"वैश्विक शांति, स्थिरता और समृद्धि हम सब का साझा उद्देश्य है": G7 शिखर सम्मेलन के कार्य सत्र में पीएम मोदी

पीएम मोदी ने कहा कि यह सोचने की बात है, कि भला हमें शांति और स्थिरता की बातें अलग-अलग फोरम में क्यों करनी पड़ रही हैं? UN जिसकी शुरुआत ही शांति स्थापित करने की कल्पना से की गई थी, भला आज संघर्ष को रोकने में सफल क्यों नहीं होता? आखिर क्यों, UN में आतंकवाद की परिभाषा तक मान्य नहीं हो पाई है?

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पीएम मोदी ने कहा कि पिछली सदी में बनाये गए संस्थान, 21वीं सदी की व्यवस्था के अनुरूप नहीं है.

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इन दिनों जापान के दौरे पर हैं. जहां G7 शिखर सम्मेलन के कार्य सत्र 9 में पीएम ने प्रारंभिक वक्तव्य में कहा कि आज हमने यूक्रेन राष्ट्रपति ज़ेलेंस्की को सुना, कल मेरी उनसे मुलाकात भी हुई थी. मैं वर्तमान परिस्थिति को राजनीति या अर्थव्यवस्था का मुद्दा नहीं मानता. मेरा मानना है कि यह मानवता का मुद्दा है, मानवीय मूल्यों का मुद्दा है. हमने शुरू से कहा है कि डायलॉग और डिप्लोमेसी ही एकमात्र रास्ता है और इस परिस्थिति के समाधान के लिए, भारत से जो कुछ भी बन पड़ेगा, हम यथासंभव प्रयास करेंगे.

पीएम मोदी ने साथ ही कहा कि वैश्विक शांति, स्थिरता और समृद्धि हम सब का साझा उद्देश्य है. आज की आपस में जुड़ी दुनिया, किसी भी एक क्षेत्र में तनाव सभी देशों को प्रभावित करता है और विकासशील देश, जिनके पास सीमित संसाधन हैं, सबसे अधिक प्रभावित होते हैं. वर्तमान वैश्विक स्थिति के चलते खाना, फ्यूल और उर्वरक संकट का अधिकतम और सबसे गहरा प्रभाव इन्हीं देशों को भुगतना पड़ रहा है.

इसी के साथ पीएम ने कहा कि यह सोचने की बात है, कि भला हमें शांति और स्थिरता की बातें अलग-अलग फोरम में क्यों करनी पड़ रही हैं? UN जिसकी शुरुआत ही शांति स्थापित करने की कल्पना से की गई थी, भला आज संघर्ष को रोकने में सफल क्यों नहीं होता? आखिर क्यों, UN में आतंकवाद की परिभाषा तक मान्य नहीं हो पाई है? अगर आत्मचिंतन किया जाये, तो एक बात साफ़ है. पिछली सदी में बनाये गए संस्थान, इक्कीसवीं सदी की व्यवस्था के अनुरूप नहीं हैं. वर्तमान की वास्तविकता को रिफ्लेक्ट नहीं करते. इसलिए जरूरी है, कि UN जैसे बड़े संस्थान में रिफॉर्म्स को मूर्त रूप दिया जाए.

इनको ग्लोबल साउथ की आवाज भी बनना होगा वरना हम संघर्षो को ख़त्म करने पर सिर्फ चर्चा ही करते रह जाएंगे. UN और सिक्योरिटी काउंसिल मात्र एक टॉक शॉप बन कर रह जाएंगे. यह जरूरी है कि सभी देश यूएन चार्टर, अंतर्राष्ट्रीय कानून और सभी देशों की सोवरनटी और टेरीटोरियल इंटेग्रिटी का सम्मान करें. यथास्थिति को बदलने की एकतरफा कोशिशों के खिलाफ मिलकर आवाज उठायें. भारत का हमेशा यह मत रहा है कि किसी भी तनाव, किसी भी विवाद का समाधान शांतिपूर्ण तरीके से, बातचीत के ज़रिये ही किया जाना चाहिए.

पीएम मोदी ने साथ ही कहा कि अगर कानून से कोई हल निकलता है, तो उसको मानना चाहिए और इसी भावना से भारत ने बांग्लादेश के साथ अपने लैंड और मेरीटाइम बाउंड्री विवाद का हल किया था. भारत में और जापान में भी, हजारों वर्षों से भगवान बुद्ध को फॉलो किया जाता है. आधुनिक युग में ऐसी कोई समस्या नहीं है, जिसका समाधान हम बुद्ध की शिक्षाओं में न खोज पाएं. दुनिया आज जिस युद्ध, अशांति और अस्थिरता को झेल रही है, उसका समाधान बुद्ध ने सदियों पहले ही दे दिया था. भगवान बुद्ध ने कहा है:

नहि वेरेन् वेरानी, 
सम्मन तीध उदासन्, 
अवेरेन च सम्मन्ति, 
एस धम्मो सन्नतन.

यानी, शत्रुता से शत्रुता शांत नहीं होती. अपनत्व से शत्रुता शांत होती है. इसी भाव से हमें सबके साथ मिलकर आगे बढ़ना चाहिए.
 

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