2030 तक IT, BPO जैसी नौकरियां खत्म हो जाएंगी, इंडिया AI इम्पैक्ट समिट में टेक अरबपति की बड़ी भविष्यवाणी

भारतीय मूल के अमेरिकी उद्यमी और वेंचर कैपिटलिस्ट विनोद खोसला ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस को लेकर ऐसा बयान दिया है जिसने नौकरी की दुनिया को लेकर नई बहस छेड़ दी है. उनका दावा है कि 2030 तक IT और BPO जैसे जॉब्स खत्म हो जाएंगे.

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  • सिलिकॉन वैली के प्रमुख निवेशक विनोद खोसला ने इंडिया AI इम्पैक्ट समिट 2026 में एक बड़ी भविष्यवाणी की है.
  • उन्होंने चेतावनी दी कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस व्हाइट-कॉलर नौकरियों के बड़े हिस्से को खत्म कर सकता है.
  • उनका कहना है कि इसका सबसे अधिक असर आईटी सर्विसेज और बीपीओ जैसे सेक्टर पर पड़ेगा.
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भारतीय मूल के अमेरिकी उद्यमी और वेंचर कैपिटलिस्ट विनोद खोसला के आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस को लेकर दिए गए नए बयान ने नौकरी की दुनिया में नई बहस छेड़ दी है. उनका दावा है कि 2050 तक इंसानों को पारंपरिक नौकरियों की जरूरत ही नहीं पड़ सकती, क्योंकि AI इतनी तेजी से विकसित हो रहा है कि वह बड़े पैमाने पर रोजगार संरचना बदल देगा.

India AI Impact Summit 2026 में टेक अरबपति विनोद खोसला ने कहा कि आने वाले दशकों में काम करने का तरीका पूरी तरह बदल चुका होगा. उनके मुताबिक 2025 तक ही यह दिखने लगेगा कि पारंपरिक रोजगार मॉडल तेजी से टूट रहे हैं.उन्होंने चेतावनी दी कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस व्हाइट-कॉलर नौकरियों के बड़े हिस्से को खत्म कर सकता है. खास तौर पर आईटी सर्विसेज और बीपीओ जैसे सेक्टर पर सबसे ज्यादा असर पड़ेगा. उनका कहना है कि अगले पांच साल में यह उद्योग लगभग गायब हो सकते हैं और 2030 तक आउटसोर्सिंग इंडस्ट्री खत्म होने की कगार पर पहुंच सकती है.
खोसला ने कहा कि भारत में अब भी कई लोग मानते हैं कि AI आईटी सेक्टर पर बड़ा असर नहीं डालेगा, लेकिन तेज तकनीकी बदलाव उन उद्योगों को भी हिला देंगे जो दशकों से अर्थव्यवस्था की रीढ़ रहे हैं.

लंबे समय तक एक कंपनी में काम करने पर सवाल

उन्होंने लंबी अवधि तक एक ही कंपनी में काम करने की संस्कृति पर भी सवाल उठाए. उनके मुताबिक 15-20 साल तक किसी बड़ी कंपनी में टिके रहने से पेशेवरों की अनुकूलन क्षमता कम हो सकती है और बदलती टेक दुनिया में वे पिछड़ सकते हैं.

हालांकि चेतावनियों के बीच खोसला ने भारत की AI पहल की जमकर तारीफ की. उन्होंने कहा कि सम्मेलन बेहद सफल रहा और इसमें 3 लाख से ज्यादा लोगों ने रजिस्ट्रेशन कराया है. उन्होंने देश के हित में सॉवरेन एआई मॉडल विकसित करने की वकालत करते हुए कहा कि साइबर सुरक्षा और रक्षा जैसे संवेदनशील क्षेत्रों में देशों को विदेशी सिस्टम पर निर्भर नहीं रहना चाहिए. खोसला ने बताया कि उन्होंने भारत की AI महत्वाकांक्षा को मजबूत करने के लिए भारत के स्वदेशी AI सर्वम में निवेश भी किया है.

सिलिकॉन वैली के प्रमुख निवेशकों में शामिल हैं खोसला

खोसला टेक निवेशक के रूप में मशहूर हैं. वे सिलिकॉन वैली के प्रमुख निवेशकों में गिने जाते हैं. साथ ही लंबे समय से वे AI के भविष्य में प्रभाव को लेकर मुखर रहे हैं. उनका ताजा बयान दुनिया भर में नौकरी के बाजार के लिए खास चेतावनी है. जानकारों का मानना है कि अगर AI की प्रगति इसी रफ्तार से जारी रही, तो आने वाले दशकों में काम, कौशल और रोजगार की पूरी परिभाषा बदल सकती है.

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