कैसे पहचानें End Stage Kidney Disease के लक्षण, क्यों होती है ये समस्या, कैसे करें रोकथाम, जानिए सबकुछ यहां

End Stage Renal Disease: एंड स्टेज की किडनी की बीमारी गंभीर है, लेकिन सही लाइफ स्टाइल, रेगुलर चेकअप और समय पर इलाज से इसके असर को कम किया जा सकता है. जागरूकता और सतर्कता ही इसके खिलाफ सबसे बड़ा बचाव है.

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नियमित रूप से जांच करवाते रहें ताकि किडनी की स्थिति पर नज़र रखी जा सके.

End Stage Renal Disease : हमारे शरीर में किडनी बेहद अहम भूमिका निभाते हैं. ये ब्लड को साफ रखते हैं, एक्स्ट्रा पानी और बेकार तत्वों को बाहर निकालते हैं और शरीर में मिनरल्स का बैलेंस बनाए रखते हैं. लेकिन जब किडनी धीरे-धीरे अपना काम करना बंद कर देती हैं, तब इस स्थिति को किडनी की बीमारी कहा जाता है. जब यह समस्या इतनी बढ़ जाती है कि किडनी लगभग काम करना बंद कर दें, तो इसे एंड स्टेज की किडनी की बीमारी या किडनी फेल होना कहा जाता है. इस अवस्था में व्यक्ति को जीवित रहने के लिए डायलिसिस या किडनी ट्रांसप्लांट की जरूरत पड़ सकती है. यह बीमारी धीरे-धीरे बढ़ती है, इसलिए शुरुआती लक्षणों को समझना और समय रहते इलाज करवाना बहुत जरूरी है.

क्या है एंड स्टेज रेनाल डिसीज - End Stage Renal Disease

एंड स्टेज रेनाल डिजीज तब होती है जब लंबे समय से चल रही किडनी की परेशानी बढ़कर इस स्तर पर पहुंच जाती है कि किडनी ब्लड को ठीक से साफ नहीं कर पाती. इस वजह से शरीर में अपशिष्ट और तरल पदार्थ जमा होने लगते हैं, जिससे कई गंभीर समस्याएं पैदा होती हैं. शुरुआत में इसका पता लगाना मुश्किल होता है क्योंकि शुरुआती लक्षण हल्के होते हैं. जैसे-जैसे बीमारी बढ़ती है, मतली, उल्टी, भूख न लगना, थकान, पैरों में सूजन, सांस लेने में परेशानी और पेशाब में बदलाव जैसे संकेत दिखने लगते हैं. कुछ लोगों को लगातार खुजली या मांसपेशियों में खिंचाव भी महसूस होता है.

कैसे होती है ये समस्या? How to start End Stage Renal Disease

कई बार हाई ब्लड प्रेशर, डायबिटीज या लगातार इन्फेक्शन जैसी समस्याएं इस बीमारी का कारण बनती हैं. उम्र बढ़ने, तंबाकू सेवन और फैमिली हिस्ट्री से भी इसका खतरा बढ़ता है. किडनी को नुकसान पहुंचाने वाली दवाएं या लापरवाह खान-पान स्थिति को और खराब कर सकते हैं. अगर किसी व्यक्ति को पहले से डायबिटीज या ब्लड प्रेशर की समस्या है, तो नियमित ब्लड और यूरिन की जांच करवाना जरूरी है. इससे किडनी की काम करने की क्षमता की निगरानी होती रहती है और समय रहते इलाज शुरू किया जा सकता है.

क्या होता शरीर पर असर | what impact of end stage renal disease

जब किडनी लगभग काम करना बंद कर देती है, तो शरीर में तरल पदार्थ जमा होने लगते हैं जिससे हाथ-पैर सूज जाते हैं. ब्लड में पोटेशियम का स्तर बढ़ने से दिल की धड़कन प्रभावित हो सकती है. हड्डियां कमजोर हो जाती हैं, एनीमिया और थकान जैसी समस्याएं बढ़ जाती हैं. इसके अलावा इन्फेक्शन का खतरा, ध्यान केंद्रित करने में परेशानी और दिल से जुड़ी बीमारियां भी सामने आ सकती हैं.

रोकथाम और देखभाल | Prevention and care end stage renal disease 

हालांकि इस बीमारी को पूरी तरह ठीक नहीं किया जा सकता, लेकिन इसे बढ़ने से कम किया जा सकता है.

  • संतुलित आहार लें और ज्यादा नमक या प्रोटीन से बचें.
  • ब्लड प्रेशर और शुगर को कंट्रोल में रखें.
  • धूम्रपान और तंबाकू से दूरी बनाएं.
  • रोज थोड़ा व्यायाम करें और वजन सही रखें.
  • डॉक्टर की बताई दवाएं समय पर लें.
  • नियमित रूप से जांच करवाते रहें, ताकि किडनी की स्थिति पर नजर रखी जा सके.

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(अस्वीकरण: सलाह सहित यह सामग्री केवल सामान्य जानकारी प्रदान करती है. यह किसी भी तरह से योग्य चिकित्सा राय का विकल्प नहीं है. अधिक जानकारी के लिए हमेशा किसी विशेषज्ञ या अपने चिकित्सक से परामर्श करें. एनडीटीवी इस जानकारी के लिए ज़िम्मेदारी का दावा नहीं करता है.)

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