- बेंगलुरु के चिन्नास्वामी स्टेडियम में IPL मैच के दौरान मोबाइल चोरी के लिए अंतरराज्यीय रैकेट का भंडाफोड़ हुआ
- पुलिस ने 13 आरोपियों को गिरफ्तार किया जिनमें 9 नाबालिग शामिल हैं और ज्यादातर झारखंड बिहार के रहने वाले हैं
- गिरोह ने नाबालिगों को चोरी और पुलिस से बचने की तकनीकों की खास ट्रेनिंग दी थी
बेंगलुरु के चिन्नास्वामी स्टेडियम में 28 मार्च को रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु (RCB) और सनराइजर्स हैदराबाद (SRH) के बीच खेले गए IPL मुकाबले के दौरान एक बड़ा अंतरराज्यीय मोबाइल चोरी का रैकेट पकड़ा गया है. पुलिस ने पूरे गैंग का भंडाफोड़ किया है. ये गैंग मैच देखने आई भीड़ को निशाना बनाने के लिए खास तौर पर ट्रेंड किए गए नाबालिगों का इस्तेमाल करता था. पुलिस ने कुल 13 लोगों को पकड़ा हैहै, जिनमें 9 नाबालिग शामिल हैं. इनमें से ज्यादातर लोग झारखंड और बिहार के रहने वाले हैं.
चोरी करने के लिए फ्लाइट और ट्रेनों से बुलाया
दरअसल मैच देखने आए कई दर्शकों के मोबाइल फोन चोरी हुए थे. इसके बाद बेंगलुरु पुलिस एक्शन में आ गई. पुलिस की जांच में पता चला कि यह गिरोह बहुत ही सुनियोजित तरीके से काम करता था. आरोप है कि चोरी की वारदातों को अंजाम देने के लिए ही, देश के अलग-अलग हिस्सों से नाबालिगों को ट्रेनों और हवाई जहाजों से बेंगलुरु लाया गया था. गैंग ने इन नाबालिगों को न सिर्फ जेब काटने की तकनीकों में, बल्कि पुलिस से बचने के तरीकों में भी बाकायदा ट्रेन किया था.
नाबालिगों को दी गई खास ट्रेनिंग
सूत्रों के मुताबिक, नाबालिगों को यह भी सिखाया गया था कि अगर पुलिस उन्हें पकड़ ले तो उन्हें कैसा बर्ताव करना है. इसमें यह भी शामिल था कि पूछताछ के दौरान उन्हें क्या बयान देने हैं और जुवेनाइल जस्टिस बोर्ड के सामने पेश किए जाने पर उन्हें कैसे जवाब देने हैं. माना जा रहा है कि गिरोह ने जानबूझकर नाबालिगों का इस्तेमाल किया ताकि उन पर किसी को शक न हो और उन्हें कानूनी कार्रवाई से भी कम से कम नुकसान उठाना पड़े.
मैच के टिकट चोरी करके स्टेडियम में घुसे
इस बात का एक और सबूत मिला है कि यह सब पहले से सोच-समझकर किया गया था. गिरोह के कुछ सदस्यों ने कथित तौर पर मैच के टिकट चोरी किए ताकि वे स्टेडियम में घुस सकें और भीड़ के बीच से चोरी की वारदातों को अंजाम दे सकें. पुलिस ने अब तक 75 मोबाइल फोन बरामद किए हैं. इनमें 70 चोरी के फोन हैं और पांच ऐसे फोन हैं, जिनका इस्तेमाल आरोपियों ने आपस में संपर्क करने और अपराधों को अंजाम देने के लिए किया था.
गिरफ्तार किए गए चार आरोपियों की पहचान शुभम कुमार, ईशल कुमार, संजीत कुमार और सोहन कुमार के रूप में हुई है. उन्हें अदालत में पेश किया गया और पुलिस हिरासत में भेज दिया गया है. वहीं नौ नाबालिगों को जुवेनाइल जस्टिस बोर्ड के सामने पेश किया गया और सरकारी सुधार गृहों में भेज दिया गया है. अधिकारियों को शक है कि गिरफ्तार किए गए लोग एक बहुत बड़े और सुनियोजित नेटवर्क का हिस्सा हैं, जो देश के कई शहरों में सक्रिय है. इस गिरोह के अन्य सदस्यों की पहचान करने और इस समूह से जुड़ी चोरी की अन्य वारदातों का पता लगाने के प्रयास जारी हैं. इस पूरे ऑपरेशन को सेंट्रल डिवीज़न के DCP अक्षय एम. हाके और उनकी टीम ने अंजाम दिया.
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