'आपको सिस्टम पर शक है या फिर नतीजे पर?' चुनाव आयोग और SIR के समर्थन में उतरे 124 पूर्व IAS-IFS अधिकारी

124 पूर्व IAS, IFS और संबद्ध सेवाओं के अधिकारियों ने खुले पत्र के जरिए चुनाव आयोग और SIR का समर्थन किया है. उन्होंने वोट धांधली के आरोपों को निराधार बताया और कहा कि मतदाता सूची की सफाई तथा चुनावी पारदर्शिता के लिए SIR जैसी प्रक्रिया आवश्यक है.

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124 former ias ifs officers defend election commission sir reject vote rigging allegations
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  • 124 पूर्व IAS, IFS और अन्य अधिकारियों ने चुनाव आयोग और मतदाता सूची के पुनरीक्षण का समर्थन किया है
  • अधिकारियों ने बिना विश्वसनीय साक्ष्यों के लगाए जा रहे वोट धांधली के आरोपों पर सवाल उठाए हैं
  • उन्होंने बताया कि भारत का चुनावी तंत्र बूथ कैप्चरिंग और चुनावी हिंसा से काफी आगे बढ़ चुका है

नई दिल्ली. मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ 10 अक्टूबर 2026 को दिल्ली में कॉकरोच जनता पार्टी की ओर से किए गए प्रदर्शन के बीच 124 पूर्व IAS और IFS अधिकारियों ने चुनाव आयोग और वोटर लिस्ट के स्पेशल इंटेंसिव रिविजन (SIR) का पुरजोर बचाव किया है. उन्होंने वोटों में हेराफेरी के बेबुनियाद आरोपों पर भी सवाल उठाए हैं. भारतीय प्रशासनिक सेवा और भारतीय विदेश सेवा के इन 124 पूर्व अधिकारियों ने आम नागरिकों के नाम एक खुला पत्र जारी किया है, जिसमें लिखा है कि भारत की मौजूदा चुनावी व्यवस्था में कई स्तरों पर पोलिंग एजेंट, EVM की सीलिंग, स्ट्रॉन्ग रूम की सुरक्षा और VVPAT सत्यापन जैसे जांच और सुरक्षा उपाय मौजूद हैं.

बूथ कैप्चरिंग के दौर से आगे निकल चुका है भारत

पूर्व अधिकारियों ने बूथ कैप्चरिंग, बैलेट बॉक्स में फर्जी वोट भरने और चुनावी हिंसा के दौर से भारत के बदलाव का जिक्र करते हुए बिहार विधानसभा चुनाव 2025 का उदाहरण दिया. उन्होंने कहा कि बिहार चुनाव में दोबारा मतदान की जरूरत नहीं पड़ी और 1951 के बाद सबसे ज्यादा मतदान दर्ज किया गया था.

अधिकारियों ने कहा, "कोई सिस्टम ऐसा नहीं हो सकता कि जीतने पर तो वह ईमानदार हो और हारने पर उसमें हेराफेरी हुई हो." उन्होंने बताया कि इसी चुनाव आयोग के तहत केंद्र में सत्तारूढ़ पार्टी कई राज्यों के चुनाव हारी और 2024 में अपना संसदीय बहुमत भी खो दिया.

चुनाव आयोग की स्वतंत्रता पर दिया जोर

चुनाव आयोग की स्वतंत्रता का पुरजोर बचाव करते हुए अधिकारियों ने इसके बहुसदस्यीय ढांचे और संस्थागत सुरक्षा उपायों पर जोर दिया. उन्होंने कहा, "सवाल पूछना हर नागरिक का अधिकार है. आरोप लगाने वाले की जिम्मेदारी है कि वह उसे साबित करे."

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वोटर लिस्ट की शुद्धता के लिए जरूरी है SIR

SIR के बारे में अधिकारियों ने कहा कि वोटर लिस्ट को सही और अद्यतन करने के लिए यह प्रक्रिया जरूरी थी. उन्होंने बताया कि बिहार में लगभग 22 लाख मृत वोटरों और 7 लाख डुप्लीकेट प्रविष्टियों की पहचान की गई, वहीं लगभग 21.5 लाख नए वोटरों को जोड़ा गया. उन्होंने कहा, "बिना सही की गई वोटर लिस्ट वोटरों की सुरक्षा नहीं करती, बल्कि धोखाधड़ी करने वालों की मदद करती है."

SIR में कई स्तर के सुरक्षा प्रावधान

अधिकारियों ने SIR के तहत उपलब्ध सुरक्षा उपायों पर भी प्रकाश डाला. इनमें नोटिस, सुनवाई, अपील और राजनीतिक दलों के बूथ स्तर के एजेंटों की भागीदारी शामिल है. उन्होंने बताया कि सुप्रीम कोर्ट ने इस प्रक्रिया की जांच की थी, अतिरिक्त सुरक्षा उपाय सुझाए थे और पत्र के अनुसार इसे लागू करने के चुनाव आयोग के अधिकार को सही ठहराया था. चुनाव नतीजों पर सवाल उठाने वालों को कड़े शब्दों में जवाब देते हुए अधिकारियों ने कहा, "अगर जिस सिस्टम को आप धांधली वाला कहते हैं, उसी ने आपको जीत दिलाई थी, तो खुद से पूछिए कि आपको सिस्टम पर शक है या सिर्फ नतीजों पर."  

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124 पूर्व अधिकारियों द्वारा  आम नागरिकों के नाम ल‍िखा खुला पत्र, यहां पढ़ें  

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Election Commission
Gyanesh Kumar
Sir
IAS Officers