भारतीय जॉब मार्केट में AI का दबदबा, कोडिंग और बेसिक इंजीनियरिंग से ज्यादा AI एक्सपर्ट्स की मांग

रिपोर्ट में यह भी बताया गया कि संगठनों को उन्नत तकनीकी विशेषज्ञता के साथ-साथ जरूरी सॉफ्ट स्किल्स की भी कमी का सामना करना पड़ रहा है, जिससे स्किल मिसमैच की समस्या बढ़ रही है.

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  • भारत में एआई से जुड़ी कौशल की मांग पारंपरिक इंजीनियरिंग और आईटी क्षमताओं से अधिक हो गई है.
  • मैनपावरग्रुप की रिपोर्ट के अनुसार भारत में 82 प्रतिशत नियोक्ता 2026 तक कुशल प्रतिभा की कमी महसूस कर रहे हैं.
  • वैश्विक स्तर पर एआई साक्षरता और मॉडल डेवलपमेंट जैसी क्षमताएं सबसे दुर्लभ और मांग में हैं.
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भारत में पहली बार एआई (AI) से जुड़ी कौशल की मांग पारंपरिक इंजीनियरिंग और आईटी क्षमताओं से आगे निकल गई है. अब AI स्किल्स नियोक्ताओं के लिए सबसे मुश्किल कौशल बन गई हैं. शुक्रवार को जारी मैनपावरग्रुप की रिपोर्ट में यह जानकारी सामने आई है. रिपोर्ट के मुताबिक, भारत में 82 प्रतिशत नियोक्ताओं ने 2026 में कुशल प्रतिभा ढूंढने में कठिनाई की बात कही है. एआई साक्षरता और एआई मॉडल डेवलपमेंट जैसी क्षमताएं सबसे कठिन स्किल्स में शामिल हैं. पिछले साल की तुलना में टैलेंट की कमी का दबाव बढ़ा है और यह वैश्विक औसत 72 प्रतिशत से काफी अधिक है.

रिपोर्ट में कहा गया है कि दुनिया भर में जिन स्किल्स की सबसे ज्यादा कमी है, उनमें एआई साक्षरता, एआई मॉडल डेवलपमेंट, इंजीनियरिंग, सेल्स और मार्केटिंग तथा मैन्युफैक्चरिंग और प्रोडक्शन शामिल हैं. इससे साफ है कि एआई से जुड़ी क्षमताएं अब वैश्विक स्तर पर दुर्लभ हो गई हैं.

भारत टैलेंट की कमी वाले देशों में शीर्ष पर है. इस सूची में स्लोवाकिया (87 प्रतिशत), ग्रीस (84 प्रतिशत) और जापान (84 प्रतिशत) जैसे देश भी शामिल हैं. 41 देशों के 39,000 से अधिक नियोक्ताओं पर किए गए इस शोध में पाया गया कि वैश्विक स्तर पर भर्ती में थोड़ी राहत मिली है, जो 2025 में 74 प्रतिशत से घटकर 72 प्रतिशत है, लेकिन एआई कौशल को लेकर प्रतिस्पर्धा बहुत तेज हो गई है.

रिपोर्ट में यह भी बताया गया कि संगठनों को उन्नत तकनीकी विशेषज्ञता के साथ-साथ जरूरी सॉफ्ट स्किल्स की भी कमी का सामना करना पड़ रहा है, जिससे स्किल मिसमैच की समस्या बढ़ रही है. मैनपावरग्रुप इंडिया और मिडिल ईस्ट के मैनेजिंग डायरेक्टर संदीप गुलाटी ने कहा, "भारत में 82 प्रतिशत टैलेंट की कमी यह दिखाती है कि श्रम बाजार में यह बदलाव अस्थायी नहीं, बल्कि संरचनात्मक है."

रिपोर्ट के अनुसार, कंपनियां इस चुनौती से निपटने के लिए अलग-अलग रणनीतियां अपना रही हैं. करीब 37 प्रतिशत कंपनियां कर्मचारियों को अपस्किल और रीस्किल करने पर ध्यान दे रही हैं, 35 प्रतिशत नए टैलेंट पूल तलाश रही हैं, 26 प्रतिशत ने बेहतर कार्य समय की पेशकश की और 25 प्रतिशत ने लोकेशन फ्लेक्सिबिलिटी प्रदान की.

यह टैलेंट की कमी तकरीबन सभी उद्योगों में देखने को मिल रही है. सबसे ज्यादा दबाव ऑटोमोबाइल (94 प्रतिशत), सूचना एवं वित्त या बीमा (85 प्रतिशत), प्रोफेशनल, वैज्ञानिक और तकनीकी सेवाएं, निर्माण और रियल एस्टेट तथा टेक और आईटी सेवाओं (84 प्रतिशत) में है.

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