Delhi Annual birth Report 2025 : सही उम्र में शादी और सही समय पर बच्चा," यह सलाह आपने अपने बड़ों से जरूर सुनी होगी. लेकिन क्या वाकई मां बनने की कोई परफेक्ट उम्र होती है? हाल ही में दिल्ली सरकार की ताजा रिपोर्ट ने इस सवाल का जवाब कुछ ऐसे आंकड़ों के साथ दिया है, जो हर महिला और परिवार को जानना चाहिए. आपको बता दें कि सिविल रजिस्ट्रेशन सिस्टम (CRS) 2024 की रिपोर्ट में यह साफ हो गया है कि दिल्ली की महिलाएं अब अपनी सेहत और करियर के बीच एक बहुत ही समझदारी भरा बैलेंस बनाकर चल रही हैं. ऐसे में आइए जानते हैं कि आखिर दिल्ली में किस उम्र में मां बनना सबसे ज्यादा पसंद किया जा रहा है और इसके पीछे की वजह क्या है.
दिल्ली में मां बनने की उम्र
दिल्ली में साल 2024 के दौरान कुल 3,06,459 बच्चों का जन्म हुआ. जब इन आंकड़ों की गहराई से जांच की गई, तो मां बनने की उम्र को लेकर बहुत ही दिलचस्प बातें सामने आईं. रिपोर्ट के मुताबिक, दिल्ली में सबसे ज्यादा बच्चे 25 से 29 साल की उम्र वाली माताओं ने पैदा किए हैं. इस एज ग्रुप का हिस्सा कुल जन्मों में 36.98% है.
एक्सपर्ट्स का मानना है कि 25 से 29 साल की उम्र को मेडिकल तौर पर भी सबसे सुरक्षित माना जाता है. इस उम्र में मां और बच्चा दोनों की सेहत को खतरा कम होता है और रिकवरी में भी परेशानी नहीं आती है.
देर से मां बनने का बढ़ रहा है चलन
आज के दौर में करियर और पढ़ाई की वजह से महिलाएं अब थोड़ा रुककर मां बनना पसंद कर रही हैं. रिपोर्ट के आंकड़े भी यही गवाही दे रहे हैं. 2024 में 30 से 34 साल की उम्र में मां बनने वाली महिलाओं की संख्या 24.57% रही. वहीं, 35 साल से ज्यादा की उम्र में बच्चे को जन्म देने वाली माताओं का ग्राफ भी बढ़ा है, जो अब 8.78% पर पहुंच गया है. ये आंकड़े साफ दिखाते हैं कि दिल्ली में अब लेट प्रेगनेंसी कोई अनोखी बात नहीं रह गई है.
छोटी उम्र में मां बनने के मामले घटे
एक अच्छी खबर यह है कि कम उम्र (19 साल या उससे कम) में मां बनने के मामलों में काफी कमी आई है. 2024 में यह आंकड़ा सिर्फ 2.57% रहा. सरकार का कहना है कि कम उम्र में मां बनना जच्चा-बच्चा दोनों के लिए जानलेवा हो सकता है, इसलिए झुग्गी-बस्तियों और पिछड़े इलाकों में जागरूकता अभियान चलाने की अभी भी जरूरत है.
छोटे परिवारों की ओर बढ़ती दिल्ली
दिल्लीवाले अब "छोटा परिवार, सुखी परिवार" के मंत्र को सीरियस से ले रहे हैं. रिपोर्ट के मुताबिक-
51.49% जन्म 'पहले बच्चे' के रूप में रजिस्टर हुए.
36.39% मामले 'दूसरे बच्चे' के थे.
यानी दिल्ली के 87.88% परिवारों में सिर्फ एक या दो ही बच्चे हैं.
तीन या उससे ज्यादा बच्चे वाले परिवार अब गिनती के रह गए हैं.
बेटा-बेटी में कितना है अंतर?
साल 2024 में दिल्ली का सेक्स रेशियो (Sex Ratio) 920 रहा. यानी हर 1000 लड़कों पर 920 लड़कियों ने जन्म लिया. एक हैरान करने वाला तथ्य यह है कि अस्पतालों के मुकाबले घरों में होने वाली डिलीवरी (Domiciliary Births) में बेटियों की संख्या ज्यादा देखी गई, जहां सेक्स रेशियो 1060 दर्ज किया गया. कुल मिलाकर, दिल्ली की ये रिपोर्ट दिखाती है कि राजधानी के लोग अब अपनी और अपने बच्चों की सेहत को लेकर काफी जागरूक हो गए हैं.
(अस्वीकरण: सलाह सहित यह सामग्री केवल सामान्य जानकारी प्रदान करती है. यह किसी भी तरह से योग्य चिकित्सा राय का विकल्प नहीं है. अधिक जानकारी के लिए हमेशा किसी विशेषज्ञ या अपने चिकित्सक से परामर्श करें. एनडीटीवी इस जानकारी के लिए ज़िम्मेदारी का दावा नहीं करता है.)














