Pathogen Detection Tool: भारत में हर कुछ सालों में कोई न कोई संक्रामक बीमारी चिंता का कारण बनती रही है. कभी निपाह वायरस, कभी डेंगू-चिकनगुनिया, तो कभी कोरोना जैसी वैश्विक महामारी. इन बीमारियों ने यह साफ कर दिया कि सिर्फ बीमारी फैलने के बाद कदम उठाना काफी नहीं है, बल्कि पहले से चेतावनी और तैयारी बेहद जरूरी है. इसी सोच के साथ इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च (ICMR) ने एक नई और अत्याधुनिक तकनीक आधारित पहल की है, जो आने वाली बीमारियों का पहले से अनुमान लगाने में मदद करेगी.
नेशनल वन हेल्थ मिशन के तहत शुरू किया गया यह नया प्रिडिक्टिव AI टूल इंसान, जानवर और पर्यावरण, तीनों की सेहत को एक साथ जोड़कर देखता है. इसका उद्देश्य सिर्फ इलाज नहीं, बल्कि बीमारी के कारणों, फैलने के रास्तों और संभावित खतरों को पहले ही पहचानना है. यह पहल भारत को रिएक्टिव हेल्थकेयर से प्रिडिक्टिव सर्विलांस की दिशा में ले जाने वाला बड़ा कदम मानी जा रही है.
कैसे काम करता है ICMR का प्रिडिक्टिव AI टूल?
यह AI सिस्टम वायरल और बैक्टीरियल बीमारियों के खास जीनोम डेटा पर नजर रखता है. इसके साथ-साथ यह देश के अलग-अलग हिस्सों से मिलने वाले बिग डेटा, शुरुआती संकेतों और लक्षणों का विश्लेषण करता है. जैसे ही किसी इलाके में असामान्य लक्षण या संक्रमण का पैटर्न दिखता है, यह टूल अधिकारियों को अलर्ट कर सकता है.
खास बात यह है कि यह सिस्टम लक्षणों के आधार पर बीमारियों को फिल्टर करता है और उनके फैलाव को ट्रैक करने में भी मदद करता है.
भारत में खतरा बन चुकी वायरल ज़ूनोटिक बीमारियां | Viral zoonotic diseases have become a threat in India
भारत में कई ऐसी बीमारियां हैं जो जानवरों से इंसानों में फैलती हैं और सार्वजनिक स्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा हैं, जैसे:
निपाह वायरस: केरल में बार-बार प्रकोप, मृत्यु दर बहुत ज्यादा.
क्यासनूर फॉरेस्ट डिजीज (KFD): कर्नाटक व आसपास के राज्यों में टिक से फैलने वाली बीमारी.
जापानी इंसेफेलाइटिस: यूपी, बिहार और असम में मौसमी प्रकोप.
डेंगू व चिकनगुनिया: मच्छरों से फैलने वाली आम लेकिन खतरनाक बीमारी.
क्राइमियन-कांगो हेमरेजिक फीवर (CCHF): गुजरात और राजस्थान में छिटपुट मामले.
जीका वायरस: केरल और महाराष्ट्र में पहचान.
एवियन इन्फ्लुएंजा: पोल्ट्री से जुड़ा संक्रमण.
रेबीज, मपॉक्स और कोविड-19: लगातार या उभरते हुए खतरे.
बैक्टीरियल ज़ूनोटिक बीमारियां
जब इंसान का सीधा संपर्क संक्रमित जानवरों, उनके भोजन, पानी या शारीरिक द्रवों से होता है, तब बैक्टीरियल बीमारियां फैलती हैं. इनमें शामिल हैं—
एंथ्रेक्स, प्लेग (दोबारा उभरने का खतरा), लेप्टोस्पायरोसिस, ब्रुसेलोसिस, लिस्टीरियोसिस और ज़ूनोटिक टीबी.
परजीवी (पैरासाइटिक) बीमारियां भी चुनौती
काला-आजार, टॉक्सोप्लाज्मसिस, सिस्टिसरकोसिस, हाइडेटिड डिजीज और ट्रिपैनोसोमियासिस जैसी बीमारियां भी जानवरों से इंसानों में फैलकर गंभीर समस्या बन सकती हैं.
भारत के लिए यह पहल क्यों जरूरी है? | Why is This Initiative Important For India?
कोरोना महामारी ने सिखाया कि देरी की कीमत जान और अर्थव्यवस्था दोनों चुकाती हैं. अगर ज़ूनोटिक बीमारियों का पहले से अनुमान लगाया जाए, तो जानमाल का नुकसान कम हो सकता है, हेल्थ सिस्टम पर दबाव घटेगा, आर्थिक नुकसान रोका जा सकेगा, भारत AI आधारित पब्लिक हेल्थ में वैश्विक नेतृत्व कर सकता है.
दुनिया के लिए क्यों अहम है भारत का यह कदम?
आज की दुनिया में यात्रा और व्यापार के कारण बीमारियां तेजी से सीमाएं पार करती हैं. AI बेस्ड भविष्यवाणी से वैश्विक स्तर पर संक्रमण रोका जा सकता है. WHO के अनुसार जर्मनी, चीन, अमेरिका और सिंगापुर जैसे देश पहले से AI का इस्तेमाल कर रहे हैं. भारत की यह पहल ग्लोबल हेल्थ सिक्योरिटी को और मजबूत कर सकती है.
हालांकि यह तकनीक उम्मीद जगाती है, लेकिन डेटा प्राइवेसी, डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर, इंटरनेट पहुंच और AI में संभावित पक्षपात जैसी चुनौतियां भी हैं. लगातार निवेश, पारदर्शिता और सुधार से यह टूल भविष्य में सार्वजनिक स्वास्थ्य के लिए बेहद कीमती साबित हो सकता है.
कुल मिलाकर, ICMR का यह प्रिडिक्टिव AI टूल भारत की उस सोच को दिखाता है, जिसमें बीमारी से लड़ाई पहले से शुरू होती है और यही आने वाले समय की सबसे बड़ी जरूरत है.
(अस्वीकरण: सलाह सहित यह सामग्री केवल सामान्य जानकारी प्रदान करती है. यह किसी भी तरह से योग्य चिकित्सा राय का विकल्प नहीं है. अधिक जानकारी के लिए हमेशा किसी विशेषज्ञ या अपने चिकित्सक से परामर्श करें. एनडीटीवी इस जानकारी के लिए ज़िम्मेदारी का दावा नहीं करता है.)














