- मोदी सरकार ने 2016 में काला धन समाप्त करने के उद्देश्य से 500 और 1000 रुपए के पुराने नोट बंद किए थे.
- बॉम्बे हाई कोर्ट की नागपुर बेंच ने RBI को नोटबंदी के पुराने 500 रुपए के नोट बदलने का आदेश दिया है.
- 2016 में गिरीश मलानी के पास से 2 लाख रुपये के पुराने नोट पुलिस ने जब्त किए थे, जो वैध पाए गए.
नोटबंदी के 10 साल बीत चुके है. 2016 में मोदी सरकार ने काला धन समाप्त करने के मकसद से 500 और 1000 रुपए के पुराने नोट बंद कर दिए थे. अब सरकार की ओर से पुराने नोट को बदलने की समयसीमा दी गई थी. जो बाद में कई बार बढ़ी, इससे लोगों ने अपने पास मौजूद पुराने नोट बदलकर नए नोट. लेकिन आपको जानकर हैरानी होगी कि हाई कोर्ट ने नोटबंदी के 10 साल बाद रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) को 500-500 रुपए के पुराने नोट बदलने का आदेश दिया है.
बॉम्बे हाई कोर्ट ने RBI को दिया नोट बदलने का आदेश
यह रोचक मामला सामने आया है महाराष्ट्र से. जहां बॉम्बे हाई कोर्ट की नागपुर बेंच ने भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) को एक महत्वपूर्ण आदेश देते हुए नोटबंदी के दौरान जब्त किए गए 2 लाख रुपये के पुराने नोटों को बदलने का निर्देश दिया है. कोर्ट ने कहा है कि याचिकाकर्ता गिरीश मलानी के पास मौजूद 500 रुपये के इन पुराने नोटों के बदले नई मुद्रा जारी की जाए.
जानिए क्या है पूरा मामला?
यह मामला साल 2016 में नोटबंदी के समय का है. 1 दिसंबर 2016 को जब गिरीश मलानी माहूर जा रहे थे, तब नगर पालिका चुनावों के मद्देनजर पुलिस ने उनके पास से 500 रुपये के 400 नोट (कुल 2 लाख रुपये) जब्त किए थे. पुलिस ने यह कार्रवाई नोट बदलने की अंतिम समय सीमा खत्म होने से पहले की थी.
आयकर विभाग ने दी थी क्लीन चिट
जब्ती के बाद आयकर विभाग ने इस रकम की जांच की और पाया कि यह पैसा पूरी तरह वैध है. हालांकि, जब तक विभाग ने इस राशि को हरी झंडी दी, तब तक पुराने नोटों को बदलने की सरकारी समय सीमा समाप्त हो चुकी थी. इसके बाद मलानी ने आरबीआई से नोट बदलने का अनुरोध किया था, जिसे बैंक ने खारिज कर दिया था.
अदालत का फैसला
न्यायमूर्ति उर्मिला जोशी-फाल्के और न्यायमूर्ति निवेदिता मेहता की खंडपीठ ने इस मामले की सुनवाई करते हुए स्पष्ट किया कि नोट बदलने की अवधि समाप्त होने तक यह राशि पुलिस की कस्टडी में थी, इसलिए इसके लिए गिरीश मलानी को दोषी नहीं ठहराया जा सकता.
अदालत ने कहा कि चूंकि पैसा वैध पाया गया है, इसलिए याचिकाकर्ता को उसकी मेहनत की कमाई से वंचित नहीं रखा जा सकता. इसी के आधार पर हाई कोर्ट ने आरबीआई को कानूनी प्रक्रिया पूरी कर नई करेंसी जारी करने का आदेश दिया.
नागपुर से प्रवीण मुढोलकर की रिपोर्ट













