- केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने नशे के खिलाफ 2029 तक रोडमैप और समयबद्ध समीक्षा प्रणाली बनाने पर जोर दिया
- 2014 से 2025 के बीच 1 लाख 71 हजार करोड़ रुपये मूल्य की ड्रग्स जब्त कर नशे के खिलाफ बड़ी सफलता मिली
- सिंथेटिक ड्रग्स के विरुद्ध अभियान में 11 गुना वृद्धि हुई और अफीम की फसल नष्ट करने का कार्य भी तेज हुआ
केन्द्रीय गृह और सहकारिता मंत्री अमित शाह ने नई दिल्ली के विज्ञान भवन में नार्को-कोऑर्डिनेशन सेंटर (NCORD) की 9वीं शीर्ष-स्तरीय बैठक की अध्यक्षता की. उन्होंने कहा कि नशे के खिलाफ लड़ाई में भारत सरकार के सभी विभागों को 2029 तक का रोडमैप और उस पर अमल के लिए समयबद्ध समीक्षा की पद्धति बनानी चाहिए. यह चुनौती कानून-व्यवस्था से ज़्यादा नार्को-टेरर के प्रश्न से जुड़ी है और सबसे अधिक महत्वपूर्ण है कि यह एक प्रकार से देश की आने वाली नस्लों को बरबाद करने का षड्यंत्र है.
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नशे के खिलाफ लड़ाई में मिली सफलता
अमित शाह ने कहा कि हमारे युवाओं के स्वास्थ्य, उनके सोचने और परफॉर्म करने की क्षमता और अपराध एक प्रकार से इस समस्या से ही जुड़े हैं. 31 मार्च, 2026 से हम सब एक साथ इस समस्या के खिलाफ 3 साल का एक सामूहिक अभियान चलाएंगे. अमित शाह ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जी के नेतृत्व में विगत 11 साल में हमने नशे के खिलाफ लड़ाई में काफी सफलता प्राप्त की है. हम ड्रग्स की सप्लाई चेन के प्रति सामूहिक रूथलैस अप्रोच, डिमांड रिडक्शन के प्रति स्ट्रेटेजिक अप्रोच और हार्म रिडक्शन के लिए ह्यूमन अप्रोच के साथ आगे बढ़ें, तभी नशामुक्त भारत का लक्ष्य प्राप्त कर सकेंगे.
शाह ने कहा कि भारत सरकार की अप्रोच बहुत स्पष्ट है कि ड्रग्स बनाने वाला और बेचने वाला, दोनों के प्रति कोई दयाभाव नहीं रखना चाहिए. नशे के व्यापार के किंगपिन, फायनेंसर और लॉजिस्टिक्स के रूट्स पर की जाने वाली कठोर कार्यवाही हमारी समीक्षा का मुद्दा होना चाहिए. शाह ने यह भी कहा कि हमें FSL का उपयोग और समय पर चार्जशीट दाखिल कर सजा कराने की दर बढ़ाने को भी अपने लक्ष्यों में शामिल करना चाहिए. टॉप टू बॉटम और बॉटम टू टॉप अप्रोच ड्रग्स के पूरे नेटवर्क की जांच के लिए बेहद ज़रूरी है.
2004 से 2013 के बीच 40 हज़ार करोड़ की ड्रग्स जब्त
गृह मंत्री ने कहा कि नार्कोटिक्स के विरूद्ध लड़ाई की उपलब्धियां संतोषजनक हैं. 2004 से 2013 के दौरान 40 हज़ार करोड़ रूपए मूल्य की 26 लाख किलोग्राम ड्रग्स ज़ब्त की गई जबकि 2014 से 2025 के दौरान 1 लाख 71 हजार करोड़ रुपये मूल्य की 1 करोड़ 11 लाख किलोग्राम ड्रग्स पकड़ी गई है. शाह ने कहा कि सिंथेटिक ड्रग्स के खिलाफ हमारी मुहिम उत्साह देने वाली रही है. ड्रग्स को डिस्पोज़ करने की मात्रा में भी हम 11 गुना बढ़ोत्तरी कर सके हैं. उन्होंने कहा कि 2020 में 10,770 एकड़ भूमि पर अफीम की फसल नष्ट की गई और नवंबर, 2025 तक 40 हज़ार एकड़ भूमि पर फसल को नष्ट किया गया है.
अमित शाह ने सभी विभागों को निर्देश दिया कि वे ड्रग्स की समस्या से निपटने की अपनी-अपनी जिम्मेदारियों के अनुसार 31 मार्च तक एक रोडमैप तैयार करें, निगरानी तंत्र स्थापित करें और उस पर पूरी तरह फोकस करें, ताकि इस समस्या का संपूर्ण समाधान हो सके. उन्होंने कहा कि हमें अगले तीन वर्षों में देश में ड्रग्स के खिलाफ सभी मोर्चों पर लड़ाई लड़कर ‘नशा मुक्त भारत' बनाना है और देश के युवाओं को ड्रग्स से सुरक्षित रखने का प्रयास करना है. उन्होंने कहा कि ड्रग्स के खिलाफ इस लड़ाई में निरंतर जागरूकता ही हमें सुरक्षित कर सकती है. हम एक ऐसी स्थायी व्यवस्था बनाना चाहते हैं जो इस लड़ाई को लड़ने में सक्षम हो.
ड्रग्स के खिलाफ लड़ाई में तेजी लानी होगी
अमित शाह ने कहा कि ड्रग्स के खिलाफ लड़ाई में फॉरेंसिक साइंस लैब (FSL) की बहुत अहम भूमिका है. जिन राज्यों में जब्त की गई ड्रग्स को नष्ट करने के काम की गति धीमी है, उन्हें इसमें तेजी लानी होगा. उन्होंने सभी राज्यों के पुलिस महानिदेशकों से आग्रह किया कि वे अपने राज्य में रोडमैप तैयार कर काम समय में ड्रग विनिष्टिकरण के लिए ठोस कदम उठाएं.
शाह ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जी ने 2047 में आजादी की शताब्दी के समय भारत को पूरे विश्व में हर क्षेत्र में सर्वप्रथम बनाने का लक्ष्य रखा है. ऐसे भारत की रचना करने के लिए हम सब का यह दायित्व है कि हम युवा पीढ़ी को ड्रग्स से संपूर्ण सुरक्षा दें, यह लड़ाई ऐसे मुकाम पर है कि हम इस से जीत सकते हैं. गृह मंत्री ने कहा कि देश की अगली पीढ़ियों को बचाने का काम हम शीर्ष प्राथमिकता के साथ करेंगे.














