- भारतीय सेना के लिए 83 ट्रैक्ड आकाशतीर एयर डिफेंस कैरियर खरीदने के लिए रक्षा मंत्रालय ने RFP जारी किया है
- आकाशतीर सिस्टम डीआरडीओ द्वारा विकसित किया गया है जो विभिन्न हथियारों और सेंसर को जोड़कर ऑटोमैटिक कार्य करता है
- ये ट्रैक्ड प्लेटफॉर्म टैंकों के साथ चल सकेंगे और ड्रोन एवं हवाई हमलों से रक्षा में सक्षम होंगे
फ्रंटलाइन लड़ाई के लिए भारतीय सेना को 83 ट्रैक्ड आकाशतीर एयर डिफेंस कैरियर चाहिए. रक्षा मंत्रालय ने 83 नए सिस्टम के लिए रिक्वेस्ट फ़ॉर प्रपोजल यानि कि RFP जारी किया है. इसका नाम है कॉमन एयर डिफेंस इनेबल्ड ट्रैकिंग सिस्टम यानि कि CADET. यह खास ट्रैक वाले प्लेटफॉर्म होंगे. इन पर आकाश तीर सिस्टम लगाया जाएगा. बता दें कि आकाश तीर सिस्टम डीआरडीओ ने बनाया है.
यह अलग-अलग एयर डिफेंस हथियारों और सेंसर को जोड़ता है और रियल-टाइम में काम करता है. यह पूरी प्रक्रिया को ऑटोमैटिक बनाता है. इसे ट्रैक्ड प्लेटफॉर्म पर लगाने का मकसद साफ है कि यह टैंक और बख्तरबंद गाड़ियों के साथ चल सके. युद्ध के समय ये फौजें आगे बढ़ती हैं तब ड्रोन और हवाई हमले का खतरा ज्यादा होता है.
यह खरीद “Buy (Indian-IDDM)” कैटेगरी में होगी. इसका मतलब है कि इसका डिजाइन और निर्माण भारत में होगा. इसमें कम से कम 65% हिस्सा देश में बनेगा. इससे आयात पर निर्भरता कम होगी.
यह क्या काम करेगा?
CADET एक मोबाइल कमांड पोस्ट की तरह काम करेगा. यह एयर डिफेंस यूनिट्स के साथ रहेगा, इसमें आकाश तीर के इलेक्ट्रॉनिक्स लगे होंगे. यह टैंक जैसे हर जगह चल सकेगा. यह मैदान, रेगिस्तान और पहाड़ में चलेगा और 5,000 मीटर ऊंचाई तक काम करेगा. भविष्य में इसमें ड्रोन पकड़ने की क्षमता भी होगी. यह ड्रोन हमलों को रोक सकेगा.
आकाशतीर की तकनीकी खासियत जानें
यह गाड़ी -30 से +50 डिग्री तापमान में एक बार में 320 किमी से ज्यादा चलेगी और सड़क पर 45 किमी/घंटा की रफ्तार से दौड़ेगी. इसकी ऑफ-रोड स्पीड15 किमी/घंटा होगी. इसमें कम से कम 4 लोग बैठ सकेंगे. इसके अंदर एसी जैसी सुविधा होगी. इसे गोलियों से बचाव की सुरक्षा मिलेगी. इसमें 30 किलोवाट का पावर यूनिट होगा जो कि 6 घंटे तक सिस्टम चलाएगा. यह जीपीएस ग्लोनासस और नाविक से नेविगेशन होगा. इसमें जैमिंग से बचने की क्षमता भी होगी.
आकाशतीर की डिलीवरी और शर्तें
सभी 83 सिस्टम 36 महीने में मिलेंगे. अगर दो कंपनियां चुनी जाती हैं, तो ऑर्डर बांटा जाएगा. इसमें वारंटी 24 महीने की होगी. इसकी उम्र 20 साल मानी गई है।
आकाशतीर एयर डिफेंस कैरियर का महत्व
यह सिस्टम एक बड़ी कमी को पूरा करेगा. पहले व्हील वाली गाड़ियां टैंकों के साथ नहीं चल पाती थीं, खासकर पहाड़ों में दिक्कत होती थी. अब सेना तेजी से तैनाती कर सकेगी. वायुसेना का ट्रांसपोर्ट एयरक्राफ्ट सी -17 विमान से इन्हें जल्दी भेजा जा सकेगा. खासकर 2020 में चीन के साथ हुए लद्दाख में खूनी संघर्ष के बाद इसकी जरूरत और बढ़ी है. ऐसे में सेना करीब छह साल पहले चीन के तनाव से सबक लेकर अपने आप को मजबूत करने में जुटी हैं.













