दुनियाभर में आज भी जिंदा हैं महिलाओं से जुड़ी ये प्रथाएं, सुनकर आपके भी खड़े हो जाएंगे रोंगटे...

दुनिया के कई हिस्सों में आज भी महिलाओं के शरीर को उनकी आज़ादी से ज्यादा कंट्रोल की नजर से देखा जाता है. फीमेल जेनिटल म्यूटिलेशन (FGM), छौपदी, ब्रेस्ट आयरनिंग, अला कचू, ‘बाद’ और अमेरिका में अबॉर्शन पर सख्ती जैसी प्रथाएं अलग-अलग देशों में महिलाओं की हेल्थ, सम्मान और अधिकारों को प्रभावित कर रही हैं.

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दुनिया भर में आज भी जिंदा हैं महिलाओं से जुड़ी ये प्रथाएं, सुन उड़ जाएंगे होश. (Image: Jamila Stukova)

Female Genital Mutilation (FGM) in 2026: अलग-अलग संस्कृतियों में महिलाओं के शरीर को लंबे समय से आज़ादी के बजाय कंट्रोल की जगह माना जाता रहा है. अगर आपको लगता है कि फीमेल जेनिटल म्यूटिलेशन (Female Genital Mutilation (FGM) या ब्रेस्ट आयरनिंग (Breast Ironing) जैसी प्रथाएं पुरानी बात हो गई हैं या गांवों में होने वाली बात हो गई हैं, तो आप गलत हैं. ये नुकसानदायक प्रथाएं आज भी बड़े शहरों और बड़े देशों में कई लोगों की ज़िंदगी को परेशान करती हैं और महिलाओं को उनकी आजादी और इज्जत से दूर कर रही हैं. आइए जानते हैं कुछ ऐसे देशों के बारे में जहां आज के समय में भी महिलाओं को कई प्रथाओं का सामना करना पड़ रहा है...

फीमेल जेनिटल म्यूटिलेशन : 

फीमेल जेनिटल म्यूटिलेशन (FGM) एक ऐसी प्रथा है जिसमें बिना किसी मेडिकल जरूरत के लड़की या महिला के बाहरी जननांगों को काट दिया जाता है. यह ज्यादातर छोटी बच्चियों से लेकर 15 साल तक की लड़कियों के साथ किया जाता है. इसका कोई भी सेहत को फायदा नहीं है.

ऐसा करने के बाद बहुत तेज दर्द, ज्यादा खून बहना, शॉक, इंफेक्शन, HIV का खतरा और पेशाब करने में दिक्कत हो सकती है. आगे चलकर बच्चे पैदा करने में दिक्कत, डिलीवरी में परेशानी, ज्यादा ब्लीडिंग, जन्म के बाद मृत्यु, नवजात की मौत, एंग्जायटी और डिप्रेशन जैसी गंभीर समस्याएं हो सकती हैं. यह प्रथा अफ्रीकी देशों में देखने को मिलती है.

Image Credit: APF Photo/Safin Hamed 

छौपदी : 

छौपदी नेपाल की एक पुरानी प्रथा है जो पीरियड्स से जुड़ी है. इसमें मासिक धर्म के दौरान महिलाओं और लड़कियों को “अशुद्ध” मान लिया जाता है और उन्हें घर और परिवार से अलग कर दिया जाता है. यह ज्यादातर नेपाल के पश्चिमी इलाकों में देखने को मिलती है, लेकिन अलग-अलग नामों और तरीकों से देश के दूसरे हिस्सों और शहरों में भी होती है.

पीरियड्स के दिनों में महिलाओं को घर के अंदर रहने नहीं दिया जाता. उन्हें मवेशियों के बाड़े या अलग बनी छोटी झोपड़ी में रहना पड़ता है. बच्चे के जन्म के समय भी ऐसा ही किया जाता है. इन दिनों उन्हें नॉर्मल काम और लोगों से मिलने-जुलने की इजाज़त नहीं होती.

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ब्रेस्ट आयरनिंग (कैमरून) :

यह एक ऐसी प्रथा है जिसमें कम उम्र की लड़कियों के उभरते स्तनों को दबाकर या गर्म चीज से सेंककर सपाट करने की कोशिश की जाती है, ताकि उन पर पुरुषों का ध्यान न जाए. कुछ समुदायों में ऐसा ये सोचकर किया जाता है कि इससे लड़कियां सेफ रहेंगी या जल्दी शादी और यौन शोषण से बच जाएंगी. यह काफी दर्दनाक और नुकसानदायक होता है. इससे चोट, सूजन, इंफेक्शन और कई तरह की समस्याओं का सामना करना पड़ता है.

 Image: Jamila Stukova

अला कचू (किर्गिस्तान) : 

इस प्रथा में आदमी और उसके कुछ दोस्त लड़की को उसके घर से उठाकर अपने घर ले जाते हैं और उसपर शादी करने के लिए दबाव डाला जाता है. सर्वे के मुताबिक किर्गिस्तान में 3 में से 1 शादी इसी तरह से होती है.

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बाद (अफगानिस्तान) : 

'बाद' अफगानिस्तान की एक पुरानी प्रथा है. इसमें अगर किसी परिवार से कोई गंभीर गलती हो जाए, जैसे हत्या या किसी तरह का झगड़ा, तो सज़ा के तौर पर उस परिवार की एक जवान लड़की को दूसरे यानी पीड़ित परिवार को दे दिया जाता है.

अबॉर्शन पर पाबंदी (USA) :

साल 2022 में अमेरिका में एक बड़ा कोर्ट फैसला बदला गया, जिसके बाद अबॉर्शन कराना महिलाओं के लिए काफी मुश्किल हो गया. फैसला बदलने के सिर्फ 100 दिनों के अंदर 15 राज्यों में 66 क्लीनिक बंद हो गए. इसका असर यह हुआ कि करीब 30 फीसदी महिलाओं के पास अपने आसपास अबॉर्शन की सुविधा नहीं रही.

(अस्वीकरण: सलाह सहित यह सामग्री केवल सामान्य जानकारी प्रदान करती है. यह किसी भी तरह से योग्य चिकित्सा राय का विकल्प नहीं है. अधिक जानकारी के लिए हमेशा किसी विशेषज्ञ या अपने चिकित्सक से परामर्श करें. एनडीटीवी इस जानकारी के लिए ज़िम्मेदारी का दावा नहीं करता है.)

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