बस दिल में ये जिद थी, मुकद्दर बदलना है... APSEZ की नई उपलब्धि को गौतम अदाणी ने बताया असाधारण पल

अदाणी ग्रुप के चेयरमैन गौतम अदाणी ने कहा कि APSEZ का 500 मिलियन टन कार्गो हैंडलिंग की उपलब्धि महज एक आंकड़ा नहीं है, ये एक विरासत का नया मुकाम है.

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अदाणी पोर्ट्स एंड स्पेशल इकोनॉमिक जोन (APSEZ) लिमिटेड ने ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल करते हुए 500 मिलियन टन कार्गो हैंडलिंग का मुकाम हासिल कर लिया है. इस मौके पर अदाणी ग्रुप के चेयरमैन गौतम अदाणी ने अपने सफर को याद करते हुए इसे एक असाधारण पल बताया. उन्होंने कहा कि एक एक्सप्लोरर (खोजकर्ता) की जिंदगी में कोई आखिरी पड़ाव नहीं होता, केवल ठहराव के पल होते हैं. जहां से पलटकर देखने पर हम अपने सफर को आगे बढ़ाने की ताकत हासिल करते हैं. आज ऐसा ही पल है. 

गौतम अदाणी ने कहा कि APSEZ का 500 मिलियन टन कार्गो हैंडलिंग की उपलब्धि महज आंकड़ों तक सीमित नहीं है. यह एक विरासत का नया मुकाम है. नंबर तो महज परफॉर्मेंस को मापते हैं, लेकिन विरासत विजन और विश्वास के साथ उस लक्ष्य को हासिल करने का जज्बा प्रदान करती है, जिसके बारे में किसी दूसरे ने सोचा तक नहीं होता है. उन्होंने कहा कि अदाणी ग्रुप का हर बिजनेस नई ऊंचाइया छू रहा है. नए रिकॉर्ड हासिल किए जा रहे हैं, नए टारगेट तय हो रहे हैं. लेकिन APSEZ का सफर उनके लिए बेहद निजी और दिल के करीब है.

पुरानी यादों को साझा करते हुए गौतम अदाणी ने कहा कि जब मैं पीछे मुड़कर देखता हूं तो एक सवाल मेरे जेहन में आता है- इतना लंबा सफर हमने कैसे तय किया? कोई भी महान संगठन दो स्तरों पर आकार लेता है, पहला- मन में उम्मीद और आत्मविश्वास के साथ एक सपने के रूप में. दूसरा, असल दुनिया में जहां वो सपना पल-पल बढ़ते हुए साकार होता है. यही वजह है कि आज की इस उपलब्धि को बिजनेस के आंकड़ों में नहीं मापा जा सकता. मेरे लिए यह उपलब्धि उन लोगों के प्रति एक सम्मान है, जिन्होंने हमारे ऊपर भरोसा किया और साथ मिलकर इसे यहां तक पहुंचाया.

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गौतम अदाणी ने इन शब्दों के साथ अपने हौसले और हिम्मत की कहानी को बयां किया- वो रातें, वो यार का साथ, अंधेरे में भी थमी नहीं, हमारे सपनों की बात. थककर रुकना तो हमारी फितरत में न था, बस दिल में एक ही जिद थी, मुकद्दर बदलना था. 

उन्होंने कहा कि मुंद्रा ने हमें एक विजन प्रदान किया. मुंद्रा ही था, जिसने हमारे सपनों को सच किया, और उन्हें मजबूती प्रदान की. उन्होंने 90 के दशक के एक पुराने किस्से का जिक्र करते हुए बताया कि किस तरह वो एक पूरानी कॉन्टेसा कार में पूरी रात ड्राइविंग करके अहमदाबाद से मुंद्रा पहुंचे थे. उस समय वहां सड़कें तक नहीं थीं, जो थीं वो भी ऊबड़खाबड़. उन्होंने मजाकिया लहजे में बताया कि किस तरह मलय भाई उन्हें जगाए रखने के लिए गाने गाया करते थे.

गौतम अदाणी ने कहा कि मुंद्रा में ही उनके सपने हकीकत में बदले और उनकी धारणाओं को ठोस आकार मिला. उस वक्त उनकी उम्र ज्यादा नहीं थी, लेकिन उत्साह इतना था कि जोखिमों की परवाह नहीं होती थी. नाकामयाबियां आपको असंभव को संभव करने का जज्बा प्रदान करती हैं. 

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(Disclaimer: New Delhi Television is a subsidiary of AMG Media Networks Limited, an Adani Group Company.)

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