'अभिमन्यु' प्रयोगः मध्य प्रदेश के अस्पतालो में बनाए जाएंगे ‘गर्भ संस्कार कक्ष’

‘गर्भ संस्कार’ का अर्थ होता है-गर्भ में ही शिशु को संस्कारित करना. एक्‍सपर्ट का मानना है कि भारत की यह प्राचीन प्रक्रिया किसी गर्भवती महिला के विचारों, आहार और व्यवहार के माध्यम से उसके गर्भस्थ शिशु का शारीरिक और मानसिक विकास सुनिश्चित करती है.

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  • CM मोहन यादव सरकार का गर्भ संस्कार को बढ़ावा देने के लिए सविश्वविद्यालयों में पढ़ाई अनिवार्य करने का निर्णय
  • गर्भ संस्कार का उद्देश्य गर्भ में ही बच्चे को शारीरिक, मानसिक और नैतिक रूप से सशक्त बनाना है
  • CM मोहन यादव ने अभिमन्यु और अष्टावक्र की पौराणिक कथाओं का हवाला देते हुए गर्भ संस्कार की महत्ता पर बल दिया
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नई दिल्‍ली:

महाभारत के महानायक अर्जुन और सुभद्रा के पुत्र अभिमन्यु ने मां के गर्भ में ही चक्रव्‍यू को कैसे तोड़ा जाए, ये सीख लिया था. कुछ ऐसा ही प्रयोग अब मध्‍य प्रदेश की मोहन यादव सरकार करने जा रही है, जिसे 'गर्भ संस्‍कार' नाम दिया गया है. इसके तहत बच्‍चों को मां के गर्भ में ही ऐसे संस्‍कार दिये जाएंगे, जिससे वह एक अच्‍छा इंसान बन सके. 'गर्भ संस्कार' को आने वाली पीढ़ियों के सशक्तीकरण का माध्यम करार देते हुए मुख्यमंत्री मोहन यादव ने रविवार को घोषणा की कि सूबे के सभी विश्वविद्यालयों में ‘गर्भ संस्कार' की पढ़ाई कराई जाएगी और सरकारी अस्पतालों में ‘गर्भ संस्कार कक्ष' भी बनाए जाएंगे.

क्‍या होगा है ‘गर्भ संस्कार'

‘गर्भ संस्कार' का अर्थ होता है-गर्भ में ही शिशु को संस्कारित करना. एक्‍सपर्ट का मानना है कि भारत की यह प्राचीन प्रक्रिया किसी गर्भवती महिला के विचारों, आहार और व्यवहार के माध्यम से उसके गर्भस्थ शिशु का शारीरिक और मानसिक विकास सुनिश्चित करती है. इसीलिए कहा जाता है कि गर्भवती स्‍त्री को हमेशा खुश रखना चाहिए. उसके आसपास अच्‍छा माहौल बनाए रखना चाहिए. गर्भवती स्‍त्री के कमरे में ऐसे फोटो लगाने चाहिए, जिससे उसके मन में अच्‍छे विचार आएं. 

अभिमन्यु और अष्टावक्र की पौराणिक कथाओं का हवाला

मुख्यमंत्री यादव इंदौर में ‘गर्भ संस्कार' को बढ़ावा देने वाली पहल 'दिव्य संतान प्रकल्प' के कार्यक्रम में शामिल हुए. उन्होंने 'गर्भ संस्कार' पर केंद्रित एक पुस्तक का विमोचन भी किया. मुख्यमंत्री ने अभिमन्यु और अष्टावक्र की पौराणिक कथाओं का हवाला देते हुए कहा कि सनातन संस्कृति में ‘गर्भ संस्कार' का हमेशा से विशेष महत्व रहा है और इस प्रक्रिया से भावी पीढ़ियों को शारीरिक, मानसिक और नैतिक रूप से सशक्त बनाया जा सकता है.

गर्भ संस्कार का महत्व

सीएम यादव ने बताया, 'खासकर एलोपैथी के विशेषज्ञ भी अब गर्भ संस्कार का महत्व स्वीकार कर रहे हैं. मेरी बेटी खुद स्त्री रोग विशेषज्ञ है और वह भी अपने अस्पताल में गर्भ संस्कार कराती है.' उन्होंने बताया कि राज्य सरकार ‘गर्भ संस्कार' को संस्थागत रूप देने की दिशा में आगे बढ़ रही है. मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश के सभी चिकित्सा विश्वविद्यालयों में ‘गर्भ संस्कार' के अध्ययन की व्यवस्था की जाएगी और शीघ्र ही इस बारे में राजपत्र में अधिसूचना जारी की जाएगी. सीएम यादव ने कहा कि भविष्य में आयुष और एलोपैथी पद्धति के शासकीय चिकित्सालयों में ‘गर्भ संस्कार कक्ष' भी बनाए जाएंगे.

'गर्भ संस्कार' के विषय पर गंभीरता से अध्ययन जरूरी

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के वरिष्ठ नेता सुरेश भैयाजी जोशी ने कार्यक्रम में कहा कि खासकर युवा दम्पतियों को 'गर्भ संस्कार' के विषय पर गंभीरता के साथ अध्ययन करना चाहिए. उन्होंने जोर देकर कहा, 'गर्भ संस्कार को लेकर व्यापक जन जागरूकता अभियान चलाया जाना चाहिए, ताकि लोग इसे आचरण के स्तर पर अपना सकें.' हिंदू आध्यात्मिक एवं सेवा फाउंडेशन (एचएसएसएफ) नामक संगठन से जुड़ीं डॉ. संध्या एस. चौकसे ने बताया कि कार्यक्रम में 101 दम्पति भी शामिल हुए जो आने वाले दिनों में 'गर्भ संस्कार' की प्रक्रिया अपनाकर संतान को जन्म देना चाहते हैं.

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