- मोदी सरकार ने राम मंदिर निर्माण का वादा पूरा करते हुए जनवरी 2024 में अयोध्या में प्राण प्रतिष्ठा कराई
- 2019 में अनुच्छेद 370 हटाकर जम्मू-कश्मीर को दो केंद्रशासित प्रदेशों में विभाजित किया गया
- 3 तलाक को अपराध घोषित करने वाला कानून पारित हुआ, जिससे मुस्लिम महिलाओं के अधिकारों की सुरक्षा सुनिश्चित हुई
2014 में सत्ता हासिल करने के बाद मोदी के नेतृत्व वाली सरकार ने कई ऐसे वादे पूरे किए, जिन्हें बीजेपी ने चुनावी वादों के तौर पर जनता के सामने रखा था. बीते 12 सालों में इन मुद्दों पर लिए गए फैसले न सिर्फ संसद और अदालतों तक पहुंचे, बल्कि देश की राजनीति और सामाजिक बहस का मुद्दा भी बन गए. अयोध्या में राम मंदिर निर्माण से लेकर अनुच्छेद 370 हटाने, तीन तलाक पर कानून, महिला आरक्षण और CAA कानून जैसे कदमों को सरकार अपनी बड़ी उपलब्धियों के रूप में गिनाती रही है. ये बात अलग है कि इन फैसलों पर लोगों की राय अलग-अलग हो सकती है. मगर इतना तो तय है कि इन मुद्दों से देश की राजनीतिक दिशा और नीतिगत एजेंडे को नई दिशा मिली है. चलिए इन्हीं वादों पर एक नजर डालते हैं, जिनके साथ बीजेपी सत्ता में आई थी और जिन पर उसने बीते सालों में काम किए.
राम मंदिर के निर्माण का वादा किया पूरा
राम मंदिर का निर्माण बीजेपी का सबसे प्रमुख चुनावी मुद्दा था, इस मुद्दे पर देश में जो सियासत हुई वो किसी से छिपी नहीं. वजह साफ है कि ये मुद्दा लोगों की भावनओं से जुड़ा हुआ था. बीजेपी ने इस मुद्दे को भुनाने में कोई कसर नहीं छोड़ी. अयोध्या में राम मंदिर निर्माण बीजेपी के सबसे पुराने वादों में से एक रहा है. सुप्रीम कोर्ट के ऐतिहासिक फैसले के बाद मंदिर निर्माण का रास्ता साफ हुआ. जिसके बाद सरकार ने श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट का गठन किया और अगस्त 2020 में पीएम मोदी ने शिलान्यास किया. जनवरी 2024 में मंदिर में प्राण प्रतिष्ठा हुई, हालांकि प्राण प्रतिष्ठा कार्यक्रम पर सरकार की आलोचना अभी भी होती है. बावजूद इसके सरकार और बीजेपी इसे लंबे समय से चले आ रहे विवाद के संवैधानिक समाधान के रूप में पेश करती रही है और कह रही है कि उन्होंने राम मंदिर के निर्माण की वाहवाही लूटने में कोई कसर नहीं छोड़ रही.
अनुच्छेद 370: जम्मू‑कश्मीर का विशेष दर्जा समाप्त
साल 2019 के अगस्त महीने में केंद्र सरकार ने जम्मू‑कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटाने का फैसला किया. इसके साथ ही राज्य को दो केंद्र शासित प्रदेशों जम्मू‑कश्मीर और लद्दाख में विभाजित किया गया. सरकार के इस फैसले की कड़ी आलोचना हुई. वहीं इस फैसले के पीछे सरकार का तर्क रहा कि यह फैसला राष्ट्रीय एकता, सुरक्षा और विकास के लिए बेहद जरूरी था. इस कदम को लेकर संसद के भीतर और बाहर जमकर बहस हुई और यह मोदी सरकार के सबसे बड़े चुनावी वादों में से एक था. जिसे बीजेपी ने तमाम आलोचनाओं के बाद पूरा किया. बीजेपी का दावा है कि 370 हटाने के बाद घाटी की सूरत पूरी तरह बदल चुकी है.
तीन तलाक: कानून बनाकर प्रथा को अपराध घोषित किया गया
मोदी सरकार ने मुस्लिम महिलाओं से जुड़े तीन तलाक के मुद्दे पर कानून बनाकर इसे अपराध घोषित किया. साल 2019 में पारित इस कानून के तहत तत्काल तीन तलाक देना दंडनीय अपराध बनाया गया. सरकार ने इसे महिला अधिकारों और लैंगिक न्याय से जुड़ा कदम बताया, जबकि इस पर अलग‑अलग राजनीतिक और सामाजिक प्रतिक्रियाएं भी देखने को मिलीं. लेकिन बीजेपी के दावों के मुताबिक इस मुद्दे पर उन्हें मुस्लिम महिलाओं का भी जोरदार समर्थन मिला. हालांकि मुस्लिम धर्मगुरु इस मामले में सरकार से बेहद खफा दिखे.
महिला आरक्षण: दशकों बाद संसद से पास हुआ विधेयक
साल 2023 में संसद ने महिला आरक्षण विधेयक पारित किया, जिसे नारी शक्ति वंदन अधिनियम के नाम से जाना गया. इसके तहत लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत सीटें आरक्षित करने का प्रावधान है. मोदी सरकार का ये ऐसा दांव था जिस पर विपक्ष को भी समर्थन करना पड़ा. गौर करने वाली बात ये है कि यह विधेयक सालों से लंबित था और इसके पारित होने को सरकार ने ऐतिहासिक उपलब्धि करार दिया. हालांकि इसका वास्तविक क्रियान्वयन परिसीमन से जुड़ा हुआ है, जिसमें अभी और वक्त लगेगा.
नक्सलवाद के खिलाफ अभियान
सरकार का दावा रहा है कि बीते वर्षों में नक्सल प्रभावित जिलों की संख्या में कमी आई है और कई इलाकों में विकास कार्य तेज हुए हैं. मोदी सरकार में गृह मंत्री अमित शाह खुद नक्सलवाद को जड़ से उखाड़ फेंकने का वादा पूरा करने की बात कह चुके हैं. अक्सर चुनावी रैलियों में पीएम मोदी भी नक्सलवाद को खत्म करने का वादा पूरा करने की बात पर जोर देते नजर आए हैं. जिससे नक्सलियों को मुख्यधारा में जोड़ा जा रहा है. देशभर में कई नक्सल अभियानों में सुरक्षाबलों को बड़ी कामयाबी मिली है, जो कि बीजेपी सरकार की बड़ी उपलब्धि है. सुरक्षा बलों के ऑपरेशन, इंफ्रास्ट्रक्चर विस्तार और प्रशासनिक पहुंच को सरकार ने नक्सलवाद से निपटने की रणनीति का हिस्सा करार दिया है. “नक्सलमुक्त भारत” का लक्ष्य बीजेपी के चुनावी एजेंडे में शामिल रहा है.
नागरिकता संशोधन कानून (CAA): लंबे समय से किया गया वादा
नागरिकता संशोधन कानून साल 2019 में संसद से पारित हुआ. सरकार का कहना रहा कि यह कानून पाकिस्तान, अफगानिस्तान और बांग्लादेश से आए धार्मिक उत्पीड़न के शिकार अल्पसंख्यकों को नागरिकता देने से जुड़ा है. CAA को लेकर देशभर में समर्थन और विरोध दोनों ही खेमों में देखने को मिले. इसके नियम 2024 में अधिसूचित किए गए, जिसके बाद यह कानून लागू हुआ.














