दुश्मनों की मिसाइलें, ड्रोन का पलक झपकते पता चलेगा, भारत के 'ब्रह्मास्त्र' से चीन-पाक की बढ़ेगी टेंशन, बढ़ेगा AWACS का बेड़ा 

भारत ऑपरेशन सिंदूर के बाद लगातार अपनी हवाई रक्षा मोर्चे को मजबूत करने में जुटा है. वो मिसाइल और ड्रोन हमलों से निपटने के लिए लगातार जरूरी अवॉक्स हथियारों की खरीद कर रहा है.

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Airborne Early Warning and Control System
नई दिल्ली:

ऑपरेशन सिंदूर के बाद भारत लगातार आसमान में अपने रक्षा कवच को मजबूत करने में जुटा है. दुश्मनों की मिसाइलें और ड्रोन हमलों को नाकाम करने के लिए अवॉक्स के बेड़े का और विस्तार किया जा रहा है.  भारतीय वायुसेना अपनी हवाई निगरानी और एयरस्पेस मैनेजमेंट क्षमता को और मजबूत करने की दिशा में एक और  बड़ा कदम उठा रही है. इसके तहत वायुसेना ने छह एयरबोर्न अर्ली वार्निंग एंड कंट्रोल (AWACS) विमानों की खरीद के लिए उद्योग जगत से रिक्वेस्ट फॉर इन्फॉर्मेशन (RFI) जारी की है. इस प्रस्ताव में केवल विमान ही नहीं, बल्कि उनसे जुड़े ग्राउंड इक्विपमेंट और जरूरी सुविधाएं भी शामिल होंगी.

यह फैसला ऐसे समय में लिया गया है, जब भारत को उत्तर और पश्चिमी सीमाओं पर लगातार सुरक्षा चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है. आधुनिक युद्ध में AWACS की भूमिका बेहद अहम होती है। ये विमान आसमान में उड़ते हुए दूर-दूर तक निगरानी रखते हैं और दुश्मन के विमानों, ड्रोन और मिसाइल गतिविधियों की समय रहते जरूरी जानकारी देते हैं। इससे वायुसेना को किसी भी खतरे का जवाब देने में सहायता मिलती है.

RFI में वायुसेना ने तकनीकी जरूरतें साफ तौर पर बताई हैं. चुने जाने वाले AWACS विमान में कम से कम 10 घंटे तक लगातार उड़ान भरने की क्षमता होनी चाहिए या फिर उसमें हवा में ईंधन भरने की सुविधा हो. इसके अलावा विमान 45,000 फीट की ऊंचाई तक उड़ान भरने में सक्षम होना चाहिए. वायुसेना ने यह भी शर्त रखी है कि ये विमान करीब 10,000 फीट की ऊंचाई पर स्थित एयरफील्ड से भी ऑपरेट कर सकें. यह व्यवस्था खासकर पहाड़ी और ऊंचाई वाले इलाकों को ध्यान में रखकर रखी गई है.

मिशन सिस्टम के मामले में भी वायुसेना की मांग काफी उन्नत है. विमान में 360 डिग्री स्कैन करने वाला आधुनिक रडार होना चाहिए, जिससे छोटे और धीमी गति से उड़ने वाले ड्रोन से लेकर तेज रफ्तार और हाइपरसोनिक लक्ष्यों तक की पहचान सरलता से की जा सके. इसके साथ ही सुरक्षित संचार प्रणाली, सैटेलाइट नेविगेशन, डेटा लिंक और आत्मरक्षा के उपाय भी अपनाने  जरूरी होंगे.

फिलहाल भारतीय वायुसेना के पास कुल पांच AWACS/AEW&C विमान हैं. इनमें तीन रूसी IL-76 पर आधारित वेरियंट A-50 और दो स्वदेशी नेत्रा सिस्टम शामिल हैं. DRDO ने नेत्रा के और उन्नत संस्करण पर भी काम शुरू कर दिया है. हालांकि आश्चर्यजनक रूप से अवाक्स के मामले में चीन और पाकिस्तान की तुलना में हमारा अवाक्स का बेड़ा छोटा है. चीन के पास 20 और पाकिस्तान के पास 12 ऐसे प्लेटफार्म है. वही संसद की रक्षा  संबंधी स्थाई समिति का कहना है कि वायुसेना की मौजूदा जरूरतों को देखते हुए उसके पास 12 ऐसे सिस्टम होने चाहिए.वैसे नई AWACS खरीद से वायुसेना की निगरानी, कमांड और कंट्रोल क्षमता में बड़ा सुधार होगा और देश की हवाई सुरक्षा पहले से कहीं ज्यादा मजबूत होगी.
 

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