केजरीवाल को लग गई थी बगावत की भनक, राज्यसभा सांसदों को रोकने की कोशिश भी की लेकिन तब तक खेला हो चुका था

दिलचस्प बात यह है कि जिस दिन यह सियासी हलचल तेज हुई, उसी दिन केजरीवाल अपने नए सरकारी आवास में शिफ्ट हुए.राज्यसभा में इस टूट से AAP की ताकत पर असर पड़ना तय है, वहीं बीजेपी को संसद के उच्च सदन में संख्यात्मक बढ़त मिल सकती है.

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राघव चड्ढा बीजेपी में हुए शामिल, केजरीवाल को लग गई थी भनक
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  • आम आदमी पार्टी के सात राज्यसभा सांसदों ने बगावत कर भाजपा का दामन थाम लिया है, जिससे पार्टी में हलचल मची है
  • राघव चड्ढा के उपनेता पद से हटाए जाने के बाद इन सांसदों ने तेजी से भाजपा में शामिल होने की तैयारी शुरू कर दी थी
  • राज्यसभा में इस टूट से आम आदमी पार्टी की ताकत कमजोर होगी और भाजपा को संख्यात्मक बढ़त मिलने की संभावना है
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नई दिल्ली:

आम आदमी पार्टी (AAP) के सात राज्यसभा सांसदों ने बगावत कर भारतीय जनता पार्टी (BJP) का दामन थाम लिया है.सूत्रों के मुताबिक, बगावत की आहट अरविंद केजरीवाल को पहले मिल भी थी. उन्होंने बुधवार को ही नाराज सांसदों को फोन कर अगले कुछ दिनों में मिलने के लिए बुलाया था. उनसे शुक्रवार को मिलने की बात कही गई थी. केजरीवाल को शुक्रवार शाम तक इन नाराज सांसदों से मिलकर बात करनी थी लेकिन इससे पहले कि वो ऐसा कर बाते इन सांसदों ने AAP छोड़ने का ऐलान कर दिया. बताया जा रहा है कि केजरीवाल ने इन सांसदों से ये भी कहा था कि यदि किसी तरह का दबाव है तो वे सभी इस्तीफा दे सकते हैं. ऐसा करने पर उन्हें पार्टी की तरफ से भविष्य में उन्हें दोबारा राज्यसभा में मौका दिया जाएगा. हालांकि, अंदरखाने यह लगभग तय हो चुका था कि ये सांसद बीजेपी में शामिल होने वाले हैं. 

इस पूरे घटनाक्रम के केंद्र में राघव चड्ढा बताए जा रहे हैं, जिन्हें हाल ही में राज्यसभा में पार्टी के उपनेता पद से हटाया गया था. इसी के बाद उन्होंने तेजी से अन्य सांसदों से संपर्क साधना शुरू किया और समर्थन जुटाया.बागी सांसदों में संगठन से उभरकर आए नेता जैसे संदीप पाठक और स्वाति मालीवाल के साथ-साथ कारोबारी पृष्ठभूमि वाले नाम अशोक मित्तल, विक्रमजीत साहनी और राजेंद्र गुप्ता भी शामिल हैं. पूर्व क्रिकेटर हरभजन सिंह, जो राजनीति में अपेक्षाकृत कम सक्रिय रहे, उन्होंने भी इस गुट का साथ दिया. 

पंजाब के सीएम भगवंत मान ने भी आज प्रेस कॉन्फ़्रेंस में कहा कि, जब उन्होंने हरभजन को फ़ोन किया तो उन्होंने कॉल नहीं उठाया.सूत्र बताते हैं कि यह “ऑपरेशन” पिछले दो हफ्तों से चल रहा था, लेकिन चड्ढा को पद से हटाए जाने के बाद इसमें तेजी आ गई. पहले यह योजना बाद के महीनों के लिए थी, लेकिन हालिया घटनाओं ने इसे समय से पहले अंजाम तक पहुंचा दिया.

AAP की ताकत पर पड़ेगा असर

दिलचस्प बात यह है कि जिस दिन यह सियासी हलचल तेज हुई, उसी दिन केजरीवाल अपने नए सरकारी आवास में शिफ्ट हुए.राज्यसभा में इस टूट से AAP की ताकत पर असर पड़ना तय है, वहीं बीजेपी को संसद के उच्च सदन में संख्यात्मक बढ़त मिल सकती है. राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इन नेताओं का इस्तेमाल बीजेपी खासतौर पर पंजाब में AAP सरकार को घेरने के लिए कर सकती है, जहां अगले साल विधानसभा चुनाव होने हैं.आम आदमी पार्टी ने इन सांसदो को गद्दार भी कहा है और पार्टी के संयोजक अरविंद केजरीवाल ने ट्वीट कर कहा कि, इन संसदों ने पंजाब की जनता को धोखा दिया है. इस बीच राज्यसभा में पार्टी के नेता संजय सिंह ने कहा है कि वह राज्यसभा के स्पीकर को पत्र लिखकर राघव चड्ढा, संदीप पाठक और अशोक मित्तल को अयोग्य करने की मांग करेंगे.

राज्यसभा में बढ़ेगी बीजेपी की ताकत

कहा जा रहा है कि बीजेपी आलाकमान से सिग्नल मिलते ही राघव चड्ढा ने संदीप पाठक और अशोक मित्तल के साथ पहले राज्यसभा के सभापति को पत्र सौंपा, मीडिया के सामने आए और फिर बीजेपी अध्यक्ष से मुलाकात की. दिल्ली में होकर भी विक्रमजीत साहनी घर पर रुके रहे. राजेंद्र गुप्ता की इलाज के लिए विदेश में हैं. स्वाति मालीवाल पूर्वोत्तर भ्रमण पर गई हैं और हरभजन आईपीएल में व्यस्त हैं. बहरहाल, राज्यसभा में अपनी ताक़त बढ़ाने के अलावा बीजेपी इन सांसदों का इस्तेमाल पंजाब की भगवंत मान सरकार को घेरने  और अरविंद केजरीवाल पर निशाना साधने के लिए करेगी. कयास यह लगाए जा रहे हैं कि सात सांसदों के गुट में से एक वरिष्ठ नेता को मोदी मंत्रिमंडल में जगह मिल सकती है.

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