- अदाणी ग्रुप के चिंतन रिसर्च फाउंडेशन ने भारत-अफ्रीका साझेदारी पर एक सम्मेलन का आयोजन किया
- भारत-अफ्रीका के बीच द्विपक्षीय व्यापार लगभग 100 बिलियन डॉलर है, जिसे 500 बिलियन डॉलर तक बढ़ाया जा सकता है
- अफ्रीकी देश भारत के साथ आर्थिक और राजनीतिक संबंध बढ़ाने के इच्छुक हैं. कई नेता मई में भारत आ सकते हैं.
अदाणी ग्रुप के चिंतन रिसर्च फाउंडेशन ने सोमवार को एक सम्मेलन का आयोजन किया. जिसका विषय था "बदलते वैश्विक क्रम में भारत-अफ्रीका साझेदारी". इस सम्मेलन में संभावनाओं पर चर्चा की गई कि इससे भारत को क्या फायदा होगा. इस बारे में सीआरएफ के अध्यक्ष शिशिर प्रियदर्शी ने एनडीटीवी को बताया.
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व्यापार को 500 बिलियन डॉलर तक बढ़ाने का लक्ष्य
सीआरएफ के अध्यक्ष शिशिर प्रियदर्शी ने बताया कि अफ्रीका के 51 देश और भारत के बीच अभी द्विपक्षीय व्यापार सिर्फ करीब 100 बिलियन डॉलर के आसपास है. आकलन ये है कि भारत और अफ्रीकी देशों के बीच इस व्यापार को मौजूदा 100 बिलियन डॉलर से बढ़ाकर 500 बिलियन डॉलर तक करना संभव है.
टेक्नोलॉजिकल रिवॉल्यूशन को मिस नहीं करना चाहते
दक्षिण अफ्रीका के राजदूत ने चिंतन रिसर्च फाउंडेशन की कॉन्फ्रेंस में कहा कि अफ्रीका ने इंडस्ट्रियल रिवॉल्यूशन को मिस किया, लेकिन हम टेक्नोलॉजिकल रिवॉल्यूशन को मिस नहीं करना चाहते. शिशिर प्रियदर्शी ने कहा कि अफ्रीकी देश भी भारत के साथ आर्थिक और राजनीतिक संबंध बढ़ाना चाहते हैं. संभव है कि मई महीने में कई अफ्रीकी देशों के बड़े नेता भारत की यात्रा पर दिल्ली पहुंचें.
अफ्रीका एक बड़ा मैन्युफैक्चरिंग हब
उन्होंने कहा कि हमें अफ्रीकी देशों के साथ आर्थिक और डिप्लोमेटिक संबंध बढ़ाने के दौरान यूरोपीय यूनियन (EU) और अमेरिका के मुकाबले एक नई रणनीति अपनानी होगी. हमें अफ्रीका को एक बड़े मैन्युफैक्चरिंग हब के तौर पर देखना होगा
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