राघव चड्ढा ने AI को बताया 21वीं सदी का नया ईंधन, बोले- प्रोसेसिंग पावर ही बनाएगी विश्वगुरु

आम आदमी पार्टी के सांसद राघव चड्ढा ने कहा कि एआई अब महज तकनीकी मुद्दा नहीं रहा है बल्कि एक रणनीतिक मुद्दा बन चुका है. जिन देशों के पास मजबूत कंप्यूटिंग क्षमता और इन्फ्रास्ट्रक्चर होगा, वो आने वाले वर्षों में अगुआ बन सकते हैं.

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आम आदमी पार्टी के सांसद राघव चड्ढा ने सोमवार को कहा कि इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट 2026 ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) और टेक्नोलोजी गवर्नेंस से संबंधित चर्चाओं को आकार देने में भारत को वैश्विक मानचित्र पर मजबूती से स्थापित कर दिया है. भारत मंडपम में आयोजित एआई समिट में अपने संबोधन में राघव चड्ढा ने कहा कि एआई गवर्नेंस, डेवलपमेंट और जनहित में इसके उपयोग को लेकर वैश्विक चर्चाओं में भारत की भूमिका लगातार महत्वपूर्ण होती जा रही है.

AI सिर्फ तकनीकी नहीं, रणनीतिक मुद्दा

उन्होंने कहा कि एआई अब महज तकनीकी मुद्दा नहीं रहा है बल्कि एक रणनीतिक मुद्दा बन चुका है. जिन देशों के पास मजबूत कंप्यूटिंग क्षमता और बुनियादी ढांचा है, वो आने वाले वर्षों में दुनिया पर हावी होने की संभावना रखते हैं. प्रोसेसिंग पावर और डिजिटल इन्फ्रास्ट्रक्चर ही तय करेगा कि एआई युग में कौन से देश नेतृत्व करेंगे.

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भारत को इन 3 क्षेत्रों में काम करने की जरूरत

उन्होंने कृत्रिम बुद्धिमत्ता के क्षेत्र में तीन वैश्विक एकाधिकारों की ओर भी इशारा किया. चड्ढा ने कहा कि एआई डिजाइन पर कुछ ही कंपनियों के हाथों में नियंत्रण है, उत्पादन सीमित क्षेत्रों में केंद्रित है और अमेरिका जैसी नीतियों के कारण निर्यात प्रतिबंधित है. भारत अभी तक इन तीनों क्षेत्रों पर कंट्रोल हासिल नहीं कर पाया है, लेकिन मानव संसाधन के मामले में भारत एक बड़ी ताकत है, इसमें कोई शक नहीं. 

सिर्फ टैलेंट पर्याप्त नहीं, इन्फ्रास्ट्रक्चर भी मिले

भारत में प्रतिभाओं की प्रचुरता पर जोर देते हुए राघव चड्ढा ने कहा कि ग्लोबल एआई प्रोफेशनल्स और कुशल कामगारों के मामले में दुनिया भारत की ओर देख रही है. हालांकि केवल प्रतिभा होना ही पर्याप्त नहीं है. वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धा करने के लिए भारत को उच्चस्तरीय कंप्यूटिंग संसाधनों तक पहुंच सुनिश्चित करनी होगी, आपूर्ति श्रृंखलाओं में विविधता लानी होगी और मजबूत घरेलू बुनियादी ढांचा तैयार करना होगा.

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ऐतिहासिक तुलना करते हुए राघव चड्ढा ने कहा कि जिस तरह 20वीं शताब्दी में तेल, गैस और इस्पात ने वैश्विक शक्ति को परिभाषित किया था, उसी तरह एआई और सेमीकंडक्टर निर्माण 21वीं शताब्दी में भू-राजनीतिक प्रभाव को आकार देंगे. इस नई वैश्विक व्यवस्था में अपना स्थान सुरक्षित करने के लिए भारत को निर्णायक कदम उठाने होंगे.

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