AAP के 7 सांसदों के पाला बदलने से बदलेगा राज्यसभा का गणित, BJP कैसे केजरीवाल की टेंशन बढ़ाएगी

आम आदमी पार्टी को यह बड़ा झटका लगा है. अभी तक राज्य सभा में 10 सांसदों के साथ वह बीजेपी, कांग्रेस और तृणमूल कांग्रेस के बाद चौथे नंबर पर थी. चौथी सबसे बड़ी पार्टी होने के नाते उसके सांसदों को बोलने के लिए अधिक समय मिलता था. लेकिन 7 सांसदों के टूटने से अब उसकी संख्या घट कर केवल 3 रह जाएगी.

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आम आदमी पार्टी के 7 राज्य सभा सांसदों के बीजेपी में शामिल होने का असर केवल पंजाब में ही नहीं, बल्कि राज्य सभा में भी होगा. जैसे ही राज्य सभा के सभापति आम आदमी पार्टी के 7 सांसदों के गुट को बीजेपी में विलय को मंजूरी देंगे, इससे बीजेपी के सांसदों की संख्या वर्तमान 106 से बढ़ कर 113 हो जाएगी. इस तरह बीजेपी अपने बूते राज्य सभा में बहुमत के जादुई आंकड़े से केवल 10 दूर रह जाएगी.

वर्तमान में राज्य सभा की संख्या 244 है और बहुमत का आंकड़ा 123 है. वहीं, सहयोगी दलों के साथ वह दो-तिहाई बहुमत के करीब पहुंच जाएगी. इस साल जून और नवंबर में होने वाले राज्य सभा चुनावों में भी पार्टी की ताकत बढ़ने की संभावना है. इस तरह बीजेपी अपने बूते ही इस साल के अंत तक बहुमत के आंकड़े के बेहद नजदीक पहुंचने जा रही है. मई में 23, जबकि नवंबर में 11 सीटें खाली हो रही हैं. इन 34 सीटों में से बीजेपी और उसके सहयोगी दल कम से कम 20 सीटें जीत सकते हैं.

एनडीए की संख्या भी बढ़ कर 149 हो जाएगी

वहीं, सहयोगी दलों के साथ एनडीए पहले ही बहुमत पा चुकी है. अभी उसके सहयोगियों के पास 28 सांसद हैं. आम आदमी पार्टी के 7 सांसदों को मिला कर एनडीए की संख्या भी बढ़ कर 149 के पार हो जाएगी. इनमें 7 मनोनीत और 2 निर्दलीय सांसदों का समर्थन भी शामिल है. इस तरह एनडीए राज्य सभा में बहुमत हासिल कर चुका है. राज्य सभा में दो-तिहाई बहुमत का आंकड़ा 163 है. ऐसे में एनडीए दो-तिहाई बहुमत से केवल 13 ही दूर रह गया है.

दूसरी ओर यह विपक्ष के लिए बड़ा झटका है. हाल ही में महिला आरक्षण लागू करने के लिए लाए गए संविधान के 131वें संशोधन विधेयक को सरकार लोक सभा में पारित नहीं कर सकी थी. इसके विरोध में 230 वोट पड़े थे जो विपक्षी एकता का सबूत है. लेकिन अब हालात बदल जाएंगे. लोक सभा में चाहे सरकार को दो-तिहाई बहुमत पाने में परेशानी हो. लेकिन राज्य सभा में वह इसके काफी नजदीक पहुंच गए हैं. यहां यह ध्यान देने की बात है कि YSRCP के लोक सभा के चार और राज्य सभा में सात सांसद हैं, जो करीब-करीब हर मुद्दे पर सरकार का साथ देते आए हैं. वे महिला आरक्षण पर संविधान संशोधन विधेयक पर भी सरकार के साथ रहे.

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आम आदमी पार्टी को यह बड़ा झटका लगा है. अभी तक राज्य सभा में 10 सांसदों के साथ वह बीजेपी, कांग्रेस और तृणमूल कांग्रेस के बाद चौथे नंबर पर थी. चौथी सबसे बड़ी पार्टी होने के नाते उसके सांसदों को बोलने के लिए अधिक समय मिलता था. लेकिन 7 सांसदों के टूटने से अब उसकी संख्या घट कर केवल 3 रह जाएगी.

लोक सभा में आम आदमी पार्टी के तीन सांसद

अमूमन सर्वदलीय बैठकों में भी सरकार की ओर से निमंत्रण संख्या बल के आधार पर मिलता है. कई बार पांच से कम सदस्य संख्या वाली पार्टियों को नहीं बुलाया गया. हालांकि, लोक सभा में आम आदमी पार्टी के तीन सांसद हैं और ऐसे में उसके संसदीय दल में अब भी 6 सांसद हैं. संसदीय समितियों में भी आम आदमी पार्टी का प्रतिनिधित्व घटेगा और विपक्ष की बैठकों में भी उसकी आवाज कमजोर पड़ेगी.

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