बूस्टर डोज को लेकर लोगों में क्यों नहीं दिख रहा उत्साह? अदार पूनावाला ने बताई वजह

देशभर में कोरोना महामारी ने कितनी तबाही मचाई, इससे सभी लोग वाकिफ है. ऐसे में कोरोना की वैक्सीन को इस महामारी के खिलाफ बड़ा हथियार माना जा रहा है. भारत में बूस्टर डोज लगवाने में लोग ज्यादा दिलचस्पी नहीं ले रहे हैं. अब इस बारे में खुद सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया के प्रमुख अदार पूनावाला ने अपनी राय रखी.

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बूस्टर डोज में लोगों की दिलचस्पी नहीं
नई दिल्ली:

कोविड महामारी ने दुनिया समेत भारत में जमकर तबाही मचाई. सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया के प्रमुख अदार पूनावाला ने एनडीटीवी को बताया कि अब चीजें बेहतर हो सकती हैं, " हालांकि हम अभी इससे पूरी तरह उबरे नहीं हैं". ऐसे में बूस्टर डोज की जरूरत जरूर होगी. इसलिए कम से कम एक बार बूस्टर डोज जरूर लगवाए.

सीरम इंस्टीट्यूट (एसआईआई) ने भारत में कोविशील्ड वैक्सीन का उत्पादन किया है. पूनावाला ने कहा कि एसआईआई द्वारा निर्मित कोवावैक्स भी 12 वर्ष से अधिक उम्र के सभी लोगों के लिए उपलब्ध होगी. पूनावाला ने कहा कि किसी को "कोविड के बारे में बहुत जल्दी आत्मसंतुष्ट" नहीं होना चाहिए. वैक्सीन के प्रति उत्साह कम होने से बूस्टर डोज लगवाने में ज्यादा दिलचस्पी नहीं ले रहे हैं.

इसके साथ ही उन्होंने कहा कि इस वर्ष कम से कम एक बार लोगों को बूस्टर देना महत्वपूर्ण है क्योंकि बूस्टर से लंबे वक्त तक सुरक्षा मिलती है. केंद्र बूस्टर शॉट्स के अंतर को नौ से छह महीने तक कम करने पर विचार कर रहा है. उन्होंने कहा कि घोषणा अगले कुछ हफ्तों में की जा सकती है. कमजोर लोगों के लिए 6 महीने में बूस्टर दिया जाना चाहिए."

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यह पूछे जाने पर कि नए वेरिएंट के खिलाफ नया टीका बनाने में कितना समय लगेगा. पूनावाला ने कहा कि यदि यह ओमाइक्रोन विशिष्ट है, तो इसे तीन महीने में लाया जा सकता है, क्योंकि इस पर काम पहले ही शुरू हो चुका है. "एक नए वेरिएंट के लिए, हमें एक नए टीके को स्वीकृत करने में छह से सात महीने की आवश्यकता है."

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