World Cancer Day 2026: हर साल लाखों लोग कैंसर के डर से प्रभावित होते हैं. लेकिन, क्या सच में हम इसे पूरी तरह रोक सकते हैं? डॉ. आदित्य विदुषी, मेडिकल ऑन्कोलॉजी, सीनियर कंसल्टेंट एवं हेड यूनिट–III, एशियन हॉस्पिटल के अनुसार, कैंसर को 100 फीसदी रोकना फिलहाल संभव नहीं है, लेकिन जोखिम को काफी हद तक कम किया जा सकता है. डॉ. विदुषी बताती हैं कि कैंसर रोकने की बात में दो चीजों को समझना जरूरी है, जोखिम कम करना और 100 फीसदी रोकथाम. हम अपने खान-पान, लाइफस्टाइल और पर्यावरणीय आदतों से जोखिम घटा सकते हैं. लेकिन, आनुवंशिकी यानी परिवार में कैंसर का इतिहास भी इसमें बड़ी भूमिका निभाता है. इसलिए यह समझना जरूरी है कि लाइफस्टाइल सुधार और हेल्थ चेकअप से हम जोखिम कम कर सकते हैं, मगर पूरी तरह रोक नहीं सकते.
जेनेटिक्स और लाइफस्टाइल, असली खेल कहां है?
डॉ. विदुषी बताती हैं कि कैंसर के पीछे दो बड़े फैक्टर काम करते हैं:
1. जेनेटिक कारण (Genetics)
अगर परिवार में ब्रेस्ट, प्रोस्टेट या कोलन कैंसर का इतिहास रहा है, तो इसका मतलब यह नहीं कि आपको भी कैंसर होगा. लेकिन हां, यह एक वार्निंग साइन जरूर है कि आपको समय पर जांच और स्क्रीनिंग करवानी चाहिए.
2. लाइफस्टाइल फैक्टर (Lifestyle)
धूम्रपान, शराब, मोटापा, जंक फूड, फिजिकल एक्टिविटी की कमी ये सभी आदतें कैंसर के खतरे को सीधे बढ़ाती हैं.
स्क्रीनिंग क्यों है लाइफसेवर?
कैंसर की सबसे खतरनाक बात यह है कि शुरुआती स्टेज में अक्सर कोई लक्षण नहीं दिखते. डॉ. के मुताबिक, समय पर स्क्रीनिंग से कैंसर जल्दी पकड़ में आ जाता है, जिससे इलाज आसान और ज्यादा सफल हो जाता है.
Add image caption here
खासकर इन कैंसर में स्क्रीनिंग बेहद जरूरी है:
- ब्रेस्ट कैंसर
- सर्वाइकल (गर्भाशय) कैंसर
- कोलन कैंसर
- प्रोस्टेट कैंसर
कब तुरंत डॉक्टर से मिलना चाहिए?
अगर आपको ये लक्षण दिखें, तो देरी न करें:
- बिना वजह वजन कम होना
- खून की कमी
- पेट या मूत्र में असामान्य बदलाव
- लगातार थकान
- लंबे समय तक बना रहने वाला दर्द
छोटी आदतें, बड़ा असर
डॉ. विदुषी के अनुसार, कैंसर के जोखिम को कम करने के सबसे असरदार तरीके हैं:
- 7-8 घंटे की नींद
- तनाव को कंट्रोल करना
- बैलेंस और पौष्टिक आहार
- रेगुलर एक्सरसाइज
- तंबाकू और शराब से दूरी
कैंसर को पूरी तरह रोक पाना भले ही आज संभव न हो, लेकिन सही जानकारी, जागरूकता, बेहतर लाइफस्टाइल और रेगुलर स्क्रीनिंग से हम इसके खतरे को काफी हद तक कम कर सकते हैं.
(डॉ. आदित्य विदुषी- मेडिकल ऑन्कोलॉजी, सीनियर कंसल्टेंट एवं हेड यूनिट–III, एशियन हॉस्पिटल)
(अस्वीकरण: सलाह सहित यह सामग्री केवल सामान्य जानकारी प्रदान करती है. यह किसी भी तरह से योग्य चिकित्सा राय का विकल्प नहीं है. अधिक जानकारी के लिए हमेशा किसी विशेषज्ञ या अपने चिकित्सक से परामर्श करें. एनडीटीवी इस जानकारी के लिए ज़िम्मेदारी का दावा नहीं करता है.)














