कतर में आठ भारतीयों की मौत की सजा कम होने के बाद परिजनों को अब माफी की उम्‍मीद

दोहा स्थित अल दहरा ग्लोबल टेक्नोलॉजीज के साथ काम करने वाले लोगों को पिछले साल अगस्त में गिरफ्तार किया था. इन पर इजरायल के लिए जासूसी करने का आरोप है.

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इन आठों भारतीयों को पिछले साल अगस्त में गिरफ्तार किया गया था. (प्रतीकात्‍मक)
नई दिल्‍ली:

कतर (Qatar) में कथित जासूसी के आरोप में फांसी की सजा पाए नौसेना के 8 पूर्व कर्मियों को आज बड़ी राहत मिली है और कोर्ट ने फांसी की सजा को रोक दिया है. ऐसे में नौसेना के इन पूर्व कर्मियों के परिवारों ने एनडीटीवी से कहा कि वे अब इस सजा के खिलाफ अपील करेंगे. इन आठ लोगों को इजरायल के लिए जासूसी के आरोप में अक्टूबर में मौत की सजा सुनाई गई थी. भारत सरकार के हस्तक्षेप के बाद आज उनकी मौत की सजा कम कर दी गई. अब उन्हें जेल की सजा का सामना करना पड़ेगा.

नौसेना के पूर्व कर्मियों के परिवारों ने जासूसी के आरोपों से इनकार किया है. उन्होंने एनडीटीवी से यह भी कहा है कि वे तुरंत अपील दायर करेंगे. इस प्रक्रिया में तीन महीने लग सकते हैं. सूत्रों ने एनडीटीवी को बताया कि अमीर की ओर से शाही माफी की कोई भी संभावना अपील के नतीजे के बाद ही हो सकती है. 

दोहा स्थित अल दहरा ग्लोबल टेक्नोलॉजीज के साथ काम करने वाले लोगों को पिछले साल अगस्त में गिरफ्तार किया था. इनमें पूर्णेंदु तिवारी, सुगुनाकर पकाला, अमित नागपाल और संजीव गुप्ता कमांडर हैं. वहीं नवतेज सिंह गिल, बीरेंद्र कुमार वर्मा और सौरभ वशिष्ठ कैप्टन हैं.  आठवां शख्‍स रागेश गोपकुमार है. 

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उनके खिलाफ आरोपों के विवरण को सार्वजनिक नहीं किया गया है. आज उनकी मौत की सजा को कम कर दिया गया. यह फैसला प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की कतर के शासक शेख तमीम बिन हमद अल थानी के साथ मुलाकात के कुछ ही हफ्तों के बाद आया है. कम की गई सजा का विवरण भी फिलहाल स्‍पष्‍ट नहीं किया गया है. फैसले को अभी रिलीज नहीं किया गया है. 

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विदेश मंत्रालय ने कहा, "इस मामले की कार्यवाही की गोपनीय और संवेदनशील प्रकृति के कारण इस वक्‍त किसी भी तरह की टिप्‍पणी उचित नहीं होगी." सरकार ने कहा कि वह इस मामले में कानूनी टीम के साथ ही परिवार के सदस्‍यों के भी निकट संपर्क में है. 

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मंत्रालय ने कहा, "हम शुरू से ही उनके साथ खड़े हैं और हम कांसुलर और कानूनी सहायता देना जारी रखेंगे. हम कतर के अधिकारियों के साथ भी इस मामले को उठाना जारी रखेंगे."

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कतर के विदेश मंत्री डॉ. खालिद बिन मोहम्मद अल अत्तियाह की भारत यात्रा के दौरान हुई संधि के तहत कतर में दोषी ठहराए गए भारतीय कैदियों को उनकी सजा की शेष अवधि काटने के लिए भारत लाया जा सकता है. वहीं भारत में दोषी ठहराए गए कतर के नागरिकों को सजा काटने के लिए उनके गृह देश भेजा जा सकता है. 

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