ज्यादा बार इजैक्युलेशन से बढ़ सकती है पुरुषों की फर्टिलिटी, रिसर्च में हुआ चौंकाने वाला खुलासा

लंबे समय तक स्पर्म शरीर में जमा रहने से उसकी क्वालिटी, मूवमेंट और DNA पर बुरा असर पड़ सकता है. ऐसे में बार-बार लंबे समय तक स्पर्म शरीर में जमा रहने से उसकी क्वालिटी, मूवमेंट और DNA पर बुरा असर पड़ सकता है.

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ज्यादा बार इजैक्युलेशन से बढ़ सकती है पुरुषों की फर्टिलिटी.

हाल ही में हुई एक रिसर्च में पुरुषों से जुड़े कुछ चौंकाने वाले मामले सामने आए हैं. रिसर्च में सामने आया है कि पुरुषों को बार-बार इजैक्युलेशन के लिए प्रोत्साहित करने से उनकी फर्टिलिटी बूस्ट होती है. रिसर्च के मुताबिक, पुरुषों के शरीर में जब स्पर्म काफी लंबे समय तक स्टोर रहता है तो इससे समय के साथ-साख स्पर्म की क्वालिटी पर काफी बुरा असर पड़ता है. ऐसे में जरूरी है कि पुरुषों को बार-बार इजैक्युलेशन के लिए प्रोत्साहित किया जाए. DNA डैमेज, ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस और स्पर्म की मूवमेंट पर इसका असर साफ देखा गया है.

स्पर्म को लंबे समय तक स्टोर करने के नुकसान

रिसर्चर्स ने पाया कि जो पुरुष लंबे समय तक सेक्स या इजैक्युलेशन से दूर रहे, उनके स्पर्म में DNA डैमेज और ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस देखने को मिला.  इस तरह के स्पर्म काफी कम समय के लिए जिंदा रहने और उनकी तैरने की कैपेसिटी भी काफी कमजोर थी.

क्या कहना है रिसर्चर्स का?

ऑक्सफ़ोर्ड यूनिवर्सिटी के बायोलॉजिस्ट और इस स्टडी के लीड ऑर्थर डॉ. कृष्ण संघवी ने कहा, "पुरुषों में, स्पर्म के DNA डैमेज और ऑक्सीडेटिव डैमेज पर हमने जो बुरे असर देखे, वे काफी बड़े थे. इसलिए हमें पूरा भरोसा है कि यह बायोलॉजिकल तौर पर काफी जरूरी है.''

स्टडी में क्या देखा गया?

यह नतीजा एक बड़े विश्लेषण से निकला, जिसमें करीब 55,000 पुरुषों पर हुई 115 स्टडीज और 30 अलग-अलग जानवरों पर हुई 56 स्टडीज़ को एक साथ देखा गया. इन सभी स्टडीज में एक बात समान दिखी जब स्पर्म शरीर के अंदर ज्यादा समय तक जमा रहता है, तो उसकी क्वालिटी धीरे-धीरे कम होने लगती है. यह असर इंसानों और जानवरों दोनों में देखा गया, और उम्र से इसका कोई खास संबंध नहीं पाया गया.

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क्या है WHO की गाइडलाइंस

बता दें कि विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) सलाह देता है कि फर्टिलिटी टेस्ट या IVF के लिए स्पर्म देने से पहले पुरुष दो से सात दिनों तक इजैक्युलेट करने से परहेज करना चाहिए. ये गाइडलाइन्स सबसे अच्छी क्वालिटी के स्पर्म को प्रायॉरिटी देने के बजाय सबसे ज्यादा स्पर्म काउंट पाने के मकसद से बनाई गई थीं.

इसपर संघवी ने कहा, 'हम बस यही सलाह देते हैं कि डॉक्टर और कपल्स इस बात पर दोबारा सोचें कि क्या लंबे समय तक परहेज करना हमेशा अच्छा होता है? क्योंकि परहेज करने से स्पर्म की क्वालिटी खराब होती है.'

संघवी का कहना है कि अगर किसी क्लीनिक या कपल  के लिए सिर्फ स्पर्म की संख्या ही मायने रखती है, तो कुछ दिन सेक्स ना करना गलत नहीं है. लेकिन IVF जैसे मामलों में अगर आप बच्चा पैदा करना चाहते हैं तो सिर्फ स्पर्म की संख्या मायने नहीं रखती बल्कि स्पर्म की क्वालिटी भी उतनी ही मायने रखती हैं.

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क्लिनिकल ट्रायल में क्या देखा गया

453 कपल्स पर हुए एक क्लिनिकल ट्रायल में दो ग्रुप्स में तुलना की गई. इसमें देखा गया कि जिन पुरुषों ने 48 घंटे से कम समय तक परहेज किया, उनमें प्रेगनेंसी रेट 46% रहा. वहीं, जिन पुरुषों ने 2–7 दिन का परहेज किया, उनमें यह 36% रहा. रिसर्च में यह भी साफ हुआ कि फर्टिलाइजेशन सिर्फ स्पर्म की संख्या पर निर्भर नहीं करता. स्पर्म की सेहत, उसकी मूवमेंट और DNA की स्थिति भी उतनी ही जरूरी है. खासकर IVF और ICSI जैसे मामलों में. इस रिसर्च को Proceedings of the Royal Society B में पब्लिश किया गया.

University of Manchester में एंड्रोलॉजी के प्रोफेसर एलन पेसी के अनुसार, IVF जैसे ट्रीटमेंट में कम समय का परहेज फायदेमंद हो सकता है क्योंकि इससे स्पर्म ज्यादा फ्रेश और एक्टिव होते हैं, और उनमें DNA डैमेज कम रहता है.

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(अस्वीकरण: सलाह सहित यह सामग्री केवल सामान्य जानकारी प्रदान करती है. यह किसी भी तरह से योग्य चिकित्सा राय का विकल्प नहीं है. अधिक जानकारी के लिए हमेशा किसी विशेषज्ञ या अपने चिकित्सक से परामर्श करें. एनडीटीवी इस जानकारी के लिए ज़िम्मेदारी का दावा नहीं करता है.)

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