GBS Outbreak: मध्य प्रदेश के कई शहरों से इन दिनों एक गंभीर और चिंता बढ़ाने वाली बीमारी की खबरें सामने आ रही हैं. गिलियन बैरे सिंड्रोम (GBS) के मामले अलग-अलग इलाकों में दर्ज किए जा रहे हैं, जिनमें सबसे ज्यादा चिंता नीमच जिले के मनासा क्षेत्र को लेकर है. यहां अब तक दो बच्चों की मौत हो चुकी है, जबकि 18 से ज्यादा संक्रमित बच्चों का इलाज अस्पताल में चल रहा है. नीमच शहर में भी एक केस की पुष्टि हुई है, जिससे प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग पूरी तरह अलर्ट मोड पर है.
स्थिति की गंभीरता को देखते हुए मनासा क्षेत्र में घर-घर सर्वे किया जा रहा है, ताकि समय रहते नए मरीजों की पहचान की जा सके. नीमच के शासकीय मेडिकल कॉलेज के साथ-साथ उज्जैन और भोपाल की स्वास्थ्य टीमें भी बीमारी की रोकथाम और इलाज में जुटी हुई हैं. प्रशासन की कोशिश है कि बीमारी को फैलने से पहले ही रोका जाए.
कितने मामले आए सामने?
मीडिया रिपोर्ट्स की माने तो अब तक क्षेत्र में छह मरीजों में जीबीएस की पुष्टि हो चुकी है, जिनमें दो बच्चों की मौत भी शामिल है. इसके अलावा कई संदिग्ध मरीज अस्पताल में भर्ती हैं, जिनका इलाज और टेस्ट जारी है.
वहीं, ग्वालियर के एक निजी अस्पताल में भी एक मरीज की मौत की खबर सामने आई है. मंदसौर में भी एक केस दर्ज किया गया है, हालांकि इन दोनों मामलों को फिलहाल संदिग्ध माना जा रहा है, क्योंकि अंतिम पुष्टि अभी नहीं हुई है.
क्या है गिलियन बैरे सिंड्रोम(GBS)?
गिलियन बैरे सिंड्रोम एक दुर्लभ लेकिन गंभीर न्यूरोलॉजिकल बीमारी है. इस बीमारी में शरीर की इम्यूनिटी गलती से खुद की नसों पर हमला करने लगती है.
इस प्रक्रिया में बनने वाली एंटीबॉडी नसों को नुकसान पहुंचाती हैं, जिससे नर्व सिग्नल ठीक से काम नहीं कर पाता. नतीजतन, मांसपेशियों में तेजी से कमजोरी आने लगती है और मरीज को चलने-फिरने में दिक्कत होने लगती है.
किन कारणों से हो सकता है GBS?
विशेषज्ञों के अनुसार, GBS अक्सर किसी संक्रमण के बाद ट्रिगर होता है. इसके प्रमुख कारणों में शामिल हैं:
- फ्लू या वायरल संक्रमण
- डेंगू
- कोविड-19
- डायरिया
- फूड प्वाइजनिंग
संक्रमण के बाद शरीर की इम्यून सिस्टम जरूरत से ज्यादा एक्टिव हो जाती है और नसों को नुकसान पहुंचाने लगती है.
गिलियन बैरे सिंड्रोम के शुरुआती और गंभीर लक्षण | Early and Severe Symptoms of Guillain-Barre Syndrome
GBS के लक्षण तेजी से बढ़ सकते हैं, इसलिए इन्हें नजरअंदाज करना खतरनाक हो सकता है.
शुरुआती लक्षण:
- पैरों में झनझनाहट या सुन्नपन
- चलने में कमजोरी
- हाथों की ताकत कम होना
गंभीर लक्षण:
- बोलने और निगलने में परेशानी
- सांस लेने में दिक्कत
- दिल की धड़कन का अनियमित होना
- ब्लड प्रेशर में अचानक उतार-चढ़ाव
यह बीमारी तब बेहद गंभीर हो जाती है, जब यह गले और सांस से जुड़ी मांसपेशियों को प्रभावित करती है. ऐसी स्थिति में मरीज कुछ भी निगल नहीं पाता और उसे आईसीयू में वेंटिलेटर की जरूरत पड़ सकती है.
क्या GBS ठीक हो सकता है?
राहत की बात यह है कि सही समय पर इलाज मिलने पर 80 से 90 प्रतिशत मरीज पूरी तरह ठीक हो जाते हैं. हालांकि, इसमें समय लग सकता है और कुछ मरीजों को लंबे समय तक फिजियोथेरेपी की जरूरत पड़ती है.
मध्य प्रदेश में सामने आए GBS के मामलों ने यह साफ कर दिया है कि इस बीमारी को हल्के में लेना खतरनाक हो सकता है. बच्चों में अचानक कमजोरी, चलने में दिक्कत या सांस की परेशानी दिखे, तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना जरूरी है.
(अस्वीकरण: सलाह सहित यह सामग्री केवल सामान्य जानकारी प्रदान करती है. यह किसी भी तरह से योग्य चिकित्सा राय का विकल्प नहीं है. अधिक जानकारी के लिए हमेशा किसी विशेषज्ञ या अपने चिकित्सक से परामर्श करें. एनडीटीवी इस जानकारी के लिए ज़िम्मेदारी का दावा नहीं करता है.)














