युद्ध के कारण पश्चिम एशिया जाने वाली भारतीय एयरलाइंस की 10,000 से अधिक उड़ानें रद्द: नागरिक उड्डयन मंत्रालय

नागरिक उड्डयन मंत्रालय ने मंगलवार को जारी एक बयान में कहा कि फरवरी के अंत में शुरू हुए पश्चिम एशिया के संघर्ष के कारण भारतीय विमानन क्षेत्र परिचालन और वित्तीय संकट का सामना कर रहा है.

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  • युद्ध शुरू होने के बाद भारत से खाड़ी और पश्चिम एशिया के लिए दस हजार से अधिक उड़ानें रद्द की गईं.
  • मंत्रालय ने बताया कि युद्ध के कारण भारतीय विमानन क्षेत्र को परिचालन और वित्तीय संकट का सामना करना पड़ रहा है.
  • कई पश्चिम एशियाई देशों ने अपने हवाई क्षेत्र बंद कर दिए हैं जिससे वैश्विक विमानन नेटवर्क में व्यवधान आया है.
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पश्चिम एशिया में युद्ध शुरू होने के बाद से भारत से खाड़ी और पश्चिम एशिया जाने वाली 10,000 से अधिक अंतरराष्ट्रीय उड़ानें रद्द की जा चुकी हैं. युद्ध के शुरुआती दिनों में भारत से खाड़ी और पश्चिम एशियाई देशों के लिए प्रतिदिन 300 से 350 उड़ानें रद्द हो रही थीं, हालांकि अब यह संख्या घटकर 80 से 90 उड़ानें प्रतिदिन रह गई है. नागरिक उड्डयन मंत्रालय के संयुक्त सचिव असंगबा चुबा आओ ने मंगलवार को यह अहम जानकारी दी.

नागरिक उड्डयन मंत्रालय ने मंगलवार को जारी एक बयान में कहा कि फरवरी के अंत में शुरू हुए पश्चिम एशिया के संघर्ष के कारण भारतीय विमानन क्षेत्र  परिचालन और वित्तीय संकट का सामना कर रहा है. मंत्रालय यात्रियों की सुरक्षा और सुविधा सुनिश्चित करने के साथ‑साथ एयरलाइन उद्योग को स्थिर बनाए रखने के लिए कई स्तरों पर कदम उठा रहा है.

बयान में यह भी कहा गया कि मंत्रालय पश्चिम एशिया में पैदा हुई स्थिति पर लगातार और बारीकी से नज़र बनाए हुए है. ईरान, इराक, इज़रायल, जॉर्डन, लेबनान, कुवैत, कतर, बहरीन और संयुक्त अरब अमीरात समेत कई देशों ने अपने हवाई क्षेत्र बंद कर दिए हैं या उन पर कड़े प्रतिबंध लगाए हैं. इससे वैश्विक विमानन नेटवर्क और अंतरराष्ट्रीय कनेक्टिविटी में अभूतपूर्व व्यवधान पैदा हुआ है.

हवाई क्षेत्र पर लगे इन प्रतिबंधों के चलते भारतीय एयरलाइनों को अब यूरोप और उत्तरी अमेरिका जाने के लिए लंबे और वैकल्पिक मार्गों से उड़ान भरनी पड़ रही है, जिससे यात्रा का समय और परिचालन लागत दोनों बढ़ गए हैं. इस संकट के दौरान नागरिक उड्डयन मंत्रालय ने कई स्तरों पर पहल की है. एविएशन टर्बाइन फ्यूल (ATF) के मूल्य निर्धारण में समय पर हस्तक्षेप के कारण घरेलू हवाई किराए स्थिर बने हुए हैं. इसके अलावा मंत्रालय सभी हितधारकों के साथ समन्वय बनाकर कई महत्वपूर्ण उपायों पर सक्रिय रूप से काम कर रहा है.

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लंबी दूरी की उड़ानों पर बढ़ते दबाव को कम करने के लिए नागरिक उड्डयन महानिदेशालय (DGCA) ने चालक दल की कमी को देखते हुए पायलटों की उड़ान ड्यूटी समय सीमा में अस्थायी रूप से ढील दी है. वहीं, आवश्यक आपूर्ति श्रृंखलाओं को बनाए रखने के उद्देश्य से एमिरेट्स, कुवैत एयरवेज और जजीरा एयरवेज जैसी विदेशी एयरलाइनों को सभी‑कार्गो सेवाओं के लिए यात्री विमानों के संचालन की विशेष अनुमति दी गई है. इससे मौजूदा व्यवधानों के बावजूद जरूरी कार्गो परिवहन की निर्बाध निरंतरता सुनिश्चित हो सकी है.

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