कोलेस्ट्रॉल लेवल को नेचुरली करना चाहते हैं कम? डॉ. नरेश त्रेहान से जानिए ईजी टिप्स

How to control cholesterol naturally : उम्र के साथ मेटाबॉलिज्म धीमा होता है, इसलिए खाने की मात्रा कम करना जरूरी है. पेट भरकर खाने की आदत कोलेस्ट्रॉल और हार्ट प्रॉब्लम्स बढ़ाती है. संतुलित आहार, कम मात्रा में भोजन और हल्की एक्सरसाइज से कोलेस्ट्रॉल को नेचुरली कंट्रोल किया जा सकता है.

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डॉ. नरेश त्रेहान के मुताबिक, 20–30 साल की उम्र में शरीर का मेटाबॉलिक रेट काफी तेज होता है.

Natural way to control Cholesterol : आज के समय में कोलेस्ट्रॉल और मेटाबॉलिज्म को लेकर लोगों में काफी भ्रम है. ज्यादातर लोग मानते हैं कि सिर्फ दवाइयों से ही कोलेस्ट्रॉल कम किया जा सकता है, जबकि सच्चाई यह है कि सही खानपान और लाइफस्टाइल से इसे नेचुरली भी कंट्रोल किया जा सकता है. मेदांता अस्पताल के कार्डियोथोरेसिक सर्जन डॉ. नरेश त्रेहान के अनुसार, कोलेस्ट्रॉल अपने आप में दुश्मन नहीं है. यह शरीर के लिए एक ट्रांसपोर्ट मीडियम है, जो हार्मोन बनाने और सेल्स को ऊर्जा देने का काम करता है. समस्या तब होती है जब कोलेस्ट्रॉल का लेवल जरूरत से ज्यादा बढ़ जाता है. इसका सबसे बड़ा कारण होता है हमारा मेटाबॉलिज्म. NDTV से खास बातचीत में डॉ. नरेश त्रेहान ने कुछ टिप्स बताए हैं जिससे कोलेस्ट्रॉल को नेचुरली कम किया जा सकता है.

उम्र और मेटाबॉलिज्म का संबंध - The relationship between age and metabolism

डॉ. नरेश त्रेहान के मुताबिक, 20–30 साल की उम्र में शरीर का मेटाबॉलिक रेट काफी तेज होता है. इस उम्र में लोग ज्यादा खा लेते हैं और शरीर उसे आसानी से पचा भी लेता है. लेकिन जैसे-जैसे उम्र बढ़ती है, खासकर 30 के बाद, मेटाबॉलिज्म धीरे-धीरे स्लो होने लगता है. यही कारण है कि वही खाना जो पहले नुकसान नहीं करता था, अब वजन और कोलेस्ट्रॉल बढ़ाने लगता है.

कम खाना क्यों है जरूरी

हेल्दी और लंबी उम्र जीने वाले लोगों में एक बात कॉमन पाई जाती है, वे प्रोपोर्शन में कम खाते हैं. डॉक्टरों की सलाह है कि
“इतना खाइए कि भूख मिट जाए, पेट भरने तक नहीं.” पेट भरकर खाना भले ही उस वक्त मजा दे, लेकिन लंबे समय में यही आदत हार्ट डिजीज, डायबिटीज और मोटापे की वजह बनती है.

नेचुरल तरीके से कोलेस्ट्रॉल कैसे कंट्रोल करें - How to control cholesterol naturally

डॉ. नरेश त्रेहान के मुताबिक, कोलेस्ट्रॉल को कम करने के लिए सबसे पहले अपने इंटेक और कंजम्शन (consumption) को समझना जरूरी है. अगर आप जितनी कैलोरी लेते हैं, उतनी बर्न नहीं कर रहे, तो फैट शरीर में जमा होगा ही. हल्की-फुल्की एक्सरसाइज, रोजाना वॉक, योग और प्राणायाम मेटाबॉलिज्म को बेहतर बनाते हैं.

बैलेंस ही है असली इलाज

खाने का मतलब सिर्फ स्वाद नहीं होना चाहिए. खाना शरीर को ताकत देने के लिए है, न कि सिर्फ जीभ को खुश करने के लिए. कम, संतुलित और समय पर भोजन करने से न सिर्फ कोलेस्ट्रॉल कंट्रोल में रहता है, बल्कि दिल भी स्वस्थ रहता है.




 

(अस्वीकरण: सलाह सहित यह सामग्री केवल सामान्य जानकारी प्रदान करती है. यह किसी भी तरह से योग्य चिकित्सा राय का विकल्प नहीं है. अधिक जानकारी के लिए हमेशा किसी विशेषज्ञ या अपने चिकित्सक से परामर्श करें. एनडीटीवी इस जानकारी के लिए ज़िम्मेदारी का दावा नहीं करता है.)

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