Working Hours: आज के समय में ऑफिस में सारा काम कंप्यूटर के सहारे कुर्सी पर बैठकर किया जाता है और लगातार 8-9 घंटे कुर्सी पर जमकर बैठने से कई तरह की परेशानियां होने लगती हैं. ऐसे में अक्सर आपने देखा होगा कि ऑफिस में बैठकर काम करने वाले लोगों का पाचन बाकी लोगों की तुलना में ज्यादा खराब होता है लेकिन ऐसा क्यों? इसके पीछे कई कारण हैं लेकिन आयुर्वेद में इसका भी हल छिपा है.
लगातार काम करने का पाचन तंत्र पर असर
ऑफिस में बैठकर लगातार काम करने से चलना-फिरना कम हो गया है. तुरंत खाकर कुर्सी पर बैठ जाते हैं या फिर डेस्क पर ही खा लेते हैं. इससे शारीरिक गतिविधि कम हो जाती है और गैस बनना, पेट बाहर निकलना, ब्लोटिंग की दिक्कत, वजन का बढ़ना और भूख कम लगने जैसी शिकायतें होने लगती हैं. अगर ऐसी जीवनशैली लगातार लंबे समय तक रहती है, तो धीरे-धीरे पाचन मंद हो जाता है व खाना पचने की बजाय पेट में सड़ने लगता है और शरीर बीमारियों का शिकार हो जाता है.
ये भी पढ़ें: Yoga in Office: ऑफिस में 'वाई-ब्रेक' लेकर स्ट्रेस फ्री रह सकते हैं, जानिए कैसे करता है मदद
इन बातों का रखें ध्यान
आयुर्वेद के अनुसार सिर्फ अच्छा भोजन करना ही काफी नहीं होता है बल्कि भोजन के साथ अच्छी आदतों को भी अपनाना जरूरी है. अगर भोजन को शांत मन और खुशी से किया जाए तो भोजन शारीरिक ताकत के साथ मन के विकारों को भी कम करता है. अगर आप भी ऑफिस में ऐसी ही जीवनशैली में काम करते हैं तो आज ही संभल जाए. इसके लिए भोजन को शांत मन से करें और धीरे-धीरे चबा-चबा कर खाएं. भोजन को जल्दी खत्म करने में किसी तरह की तेजी न दिखाएं. आराम से भोजन को स्वाद के साथ खाएं.
दूसरा, खाना खाते समय मोबाइल से दूरी रखें और भोजन को करने के बाद तुरंत कुर्सी पर न बैठें बल्कि कुछ मिनट के लिए टहलें. भले ही 10 मिनट का समय निकालें लेकिन टहलें जरूर. पूरे दिन कुर्सी पर लगातार नहीं बैठें. 1-2 घंटे के बीच थोड़ा पैदल चलें और खूब सारा पानी भी पीएं. गर्मियों में शरीर को ज्यादा पानी की जरूरत होती है. ऐसे में भरपूर मात्रा में पानी जरूर पीएं. इसके अलावा, दोपहर के वक्त तला-भुना कम खाएं और हल्का व पौष्टिक भोजन लें. हल्का भोजन पचने में आसान होता है.
History of Samosa- Swaad Ka Safar | समोसे का इतिहास | जानें ईरान से भारत कैसे पहुंचा समोसा
(अस्वीकरण: सलाह सहित यह सामग्री केवल सामान्य जानकारी प्रदान करती है. यह किसी भी तरह से योग्य चिकित्सा राय का विकल्प नहीं है. अधिक जानकारी के लिए हमेशा किसी विशेषज्ञ या अपने चिकित्सक से परामर्श करें. एनडीटीवी इस जानकारी के लिए ज़िम्मेदारी का दावा नहीं करता है.)














