शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) गुट के राष्ट्रीय प्रवक्ता आनंद दुबे ने पार्टी से इस्तीफा दे दिया है. उन्होंने अपनी प्राथमिक सदस्यता और प्रवक्ता पद, दोनों से खुद को पूरी तरह अलग करने का ऐलान किया है. अपने इस्तीफे में उन्होंने वैचारिक मतभेदों और पार्टी के भीतर लंबे समय से महसूस की जा रही घुटन को मुख्य कारण बताया है.
प्रेस कॉन्फ्रेंस के जरिए आनंद दुबे ने साफ किया कि उनका यह फैसला अचानक या रातों-रात नहीं लिया गया है. उन्होंने कहा, "पिछले चार-पांच सालों से मैंने महाराष्ट्र से लेकर राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मंचों पर पार्टी का मजबूती से पक्ष रखा. लेकिन क्या बदला? पिछले कई महीनों से मैं गहरी पीड़ा में था और खामोशी से अंदर ही अंदर घुट रहा था."
'सनातन धर्म के आदर्शों को जाहिर करने में असमर्थ'
दुबे ने कहा कि वे पार्टी के मंच से अपने हिंदुत्व और सनातन धर्म के आदर्शों को स्वतंत्र रूप से जाहिर करने में खुद को असमर्थ पा रहे थे. उन्होंने अपनी विचारधारा को साफ करते हुए कहा, "हर पार्टी की अपनी एक विचारधारा होती है. मैं वीर सावरकर और स्वामी विवेकानंद के आदर्शों पर चलने वाला कार्यकर्ता हूं. मैं छत्रपति शिवाजी महाराज और छत्रपति संभाजी महाराज को अपना आदर्श मानता हूं. पार्टी की तरफ से मुझे जो लाइन बोलने के लिए दी जाती है, वह मुझे सही नहीं लगती."
पार्टी की चुप्पी पर उठाए सवाल
दुबे ने कुछ नामों का जिक्र करते हुए पार्टी की मौजूदा वैचारिक दिशा पर सीधा प्रहार किया. उन्होंने कहा, "मेरे हीरो शर्जील इमाम, उमर खालिद या ध्रुव राठी नहीं हैं. मेरे हीरो स्मित मच्छार हैं वह व्यक्ति जिसने केवल भारत ही नहीं बल्कि पूरी दुनिया को बजरंगबली की असीम शक्ति दिखाई. इसके बावजूद, हमारी पार्टी की ओर से उनके समर्थन में एक ट्वीट तक नहीं किया गया."
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