केवल 29 विधायक बचे हैं. मगर इतने सारे नेताओं के जाने के बाद वो अपना प्रदर्शन सुधारेंगे, क्योंकि उनके पास गौरव गोगोई जैसा साफ सुथरा चेहरा है, जिनकी एक विरासत है और साथ में प्रियंका गांधी भी हैं. मगर इतना जरूर है कि कांग्रेस को सत्ता की छोड़िए अगर वो अपने पिछले प्रदर्शन में सुधार कर लें तो भी उनकी जीत ही मानी जाएगी.
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