AI इंसानों की जगह नहीं लेगा बल्कि कार्यक्षमता बढ़ाएगा, करण अदाणी ने बताया- कैसे लाएगा बदलाव

करण अदाणी ने बताया कि कॉलेज खत्म करने के बाद उन्होंने पिता से बंदरगाह बिजनेस में दिलचस्पी जाहिर की थी. उसी रात उन्हें मुंद्रा पोर्ट भेज दिया गया था, जहां उन्हें जिंदगी का बेहतरीन अनुभव मिला.

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अदाणी पोर्ट्स एंड स्पेशल इकनोमिक जोन लिमिटेड के मैनेजिंग डायरेक्टर करण अदाणी ने शनिवार को कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) पूरी तरह से इंसानों की जगह नहीं लेगा. इसके बजाय यह कार्यक्षमता बढ़ाने वाले माध्यम की तरह काम करेगा, जिससे कम लोग मिलकर भी ज्यादा आउटपुट देने में सक्षम हो सकेंगे. 

AI प्रोडक्टिविटी बढ़ाने में मददगार

राजधानी दिल्ली में ऑल इंडिया मैनेजमेंट एसोसिएशन (AIMA) की तरफ से आयोजित 70वें स्थापना दिवस और 20वें राष्ट्रीय प्रबंधन दिवस कार्यक्रम में करण अदाणी ने कहा कि एआई को एक ऐसे ताकतवर टूल की तरह देखा जाना चाहिए, जो प्रोडक्टिविटी में सुधार करता है और कंपनियों को तेजी से आगे बढ़ने में मदद करता है. हालांकि उन्होंने माना कि शुरुआती दौर में बड़े पैमाने पर तकनीक को अपनाने से अस्थायी रूप से कई नौकरियां प्रभावित हो सकती हैं. 

स्किल बढ़ाने पर देना होगा ध्यान

उन्होंने कहा कि बड़े संगठनों को अपने कर्मचारियों की स्किल्स बढ़ाने और फिर से ट्रेनिंग देने के लिए मैनेजमेंट का एक व्यवस्थित सिस्टम बनाना चाहिए. तकनीक के दौर में बदलाव को सही तरीके से लागू करना कंपनियों की नैतिक जिम्मेदारी बनती है.

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इन चीजों पर ग्रुप का फोकस बढ़ा

करण अदाणी ने अदाणी समूह का जिक्र करते हुए कहा कि ग्रुप का फोकस अब नेशनल इन्फ्रास्ट्रक्चर, डिफेंस और इंटरनल गवर्नेंस पर है. उन्होंने निवेश के तीन मुख्य स्तंभ के रूप में एनर्जी, लॉजिस्टिक्स और कोर मटेरियल्स का नाम लिया. बताया कि सिटी गैस डिस्ट्रीब्यूशन, पावर ट्रांसमिशन नेटवर्क और डेटा सेंटर्स जैसे डिजिटल एसेट्स लॉन्ग टर्म फोकस का हिस्सा बने रहेंगे. 

मुंद्रा पोर्ट पर मिला बेहतरीन अनुभव 

अपने पेशेवर सफर को याद करते हुए करण अदाणी ने बताया कि कॉलेज खत्म करने के बाद उन्होंने अपने पिता से बंदरगाह बिजनेस में दिलचस्पी जाहिर की थी. उसी रात उन्हें मुंद्रा पोर्ट भेज दिया गया, जहां उनका पहला साल बिना किसी ऑफिस या डेस्क के ग्राउंड पर काम करते हुए बीता था. इसने उन्हें बेहतरीन अनुभव दिया.

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स्कूल में क्या सबक सीखे, बताया

अपने शुरुआती जीवन को याद करते हुए करण अदाणी ने बताया कि उन्होंने एक मिशनरी स्कूल में तीन साल बिताए, जहां उन्होंने अनुशासन, आत्मनिर्भरता और अलग अलग बैकग्राउंड के बच्चों के साथ घुलने-मिलने का महत्व सीखा. इन्हीं अनुभवों ने उनके व्यक्तित्व की नींव रखी.

फॉर्मूला-वन रेसिंग को बताया पसंद

स्पोर्ट्स के प्रति अपने इंट्रेस्ट के बारे में उन्होंने बताया कि सिंगापुर में दोस्तों ने उन्हें फॉर्मूला वन से रूबरू कराया था. वह इस खेल के कायल हैं, जहां एक-एक मिलीसेकंड मायने रखता है. हालांकि उन्होंने मुस्कुराते हुए कहा कि उनके पिता इसे एक महंगा शौक मानते हैं. भारत में फॉर्मूला वन की वापसी की संभावना पर उन्होंने कहा कि ऐसे वैश्विक खेल आयोजनों से देश को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान मिलती है. 

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(Disclaimer: New Delhi Television is a subsidiary of AMG Media Networks Limited, an Adani Group Company.)

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