ED के साथ CBI का भी कस रहा शिकंजा, थम नहीं रहीं अनिल अंबानी की मुश्किलें, कई डिजिटल रिकॉर्ड जब्त

सूत्रों ने बताया कि रिलायंस होम फाइनेंस लिमिटेड से जुड़े 35 से ज्‍यादा ठिकानों में छापेमारी की गई, जिसमें करीब 50 कंपनियां और 25 व्यक्ति शामिल थे. उन्होंने बताया कि यह छापेमारी धन शोधन निवारण अधिनियम की धारा 17 के तहत की गई.

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  • अनिल अंबानी की कंपनियों के खिलाफ ED ने छापेमारी कर दस्तावेज, हार्ड ड्राइव और अन्य डिजिटल रिकॉर्ड जब्‍त किए.
  • अनिल अंबानी के खिलाफ ED-CBI 24000 करोड़ रुपये से अधिक के मनी लॉन्ड्रिंग मामले की जांच कर रहे हैं.
  • सूत्रों ने बताया कि ED जांच कर रही है कि क्या यस बैंक के संस्थापकों सहित बैंक अधिकारियों को रिश्वत दी गई थी.
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मुंबई :

अनिल अंबानी (Anil Ambani) और उनके रिलायंस समूह की मुश्किलें लगातार बढ़ती जा रही है. अनिल अंबानी से जुड़ी कंपनियों के खिलाफ प्रवर्तन निदेशालय (Enforcement Directorate) का शिकंजा लगातार कसता जा रहा है. ED ने अनिल अंबानी की कंपनियों के खिलाफ 24 जुलाई को छापेमारी शुरू की थी, जो शनिवार को समाप्त हो गई. सूत्रों ने एनडीटीवी प्रॉफिट को बताया कि अनिल अंबानी की कंपनियों से जुड़े कई परिसरों की गहन तलाशी ली गई और जांचकर्ताओं ने मुंबई और दिल्ली के कई स्थानों से भारी संख्‍या में दस्तावेज, हार्ड ड्राइव और अन्य डिजिटल रिकॉर्ड जब्‍त किए हैं.

इस मामले से जुड़े लोगों के अनुसार, ED और केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) ने 24,000 करोड़ रुपये से अधिक के इस मामले में बड़े पैमाने पर मनी लॉन्ड्रिंग की जांच की.

वित्तीय अनियमितताओं को लेकर की गई जांच

यह कार्रवाई कथित वित्तीय अनियमितताओं को लेकर की गई, जो धन का संभावित दुरुपयोग, ऋण धोखाधड़ी और धन शोधन से जुड़ी व्‍यापक जांच का हिस्‍सा है और ED की इस बात पर केंद्रित है कि क्या बैंकों से प्राप्त धन को फर्जी संस्थाओं के जरिए भेजा गया और समूह की कंपनियों द्वारा उसका दुरुपयोग किया गया.

सूत्रों ने बताया कि एजेंसी ने रिलायंस होम फाइनेंस लिमिटेड (Reliance Home Finance Ltd) से जुड़े 35 से ज्‍यादा परिसरों में छापेमारी की, जिसमें करीब 50 कंपनियां और 25 व्यक्ति शामिल थे. उन्होंने बताया कि यह छापेमारी धन शोधन निवारण अधिनियम की धारा 17 के तहत की गई.

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ऋण से पहले ही मिल गया था प्रमोटरों को पैसा?

सूत्रों ने बताया कि ईडी इस बात की जांच कर रही है कि क्या यस बैंक के संस्थापकों सहित बैंक अधिकारियों को रिश्वत दी गई थी और क्या ऋण दिए जाने से पहले ही प्रमोटरों को पैसा मिल गया था. साथ ही उन्होंने यह भी बताया कि एजेंसी अप्रैल 2017 और मार्च 2019 के बीच RHFL द्वारा कॉर्पोरेट ऋण वितरण में उल्लेखनीय वृद्धि की भी जांच कर रही है. उन्होंने कहा कि यस बैंक के ऋणों से प्राप्त धन को कथित तौर पर समूह और शेल फर्मों में स्थानांतरित कर दिया गया था.

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