AI शिखर सम्मेलन पर युवा कांग्रेस के प्रदर्शन की देशभर के शिक्षाविदों ने की निंदा, जान लीजिए किसने क्या कहा

शिक्षाविदों ने स्पष्ट किया कि यह सम्मेलन न तो किसी राजनीतिक दल का मंच था और न ही घरेलू राजनीति के प्रदर्शन के लिए उपयुक्त स्थान. यह एक अंतरराष्ट्रीय आयोजन था, जहां भारत अपनी तकनीकी क्षमताओं, रणनीतिक दृष्टि और भविष्य की संभावनाओं को वैश्विक निवेशकों और नीति निर्माताओं के समक्ष प्रस्तुत कर रहा था.

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देशभर के प्रमुख विश्वविद्यालयों और शोध संस्थानों से जुड़े सौ से अधिक प्रतिष्ठित शिक्षाविदों ने इंडिया AI इम्पैक्ट समिट के दौरान भारतीय युवा कांग्रेस द्वारा किए गए प्रदर्शन की कड़ी आलोचना करते हुए एक संयुक्त बयान जारी किया है. शिक्षाविदों ने इस प्रदर्शन को “दुर्भाग्यपूर्ण”, “अविवेकपूर्ण” और भारत की वैश्विक तकनीकी छवि को नुकसान पहुंचाने वाला बताया है. 

21 फरवरी को जारी इस बयान में कहा गया है कि इंडिया AI इम्पैक्ट समिट भारत के लिए एक “निर्णायक राष्ट्रीय और सभ्यतागत क्षण” था, जहाँ देश ने चौथी औद्योगिक क्रांति के युग में एक संप्रभु और गंभीर तकनीकी शक्ति के रूप में अपनी स्थिति दुनिया के सामने रखी. बयान में यह भी कहा गया है कि कांग्रेस नेता राहुल गांधी से जुड़े इस विरोध प्रदर्शन ने भारत की उस अंतरराष्ट्रीय साख को चोट पहुँचाने का जोखिम पैदा किया, जिसे वर्षों की रणनीतिक मेहनत से तैयार किया गया है. 

शिक्षाविदों ने स्पष्ट किया कि यह सम्मेलन न तो किसी राजनीतिक दल का मंच था और न ही घरेलू राजनीति के प्रदर्शन के लिए उपयुक्त स्थान. यह एक अंतरराष्ट्रीय आयोजन था, जहां भारत अपनी तकनीकी क्षमताओं, रणनीतिक दृष्टि और भविष्य की संभावनाओं को वैश्विक निवेशकों और नीति निर्माताओं के समक्ष प्रस्तुत कर रहा था. बयान में कहा गया कि ऐसे अवसर को राजनीतिक प्रदर्शन में बदलना विवेकहीनता दर्शाता है और लोकतांत्रिक असहमति तथा राष्ट्रीय प्रतिष्ठा के बीच अंतर न समझ पाने को उजागर करता है. 

संयुक्त बयान में सम्मेलन की व्यापकता और उपलब्धियों का उल्लेख करते हुए कहा गया कि इसमें 644 AI तकनीकों का प्रदर्शन किया गया. कार्यक्रम में वैश्विक तकनीकी कंपनियों के 41 सीईओ व्यक्तिगत रूप से उपस्थित रहे, जबकि 37 देशों के 326 प्रदर्शकों ने भाग लिया. सम्मेलन में लगभग 5 लाख दर्शकों की उपस्थिति दर्ज की गई और 250 अरब डॉलर के निवेश प्रस्ताव सामने आए, जो भारत के AI भविष्य में वैश्विक भरोसे को दर्शाते हैं. 

शिक्षाविदों ने विशेष रूप से तीन स्वदेशी लार्ज लैंग्वेज मॉडल (LLM) के अनावरण को ऐतिहासिक बताया. उनके अनुसार, यह इस बात का संकेत है कि भारत अब केवल वैश्विक तकनीक अपनाने वाला देश नहीं रहा, बल्कि स्वयं मूलभूत AI ढांचे विकसित कर रहा है. स्टैनफोर्ड विश्वविद्यालय के 2025 ग्लोबल AI वाइब्रेंसी इंडेक्स का हवाला देते हुए बयान में कहा गया कि भारत अब AI के क्षेत्र में दुनिया में तीसरे स्थान पर है और ऐसा करने वाला पहला ग्लोबल साउथ देश है. 

बयान में यह भी चिंता जताई गई कि ऐसे समय में, जब चीन और पाकिस्तान जैसे देश सम्मेलन की महत्ता को कम करके दिखाने की कोशिश कर रहे थे, किसी भी घरेलू राजनीतिक गतिविधि का ऐसा स्वरूप भारत-विरोधी कथाओं को मजबूती दे सकता है. शिक्षाविदों ने जोर देकर कहा कि भारत की AI प्रगति वैज्ञानिकों, इंजीनियरों, उद्यमियों, विश्वविद्यालयों और नीति-निर्माताओं की सामूहिक उपलब्धि है. 

इस संयुक्त बयान पर देश के कई विश्वविद्यालयों के कुलपतियों, पूर्व कुलपतियों, IIT और केंद्रीय विश्वविद्यालयों के प्रोफेसरों, शोधकर्ताओं और विद्वानों ने हस्ताक्षर किए हैं. शिक्षाविदों ने निष्कर्ष में कहा कि इंडिया AI इम्पैक्ट समिट को भारत के तकनीकी इतिहास के एक महत्वपूर्ण मील के पत्थर के रूप में याद किया जाएगा और ऐसे वैश्विक मंचों पर राष्ट्रीय हित को सर्वोपरि रखा जाना चाहिए.

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